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झारखंड: औषधि नियंत्रण निदेशालय के संयुक्त निदेशक डॉ. सुजीत कुमार 33 साल की सेवा के बाद सेवानिवृत्त

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झारखंड: औषधि नियंत्रण निदेशालय के संयुक्त निदेशक डॉ. सुजीत कुमार 33 साल की सेवा के बाद सेवानिवृत्त

रांची: झारखंड राज्य औषधि नियंत्रण निदेशालय में संयुक्त निदेशक (औषधि) के पद पर कार्यरत डॉ. सुजीत कुमार 33 वर्षों की सेवा पूरी करने के बाद सेवानिवृत्त हो गए हैं। औषधि नियंत्रण विभाग में लंबे समय तक अपनी सेवाएं देने वाले डॉ. सुजीत कुमार की सेवानिवृत्ति को विभाग के लिए एक महत्वपूर्ण पड़ाव माना जा रहा है। उनका कार्यक्षेत्र दवाओं की गुणवत्ता, औषधि नियंत्रण से जुड़े नियमों और आम लोगों तक सुरक्षित दवाएं पहुंचाने की व्यवस्था से संबंधित रहा है।

डॉ. सुजीत कुमार झारखंड राज्य औषधि नियंत्रण निदेशालय में संयुक्त निदेशक के रूप में जिम्मेदारी संभाल रहे थे। राज्य सरकार के औषधि नियंत्रण निदेशालय की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध विभागीय जानकारी में भी उनका नाम संयुक्त निदेशक (औषधि) के रूप में दर्ज रहा है। विभाग की कार्यप्रणाली में इस पद की अहम भूमिका होती है, क्योंकि औषधियों की गुणवत्ता और नियमों के पालन से जुड़े मामलों में निदेशालय को लगातार प्रशासनिक और नियामक स्तर पर काम करना पड़ता है।

दवाओं की गुणवत्ता और आम लोगों की सुरक्षा से जुड़ा है विभाग का काम

झारखंड का राज्य औषधि नियंत्रण निदेशालय स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण विभाग के अंतर्गत काम करता है। इसका प्रमुख उद्देश्य राज्य के लोगों को सुरक्षित, प्रभावी और मानक गुणवत्ता वाली दवाएं उपलब्ध कराना है। इसके लिए विभाग औषधि निर्माण, बिक्री, वितरण और दवाओं से संबंधित नियमों के पालन पर निगरानी रखता है। दवा बाजार में उपलब्ध किसी उत्पाद की गुणवत्ता पर सवाल उठने, नियमों के उल्लंघन या प्रतिबंधित औषधियों से जुड़े मामलों में भी औषधि नियंत्रण व्यवस्था की भूमिका महत्वपूर्ण होती है।

निदेशालय की जिम्मेदारियां औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम, 1940 और इसके तहत बनाए गए नियमों के अनुपालन तक सीमित नहीं हैं। विभाग औषधियों की कीमतों से जुड़े प्रावधानों, भ्रामक औषधि विज्ञापनों और मादक एवं मन:प्रभावी पदार्थों से संबंधित कानूनों के क्रियान्वयन में भी भूमिका निभाता है। ऐसे में संयुक्त निदेशक जैसे वरिष्ठ पद पर कार्यरत अधिकारी को प्रशासनिक समन्वय, नियमों के अनुपालन और विभागीय कामकाज से जुड़े कई महत्वपूर्ण दायित्व निभाने पड़ते हैं।

दवाओं की गुणवत्ता का सवाल सीधे आम लोगों के स्वास्थ्य और सुरक्षा से जुड़ा है। बाजार में नकली, मिलावटी या निर्धारित गुणवत्ता पर खरे नहीं उतरने वाले औषधीय उत्पादों की मौजूदगी मरीजों के इलाज को प्रभावित कर सकती है। ऐसी स्थिति में औषधि नियंत्रण विभाग की निगरानी, जांच और कानूनी कार्रवाई की व्यवस्था महत्वपूर्ण हो जाती है। यही वजह है कि इस विभाग में लंबे समय तक काम करने वाले अनुभवी अधिकारियों की भूमिका को अहम माना जाता है।

33 साल का कार्यकाल पूरा होने के बाद अब नई जिम्मेदारी की चुनौती

डॉ. सुजीत कुमार की सेवानिवृत्ति के बाद निदेशालय में उनके जिम्मे रहे कार्यों और प्रशासनिक दायित्वों का सुचारु हस्तांतरण महत्वपूर्ण होगा। औषधि नियंत्रण विभाग के कामकाज में निरंतरता बनाए रखना इसलिए भी जरूरी है, क्योंकि दवाओं की गुणवत्ता की निगरानी, औषधि कारोबार से जुड़े नियमों का पालन और आम उपभोक्ताओं के हितों की सुरक्षा नियमित रूप से किए जाने वाले कार्य हैं।

33 वर्षों की सरकारी सेवा पूरी करने के बाद डॉ. सुजीत कुमार अब अपने विभागीय कार्यकाल से मुक्त हो गए हैं। उनके लंबे सेवाकाल के दौरान औषधि नियंत्रण व्यवस्था से जुड़े विभिन्न दायित्वों में उनकी भूमिका रही। फिलहाल उनके उत्तराधिकारी की नियुक्ति या विभाग में आगे की जिम्मेदारी किस अधिकारी को सौंपी जाएगी, इस संबंध में विस्तृत आधिकारिक जानकारी सामने आने के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी।

डॉ. सुजीत कुमार की सेवानिवृत्ति झारखंड के औषधि नियंत्रण निदेशालय में एक वरिष्ठ अधिकारी के लंबे कार्यकाल का समापन है। वहीं, राज्य में दवाओं की गुणवत्ता और औषधि नियमों के प्रभावी क्रियान्वयन की जिम्मेदारी आगे भी विभाग के लिए महत्वपूर्ण बनी रहेगी।

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