पटना जिले के बिहटा-बिक्रम रोड पर बिजली विभाग की लापरवाही को लेकर एक गंभीर मामला सामने आया है। सड़क किनारे लगा बिजली का ट्रांसफार्मर झुकी हुई स्थिति में है और उसमें करंट प्रवाहित होने की बात सामने आई है। ऐसे में यह ट्रांसफार्मर आसपास से गुजरने वाले लोगों के लिए खतरा बन सकता है। सबसे चिंताजनक बात यह है कि इस समस्या को लेकर शिकायत किए जाने के 24 घंटे बाद भी कार्रवाई नहीं होने की जानकारी सामने आई है। स्थानीय स्तर पर सामने आई इस स्थिति ने बिजली विभाग की कार्यप्रणाली और सार्वजनिक स्थानों पर बिजली उपकरणों की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
बिहटा-बिक्रम रोड इलाके के लोगों और इस मार्ग से नियमित रूप से आवागमन करने वाले यात्रियों के लिए यह स्थिति चिंता का विषय है। सड़क किनारे लगा ट्रांसफार्मर अगर पहले से झुका हुआ है और उसमें बिजली आपूर्ति जारी है, तो किसी भी समय अप्रिय घटना की आशंका बनी रह सकती है। खासकर व्यस्त सड़क पर इस तरह के विद्युत उपकरण का असुरक्षित अवस्था में होना राहगीरों, दोपहिया वाहन चालकों और आसपास रहने वाले लोगों के लिए जोखिम पैदा कर सकता है।
शिकायत के बाद भी कार्रवाई नहीं होने पर उठ रहे सवाल
इस मामले में सबसे बड़ा सवाल बिजली विभाग की शिकायत निवारण व्यवस्था को लेकर है। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार, ट्रांसफार्मर की खतरनाक स्थिति की शिकायत किए जाने के बावजूद 24 घंटे बीतने पर भी समस्या का समाधान नहीं हुआ था। बिजली से जुड़ी किसी तकनीकी खराबी को सामान्य परेशानी मानकर टालना अलग बात है, लेकिन करंट प्रवाहित हो रहे झुके हुए ट्रांसफार्मर का मामला सीधे लोगों की सुरक्षा से जुड़ा है। ऐसी स्थिति में विभाग की प्राथमिकता तत्काल मौके पर पहुंचकर खतरे का आकलन करना और आवश्यक सुरक्षा उपाय करना होनी चाहिए।
ट्रांसफार्मर जैसे विद्युत उपकरणों के आसपास सुरक्षा व्यवस्था का सही होना बेहद जरूरी है। इनके सहारे बड़ी संख्या में घरों, दुकानों और अन्य प्रतिष्ठानों तक बिजली पहुंचाई जाती है। लेकिन बिजली आपूर्ति बनाए रखने के साथ-साथ उपकरणों की तकनीकी स्थिति और उनकी सुरक्षित स्थापना की निगरानी भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। ट्रांसफार्मर का झुकना उसके आधार, सपोर्ट स्ट्रक्चर या आसपास की तकनीकी व्यवस्था में संभावित समस्या का संकेत हो सकता है। हालांकि, वास्तविक खराबी का कारण तकनीकी निरीक्षण के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
यदि किसी ट्रांसफार्मर का ढांचा अस्थिर हो जाए, तो उसके साथ जुड़े तारों और अन्य विद्युत उपकरणों पर भी दबाव पड़ सकता है। इससे शॉर्ट सर्किट, तार टूटने या विद्युत दुर्घटना जैसी स्थितियों का खतरा पैदा हो सकता है। इसलिए ऐसे मामले में केवल ट्रांसफार्मर की मरम्मत ही नहीं, बल्कि उसके आधार, सपोर्ट, कनेक्शन और आसपास की सुरक्षा व्यवस्था की भी जांच जरूरी है।
बिहटा-बिक्रम रोड पर बढ़ सकती है आम लोगों की परेशानी
बिहटा और बिक्रम क्षेत्र के बीच सड़क मार्ग से स्थानीय लोगों के अलावा रोजाना कई प्रकार के वाहनों का आवागमन होता है। ऐसे मार्ग पर बिजली के उपकरणों की सुरक्षा में किसी भी तरह की कमी दुर्घटना का कारण बन सकती है। सड़क के किनारे स्थित ट्रांसफार्मर के आसपास से गुजरते समय लोगों को यह पता नहीं होता कि उपकरण किस तकनीकी स्थिति में है। ऐसे में विभाग की जिम्मेदारी है कि खराब या असुरक्षित उपकरणों की समय रहते पहचान कर उन्हें ठीक कराया जाए।
