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Coal India Production: अक्टूबर में रिकॉर्ड कोयला उत्पादन, फिर भी लक्ष्य से 7.04% पीछे कंपनी, ECL और WCL ने मारी बाजी

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Coal India Production: अक्टूबर में रिकॉर्ड कोयला उत्पादन, फिर भी लक्ष्य से 7.04% पीछे कंपनी, ECL और WCL ने मारी बाजी

Coal India Production News: कोल इंडिया लिमिटेड (CIL) ने अक्टूबर 2026 में कोयला उत्पादन के मामले में शानदार वापसी करते हुए अक्टूबर महीने का अब तक का रिकॉर्ड उत्पादन दर्ज किया है। कंपनी ने अक्टूबर में 67.24 मिलियन टन कोयले का उत्पादन किया, जो पिछले साल इसी महीने के मुकाबले करीब 19.27 प्रतिशत अधिक है। हालांकि, मासिक उत्पादन में सुधार के बावजूद चालू वित्त वर्ष 2026-27 के अप्रैल से अक्टूबर तक के संचयी आंकड़े बताते हैं कि कंपनी अपने निर्धारित लक्ष्य से अब भी पीछे चल रही है। 31 अक्टूबर तक कोल इंडिया ने 417.50 मिलियन टन के निर्धारित लक्ष्य के मुकाबले 388.12 मिलियन टन उत्पादन किया है। इस तरह कंपनी लक्ष्य का 92.96 प्रतिशत ही हासिल कर सकी है। ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (ECL) और वेस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (WCL) ने लक्ष्य से अधिक उत्पादन किया है, जबकि झारखंड की सेंट्रल कोलफील्ड्स लिमिटेड (CCL) समेत कई सहायक कंपनियों का प्रदर्शन अपेक्षाकृत कमजोर रहा है।

कोल इंडिया के उत्पादन आंकड़ों के मुताबिक, अक्टूबर महीने में उत्पादन की रफ्तार में उल्लेखनीय सुधार हुआ। कंपनी ने 69.31 मिलियन टन के मासिक लक्ष्य के मुकाबले 67.24 मिलियन टन कोयले का उत्पादन किया। यह निर्धारित लक्ष्य का 97.01 प्रतिशत है। पिछले साल अक्टूबर में कंपनी का उत्पादन लगभग 56.38 मिलियन टन था। इस लिहाज से इस बार उत्पादन में 10.86 मिलियन टन की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। मानसून के महीनों के बाद उत्पादन गतिविधियों में आई तेजी ने अक्टूबर के आंकड़ों को मजबूती दी है।

हालांकि, अक्टूबर के अच्छे प्रदर्शन को पूरे वित्त वर्ष की स्थिति से अलग करके नहीं देखा जा सकता। अप्रैल से अक्टूबर 2026 तक कंपनी का निर्धारित उत्पादन लक्ष्य 417.50 मिलियन टन था, जबकि वास्तविक उत्पादन 388.12 मिलियन टन रहा। यानी सात महीनों में कंपनी निर्धारित लक्ष्य से 29.38 मिलियन टन पीछे है। प्रतिशत में यह कमी 7.04 फीसदी बैठती है। वित्त वर्ष 2026-27 के लिए कोल इंडिया का कुल उत्पादन लक्ष्य लगभग 815 मिलियन टन रखा गया है। ऐसे में कंपनी के सामने शेष पांच महीनों में उत्पादन की रफ्तार बनाए रखने के साथ पिछड़ी हुई उपलब्धि की भरपाई करने की चुनौती होगी।

ECL और WCL ने लक्ष्य से ज्यादा किया उत्पादन

कोल इंडिया की सहायक कंपनियों के प्रदर्शन पर नजर डालें तो ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड और वेस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड सबसे बेहतर स्थिति में दिखाई दे रही हैं। इन दोनों कंपनियों ने अक्टूबर महीने के साथ-साथ अप्रैल से अक्टूबर तक के संचयी उत्पादन लक्ष्य को भी पार किया है।

ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (ECL) ने अक्टूबर में 4 मिलियन टन के निर्धारित लक्ष्य के मुकाबले 4.63 मिलियन टन कोयले का उत्पादन किया। कंपनी की मासिक लक्ष्य प्राप्ति 115.64 प्रतिशत रही। वहीं अप्रैल से अक्टूबर तक इसका निर्धारित लक्ष्य 26.54 मिलियन टन था, जबकि वास्तविक उत्पादन 26.90 मिलियन टन दर्ज किया गया। इस तरह ECL ने सात महीनों में अपने संचयी लक्ष्य का 101.34 प्रतिशत हासिल कर लिया।

वेस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (WCL) का प्रदर्शन भी उल्लेखनीय रहा। कंपनी ने अक्टूबर में 5.47 मिलियन टन के लक्ष्य के मुकाबले 5.93 मिलियन टन उत्पादन किया। यह मासिक लक्ष्य का 108.38 प्रतिशत है। वहीं चालू वित्त वर्ष में अक्टूबर तक WCL का उत्पादन 32.96 मिलियन टन रहा, जबकि निर्धारित लक्ष्य 32.17 मिलियन टन था। इस तरह कंपनी ने संचयी लक्ष्य का 102.47 प्रतिशत हासिल कर लिया है। अक्टूबर में WCL की सालाना आधार पर उत्पादन वृद्धि लगभग 64.87 प्रतिशत रही, जो कोल इंडिया की प्रमुख सहायक कंपनियों में सबसे अधिक है।

इन दोनों कंपनियों का प्रदर्शन बताता है कि कोल इंडिया के भीतर कुछ उत्पादन इकाइयां निर्धारित लक्ष्य से आगे निकल चुकी हैं। हालांकि, दूसरी सहायक कंपनियों में उत्पादन की कमी के कारण पूरी कंपनी का संचयी आंकड़ा अभी भी लक्ष्य से नीचे है।

BCCL, NCL और CCL का प्रदर्शन चिंता का विषय

कोल इंडिया की सहायक कंपनियों में भारत कोकिंग कोल लिमिटेड (BCCL) की स्थिति अपेक्षाकृत कमजोर बनी हुई है। BCCL ने अक्टूबर में 2.87 मिलियन टन के लक्ष्य के मुकाबले 2.86 मिलियन टन उत्पादन किया। मासिक लक्ष्य प्राप्ति 99.80 प्रतिशत रही, यानी कंपनी लगभग अपना मासिक लक्ष्य हासिल करने के करीब रही। लेकिन अप्रैल से अक्टूबर तक का आंकड़ा उतना बेहतर नहीं है। इस अवधि में BCCL का निर्धारित उत्पादन लक्ष्य 19.93 मिलियन टन था, जबकि वास्तविक उत्पादन 16.51 मिलियन टन रहा। कंपनी की संचयी लक्ष्य प्राप्ति केवल 82.83 प्रतिशत दर्ज की गई है।

नॉर्दर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (NCL) की स्थिति भी चुनौतीपूर्ण है। कंपनी ने अक्टूबर में 12.07 मिलियन टन के लक्ष्य के मुकाबले 11.44 मिलियन टन कोयले का उत्पादन किया। मासिक लक्ष्य प्राप्ति 94.80 प्रतिशत रही। वहीं अप्रैल से अक्टूबर तक NCL का उत्पादन 81.12 मिलियन टन के लक्ष्य के मुकाबले 69.44 मिलियन टन रहा। इस तरह कंपनी ने संचयी लक्ष्य का 85.60 प्रतिशत हासिल किया है। अक्टूबर में NCL के उत्पादन में पिछले साल के इसी महीने की तुलना में लगभग 4.30 प्रतिशत की गिरावट भी दर्ज की गई।

महानदी कोलफील्ड्स लिमिटेड (MCL) ने अक्टूबर में 21.42 मिलियन टन के लक्ष्य के मुकाबले 20.82 मिलियन टन उत्पादन किया। कंपनी की मासिक लक्ष्य प्राप्ति 97.19 प्रतिशत रही। अप्रैल से अक्टूबर तक MCL का उत्पादन 111.97 मिलियन टन के लक्ष्य के मुकाबले 108.35 मिलियन टन दर्ज किया गया। इस तरह इसकी संचयी लक्ष्य प्राप्ति 96.77 प्रतिशत रही।

साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (SECL) ने अक्टूबर में 15.08 मिलियन टन के लक्ष्य के मुकाबले 14.29 मिलियन टन कोयले का उत्पादन किया। कंपनी ने मासिक लक्ष्य का 94.77 प्रतिशत हासिल किया। अप्रैल से अक्टूबर तक इसका कुल उत्पादन 91.17 मिलियन टन रहा, जबकि निर्धारित लक्ष्य 98.40 मिलियन टन था। इस तरह SECL की संचयी उपलब्धि 92.65 प्रतिशत रही।

इन आंकड़ों से साफ है कि कोल इंडिया की कई बड़ी सहायक कंपनियां अभी भी अपने निर्धारित उत्पादन लक्ष्य तक नहीं पहुंच पाई हैं। खास तौर पर BCCL और NCL के आंकड़े कंपनी के समग्र प्रदर्शन पर दबाव डाल रहे हैं।

झारखंड की CCL ने अक्टूबर में बढ़ाया उत्पादन, लेकिन लक्ष्य से पीछे

झारखंड में कोयला उत्पादन के लिहाज से महत्वपूर्ण सेंट्रल कोलफील्ड्स लिमिटेड (CCL) का प्रदर्शन भी चर्चा में है। कंपनी ने अक्टूबर में उत्पादन में पिछले साल की तुलना में अच्छी बढ़ोतरी दर्ज की, लेकिन निर्धारित मासिक लक्ष्य हासिल नहीं कर सकी। अक्टूबर में CCL का लक्ष्य 8.41 मिलियन टन था, जबकि वास्तविक उत्पादन 7.25 मिलियन टन रहा। इस तरह मासिक उपलब्धि 86.23 प्रतिशत पर सिमट गई।

हालांकि, सालाना आधार पर अक्टूबर में CCL का उत्पादन करीब 26 प्रतिशत बढ़ा है। यह संकेत देता है कि कंपनी की उत्पादन गतिविधियों में सुधार हुआ है, लेकिन मासिक लक्ष्य और वास्तविक उत्पादन के बीच अभी भी अंतर बना हुआ है।

अप्रैल से अक्टूबर 2026 तक CCL का संचयी उत्पादन 42.73 मिलियन टन रहा, जबकि कंपनी के लिए इस अवधि का लक्ष्य 47.36 मिलियन टन निर्धारित किया गया था। यानी कंपनी ने लक्ष्य का 90.22 प्रतिशत हासिल किया। लक्ष्य के मुकाबले लगभग 4.63 मिलियन टन उत्पादन की कमी रही।

CCL के लिए आने वाले महीनों में उत्पादन बढ़ाना महत्वपूर्ण होगा। कंपनी का प्रदर्शन केवल कोल इंडिया के कुल उत्पादन आंकड़ों के लिहाज से ही नहीं, बल्कि झारखंड के कोयला क्षेत्र और उससे जुड़े औद्योगिक तथा परिवहन तंत्र के लिए भी अहम है।

कोयला उत्पादन के साथ आपूर्ति और रेलवे से ढुलाई में भी रिकॉर्ड

कोल इंडिया के अक्टूबर के आंकड़ों की एक और महत्वपूर्ण बात यह है कि कंपनी ने सिर्फ उत्पादन में ही नहीं, बल्कि कोयले की आपूर्ति और बिजली क्षेत्र को डिस्पैच के मामले में भी रिकॉर्ड बनाया है। केंद्रीय कोयला मंत्रालय की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, अक्टूबर 2026 में कंपनी ने कुल 70.3 मिलियन टन कोयले की आपूर्ति की। यह किसी एक महीने में अब तक की सबसे अधिक आपूर्ति है। इससे पहले मार्च 2026 में 69.4 मिलियन टन कोयले की आपूर्ति का रिकॉर्ड बना था।

बिजली क्षेत्र को कोयले की आपूर्ति भी अक्टूबर में बढ़कर 57.1 मिलियन टन पहुंच गई। यह भी अब तक का सबसे बड़ा मासिक आंकड़ा है। इससे पहले मई 2024 में बिजली क्षेत्र को 56.5 मिलियन टन कोयले की आपूर्ति की गई थी। पिछले साल अक्टूबर की तुलना में इस बार कुल कोयला आपूर्ति में करीब 19 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।

