झारखंड के बोकारो जिले में अवैध कोयला कारोबार और उसकी तस्करी के खिलाफ केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) ने बड़ी कार्रवाई की है। सीसीएल (सेंट्रल कोलफील्ड्स लिमिटेड) के कथारा क्षेत्र में खुफिया सूचना के आधार पर छापेमारी कर बल ने कोयले से लदा एक ट्रक जब्त किया। ट्रक में करीब 30 टन कोयला होने की जानकारी सामने आई है, जिसकी अनुमानित कीमत लगभग 3 लाख रुपये बताई जा रही है। कार्रवाई के दौरान ट्रक और उसमें लदे कोयले को कब्जे में ले लिया गया। मामले में खान एवं खनिज (विकास और विनियमन) अधिनियम, 1957 यानी MMDR एक्ट के तहत कानूनी प्रक्रिया शुरू की गई है।
जानकारी के मुताबिक, यह कार्रवाई बोकारो थर्मल थाना क्षेत्र के कथारा इलाके में की गई। सीसीएल कथारा एरिया से मिली खुफिया जानकारी के बाद CISF की टीम ने संबंधित स्थान पर निगरानी शुरू की थी। इसके बाद कार्मेल स्कूल से लगभग 500 मीटर की दूरी पर हरिजन बस्ती स्थित ईंट-भट्ठे के पास कार्रवाई की गई। यहां कोयला लोड किए जा रहे ट्रक को टीम ने अपने कब्जे में ले लिया। जब्त वाहन का रजिस्ट्रेशन नंबर NL-01-AC-4676 बताया गया है।
इस अभियान का नेतृत्व CISF की सीसीएल करगली यूनिट के कमांडेंट राज प्रताप सिंह के दिशा-निर्देश पर किया गया। कथारा क्षेत्र से मिली सूचना के आधार पर सहायक कमांडेंट धनंजय पांडेय के नेतृत्व में विशेष टीम गठित की गई थी। टीम ने सूचना के आधार पर इलाके में घेराबंदी की और कार्रवाई को अंजाम दिया। इस दौरान ट्रक में लदे कोयले को भी जब्त किया गया।
फिलहाल इस मामले में सबसे अहम सवाल यह है कि जब्त कोयला कहां से लाया गया था और इसे कहां ले जाने की तैयारी थी। कोयले के स्रोत, परिवहन से जुड़े दस्तावेजों और ट्रक के मालिक की जानकारी जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी। जब्त वाहन के चालक और अवैध कारोबार से जुड़े अन्य लोगों के संबंध में भी विस्तृत जानकारी सामने आना बाकी है। इसलिए पूरे मामले में जांच और कानूनी प्रक्रिया के आगे बढ़ने के बाद ही जिम्मेदार लोगों की भूमिका स्पष्ट होगी।
अवैध कोयला कारोबार पर शिकंजा कसने की तैयारी
बोकारो और आसपास का बेरमो कोयलांचल क्षेत्र कोयला उत्पादन और परिवहन के लिहाज से महत्वपूर्ण है। यहां सीसीएल की अलग-अलग परियोजनाओं और कोयला क्षेत्रों से बड़ी मात्रा में कोयले का उत्पादन तथा परिवहन होता है। ऐसे क्षेत्रों में अवैध खनन, चोरी और बिना वैध दस्तावेजों के कोयले का परिवहन सरकारी राजस्व के साथ-साथ अधिकृत खनन और आपूर्ति व्यवस्था के लिए भी चुनौती बनता है। इसी वजह से सुरक्षा एजेंसियां संवेदनशील स्थानों पर निगरानी, गश्त और खुफिया सूचनाओं के आधार पर कार्रवाई कर रही हैं।
अवैध कोयला कारोबार पर रोक लगाने के लिए केंद्र सरकार ने भी कार्रवाई का दायरा बढ़ाया है। खान एवं खनिज (विकास और विनियमन) अधिनियम, 1957 के तहत नामित CISF अधिकारियों को कुछ महत्वपूर्ण वैधानिक अधिकार दिए गए हैं। अधिनियम की धाराओं 22, 23B और 24 के तहत अधिकृत अधिकारी अवैध खनन और खनिजों के अवैध भंडारण या परिवहन से जुड़े मामलों में तलाशी और जब्ती की कार्रवाई कर सकते हैं। उन्हें निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के तहत सक्षम न्यायालय में लिखित शिकायत प्रस्तुत करने का अधिकार भी दिया गया है। इन अधिकारों का उद्देश्य अवैध खनन और कोयले की चोरी से जुड़े मामलों में कार्रवाई को अधिक प्रभावी बनाना है।
गृह मंत्रालय की ओर से जुलाई 2026 में जारी जानकारी के अनुसार, CISF ने झारखंड और पश्चिम बंगाल के विभिन्न कोयला क्षेत्रों में 4 से 8 जुलाई के बीच संयुक्त अभियान चलाकर 428.34 मीट्रिक टन अवैध रूप से खनन, संग्रहित या परिवहन किए जा रहे कोयले की बरामदगी की थी। इस अभियान में चार प्राथमिकी दर्ज की गई थीं और कोयला परिवहन में इस्तेमाल किए जा रहे वाहन भी जब्त किए गए थे। यह कार्रवाई कोयला चोरी और अवैध परिवहन के खिलाफ केंद्र सरकार की व्यापक मुहिम का हिस्सा थी।
बोकारो थर्मल में हुई ताजा कार्रवाई भी इसी तरह की निगरानी और प्रवर्तन अभियान के संदर्भ में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। हालांकि, एक ट्रक की जब्ती से पूरे अवैध कारोबार पर रोक लगने का दावा नहीं किया जा सकता। इसके लिए कोयले के अवैध स्रोत, उसे इकट्ठा करने वाले लोगों, परिवहन के रास्तों और खरीदारों तक पहुंचने वाले नेटवर्क की जांच जरूरी है। यदि जांच में किसी संगठित गिरोह या अन्य लोगों की संलिप्तता सामने आती है, तो उनके खिलाफ भी कानून के अनुसार कार्रवाई की जा सकती है।
फिलहाल CISF की कार्रवाई में करीब 30 टन कोयले से लदा ट्रक जब्त किया गया है। अब जांच का मुख्य केंद्र कोयले के स्रोत और उसके परिवहन से जुड़े दस्तावेज होंगे। मामले में आगे की कार्रवाई के बाद ही यह साफ हो सकेगा कि इस कोयले के अवैध कारोबार में और कौन-कौन लोग शामिल थे।