खासतौर पर बच्चों, बुजुर्गों और स्थानीय दुकानदारों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए ऐसे स्थानों पर अतिरिक्त सावधानी बरतने की जरूरत होती है। यदि किसी विद्युत उपकरण में खराबी दिखाई देती है, तो उसके आसपास अनावश्यक भीड़ जुटने से भी खतरा बढ़ सकता है। बिजली विभाग को तत्काल मौके का निरीक्षण कर जरूरत के अनुसार बिजली आपूर्ति बंद करने, क्षेत्र की घेराबंदी करने और तकनीकी कर्मचारियों की मदद से ट्रांसफार्मर को सुरक्षित स्थिति में लाने की कार्रवाई करनी चाहिए।
बिजली विभाग के लिए सुरक्षा व्यवस्था दुरुस्त करना जरूरी
सार्वजनिक स्थानों पर लगे ट्रांसफार्मर और बिजली के अन्य उपकरणों का नियमित निरीक्षण बेहद जरूरी है। केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (CEA) की ओर से विद्युत सुरक्षा और आपूर्ति से संबंधित नियम भी अधिसूचित किए गए हैं। इनका उद्देश्य विद्युत प्रतिष्ठानों और आपूर्ति व्यवस्था को सुरक्षित बनाए रखना है। ट्रांसफार्मर की स्थापना, रखरखाव और तकनीकी जांच में सुरक्षा मानकों का पालन करना आवश्यक है।
बिहटा-बिक्रम रोड पर सामने आए मामले में भी विभाग को शिकायत का इंतजार करने के बजाय तत्काल स्थल का निरीक्षण करना चाहिए। यदि ट्रांसफार्मर का आधार कमजोर है या उसका सपोर्ट क्षतिग्रस्त हो गया है, तो उसकी तकनीकी मरम्मत और आवश्यकता पड़ने पर सुरक्षित स्थान पर शिफ्ट करने की व्यवस्था की जानी चाहिए। इसके साथ ही आसपास से गुजरने वाले लोगों को खतरे के प्रति सचेत करने के लिए बैरिकेडिंग और चेतावनी संबंधी इंतजाम भी जरूरी हैं।
इस मामले में बिजली विभाग की ओर से मौके पर कार्रवाई किए जाने, ट्रांसफार्मर को ठीक करने या उसे सुरक्षित स्थान पर लगाने की कोई पुष्टि उपलब्ध जानकारी में नहीं मिली है। इसलिए फिलहाल यह कहना उचित नहीं होगा कि समस्या का समाधान हो चुका है। स्थानीय लोगों की सुरक्षा के लिहाज से विभाग की ओर से स्थिति स्पष्ट करना भी जरूरी है।
बिजली संबंधी शिकायत के लिए 1912 पर करें संपर्क
बिहार में बिजली आपूर्ति और तकनीकी खराबी से जुड़ी शिकायत दर्ज कराने के लिए दक्षिण बिहार पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड (SBPDCL) ने उपभोक्ताओं को हेल्पलाइन की सुविधा दी है। उपभोक्ता बिजली से संबंधित शिकायत के लिए टोल फ्री नंबर 1912 या 18002022813 पर संपर्क कर सकते हैं। इसके अलावा कंपनी की आधिकारिक वेबसाइट के माध्यम से भी ऑनलाइन शिकायत दर्ज कराई जा सकती है।
बिहटा-बिक्रम रोड जैसे मामले में शिकायत करते समय संबंधित स्थान की स्पष्ट जानकारी देना जरूरी है, ताकि विभाग की टीम सही जगह तक पहुंच सके। शिकायत दर्ज कराने के बाद उसका नंबर सुरक्षित रखना भी उपयोगी होगा। यदि स्थिति गंभीर है, तो स्थानीय बिजली कार्यालय और संबंधित अधिकारियों को भी इसकी सूचना दी जा सकती है।
फिलहाल इस मामले में सबसे जरूरी कदम झुके हुए करंट प्रवाहित ट्रांसफार्मर को सुरक्षित करना है। स्थानीय लोगों को भी सलाह दी जाती है कि वे ट्रांसफार्मर या उससे जुड़े तारों को छूने, उसके नीचे खड़े होने अथवा खुद से उसे ठीक करने की कोशिश न करें। किसी भी तरह की असामान्य स्थिति दिखाई देने पर उससे सुरक्षित दूरी बनाए रखें और तत्काल बिजली विभाग को सूचना दें। शिकायत के 24 घंटे बाद भी कार्रवाई नहीं होने की खबर ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा किया है कि आखिर सार्वजनिक सुरक्षा से जुड़े ऐसे मामलों में त्वरित कार्रवाई कब सुनिश्चित होगी।