रेलवे के माध्यम से कोयले की ढुलाई में भी कंपनी ने नया रिकॉर्ड बनाया। अक्टूबर में बिजली क्षेत्र के लिए प्रतिदिन औसतन 310 रेलवे रेक की लोडिंग दर्ज की गई। इससे पहले मार्च 2025 में प्रतिदिन 302.8 रेक लोडिंग का रिकॉर्ड था। कोयले की समय पर ढुलाई बिजली संयंत्रों तक पर्याप्त ईंधन पहुंचाने के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है।

यहां उत्पादन और आपूर्ति के आंकड़ों के बीच अंतर समझना भी जरूरी है। उत्पादन का अर्थ खदानों से निकाले गए कोयले की मात्रा है, जबकि आपूर्ति या ऑफटेक का आंकड़ा उपभोक्ताओं तक भेजे गए कोयले को दर्शाता है। इसलिए अक्टूबर में 67.24 मिलियन टन उत्पादन और 70.3 मिलियन टन आपूर्ति के आंकड़े अलग-अलग गतिविधियों को बताते हैं।

अब पांच महीनों में पूरा करना होगा उत्पादन का अंतर

कोल इंडिया के सामने वित्त वर्ष 2026-27 के शेष महीनों में उत्पादन बढ़ाने की चुनौती बनी हुई है। अक्टूबर तक कंपनी ने 388.12 मिलियन टन उत्पादन किया है, जबकि सात महीनों का निर्धारित लक्ष्य 417.50 मिलियन टन था। वित्त वर्ष का कुल लक्ष्य लगभग 815 मिलियन टन है। इसका अर्थ है कि नवंबर से मार्च के बीच कंपनी को शेष उत्पादन लक्ष्य हासिल करने के लिए लगभग 426.76 मिलियन टन कोयला निकालना होगा।

31 अक्टूबर तक उपलब्ध आधिकारिक उत्पादन आंकड़ों के आधार पर कंपनी को शेष अवधि में प्रतिदिन औसतन लगभग 28.26 लाख टन कोयले का उत्पादन करना होगा। यह लक्ष्य हासिल करने के लिए खदानों में उत्पादन की निरंतरता, मशीनों की उपलब्धता, कर्मचारियों की तैनाती, परिवहन व्यवस्था और कोयले की निकासी की प्रक्रिया को मजबूत रखना जरूरी होगा।

कोल इंडिया की स्थापना 1 नवंबर 1975 को हुई थी। कंपनी ने वित्त वर्ष 2025-26 में 768 मिलियन टन कोयले का उत्पादन किया था और वित्त वर्ष 2026-27 के लिए लगभग 815 मिलियन टन का लक्ष्य निर्धारित किया है। देश की ऊर्जा जरूरतों में कोयले की अहम भूमिका को देखते हुए कंपनी के उत्पादन और आपूर्ति के आंकड़ों पर लगातार नजर रखी जा रही है।

कुल मिलाकर, अक्टूबर 2026 कोल इंडिया के लिए उत्पादन और आपूर्ति दोनों मोर्चों पर बेहतर प्रदर्शन वाला महीना रहा। रिकॉर्ड अक्टूबर उत्पादन, बिजली क्षेत्र को अधिक आपूर्ति और रेलवे रेक लोडिंग में बढ़ोतरी कंपनी की सकारात्मक उपलब्धियां हैं। लेकिन अप्रैल से अक्टूबर तक संचयी उत्पादन लक्ष्य से 7.04 प्रतिशत पीछे रहना यह भी बताता है कि केवल एक महीने की तेजी से पूरे वित्त वर्ष का लक्ष्य हासिल करना आसान नहीं होगा। ECL और WCL जैसी कंपनियों का प्रदर्शन उम्मीद जगाता है, जबकि CCL, BCCL और NCL जैसी इकाइयों को आने वाले महीनों में उत्पादन की रफ्तार बढ़ानी होगी।

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