नई दिल्ली, 1 नवंबर 2026। पंजाबी सिंगर और अभिनेता दिलजीत दोसांझ इन दिनों अपने म्यूजिक टूर और बयानों को लेकर चर्चा में हैं। 30 अक्टूबर को दिल्ली के जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम में उनके ‘AURA India Tour 2026’ के पहले कॉन्सर्ट का आयोजन हुआ। इस कार्यक्रम में जहां हजारों प्रशंसकों ने उनके गानों का आनंद लिया, वहीं कुछ ऐसे पल भी देखने को मिले जिन्होंने सोशल मीडिया पर लोगों का ध्यान खींचा। दिलजीत ने कॉन्सर्ट के दौरान एक महिला CRPF अधिकारी को मंच पर बुलाकर सम्मानित किया और उन्हें अपनी मां की याद से जोड़ते हुए भावुक बात कही। इसके अलावा उन्होंने कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) से जुड़े विवाद पर भी प्रतिक्रिया दी। उनके बयान के बाद पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने सोशल मीडिया पर ‘छोटा भाई समझकर मिट्टी डालो’ संदेश लिखकर पुरानी बातों को खत्म करने की अपील की। दिल्ली कॉन्सर्ट के बाद इंस्टाग्राम लाइव में दिलजीत ने बिहार में कार्यक्रम नहीं कर पाने की वजह भी बताई।
दिलजीत का यह कॉन्सर्ट सिर्फ संगीत और मनोरंजन तक सीमित नहीं रहा। कार्यक्रम से पहले सुरक्षा को लेकर उठे सवाल, तारीख में बदलाव, राजनीतिक बहस और कॉन्सर्ट के दौरान दिए गए संदेशों ने इसे चर्चा का विषय बना दिया। खास बात यह रही कि गायक ने अपने मंच से सुरक्षा बलों के योगदान को भी प्रमुखता से याद किया।
दिल्ली कॉन्सर्ट से पहले अनुमति को लेकर हुई थी परेशानी
दिलजीत दोसांझ का दिल्ली कॉन्सर्ट शुरुआत से ही आसान नहीं रहा। उनका कार्यक्रम नई दिल्ली के जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम में आयोजित होना था। यह शो पहले 1 नवंबर 2026 को प्रस्तावित था, लेकिन बाद में इसे बदलकर 30 अक्टूबर कर दिया गया। इस बदलाव के पीछे 1984 के सिख विरोधी हिंसा से जुड़ी संवेदनशील तारीख और उस दिन को याद करने वाले परिवारों की भावनाओं का ध्यान रखने की अपील अहम रही। राज्यसभा सांसद विक्रमजीत सिंह साहनी ने भी दिलजीत से कार्यक्रम की तारीख बदलने का अनुरोध किया था।
कार्यक्रम को लेकर दिल्ली पुलिस की ओर से शुरुआत में सुरक्षा संबंधी चिंताओं के कारण अनुमति नहीं दी गई थी। पुलिस की मुख्य चिंताएं भीड़ प्रबंधन, यातायात और आयोजन स्थल के आसपास सुरक्षा व्यवस्था को लेकर थीं। बाद में आयोजकों की ओर से अतिरिक्त सुरक्षा और यातायात प्रबंधन की व्यवस्था किए जाने के बाद कॉन्सर्ट को मंजूरी मिली। इस पूरे मामले ने राजनीतिक बहस का रूप भी लिया। आम आदमी पार्टी ने गायक के प्रति कथित पक्षपात का आरोप लगाया, जबकि भाजपा ने इन आरोपों को खारिज किया। हालांकि, प्रशासनिक स्तर पर सामने आई प्रमुख आपत्तियां सुरक्षा और भीड़ नियंत्रण से जुड़ी थीं।
दिलजीत ने भी शो से पहले प्रशंसकों को आयोजन स्थल तक पहुंचने के लिए मेट्रो का इस्तेमाल करने की सलाह दी थी। इसका उद्देश्य सड़क पर वाहनों की संख्या और ट्रैफिक का दबाव कम करना था। बड़े स्तर के कॉन्सर्ट में हजारों लोगों की आवाजाही को व्यवस्थित करना आयोजकों और प्रशासन दोनों के लिए चुनौतीपूर्ण होता है। ऐसे में इस कार्यक्रम के सफल आयोजन के लिए सुरक्षा एजेंसियों की भूमिका महत्वपूर्ण रही।
महिला CRPF अधिकारी को मंच पर बुलाकर दिलजीत ने किया सम्मानित
कॉन्सर्ट के दौरान सबसे भावुक पल तब आया, जब दिलजीत ने अपना परफॉर्मेंस कुछ देर के लिए रोककर वहां तैनात सुरक्षा कर्मियों का धन्यवाद किया। उन्होंने दर्शकों से सुरक्षाकर्मियों के लिए तालियां बजाने की अपील की और कहा कि उनकी मौजूदगी के कारण ही लोग खुद को सुरक्षित महसूस करते हैं। इसके बाद उन्होंने वहां मौजूद एक महिला केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) अधिकारी को मंच पर बुलाया।
मंच पर पहुंचने के बाद दिलजीत ने महिला अधिकारी के प्रति सम्मान जताया और उन्हें देखकर अपनी मां की याद आने की बात कही। उन्होंने बताया कि वह अपनी मां से साल में एक या दो बार ही मिल पाते हैं, लेकिन उस अधिकारी को अपने सामने देखकर उन्हें ऐसा महसूस हुआ जैसे उनकी मां उनके साथ खड़ी हों। दिलजीत ने यह भी बताया कि उसी दिन उनकी मां का फोन आया था और उन्होंने अपना ध्यान रखने की सलाह दी थी। इस बातचीत को याद करते हुए उन्होंने अधिकारी से भावुक अंदाज में बात की।
इस दौरान दिलजीत ने महिला अधिकारी को सम्मान दिया और उन्हें गले लगाया। उन्होंने मंच से पुलिस और CRPF के जवानों की सेवा को सराहा। कॉन्सर्ट के बाद उन्होंने सोशल मीडिया पर भी दिल्ली के प्रशंसकों, दिल्ली पुलिस, CRPF, दिल्ली मेट्रो और कार्यक्रम के आयोजकों का आभार जताया। उनका यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से चर्चा में आया।
दिलजीत का यह कदम ऐसे समय में सामने आया, जब दिल्ली में सुरक्षा बलों की भूमिका और पुलिस कार्रवाई को लेकर अलग-अलग मुद्दों पर सार्वजनिक बहस चल रही थी। ऐसे माहौल में मंच से सुरक्षा कर्मियों का सम्मान करना कॉन्सर्ट का एक खास हिस्सा बन गया।
दिलजीत दोसांझ और अभिजीत दीपके के बीच विवाद कैसे शुरू हुआ?
दिल्ली कॉन्सर्ट में दिलजीत ने संगीत के साथ-साथ अपने पुराने बयान को लेकर उठे विवाद पर भी बात की। यह मामला जून 2026 में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) से जुड़े छात्र प्रदर्शन के दौरान शुरू हुआ था। उस समय दिलजीत से प्रदर्शन और राजनीतिक गतिविधियों को लेकर उनकी राय पूछी गई थी। उन्होंने खुद को एक कलाकार बताते हुए कहा था कि उन्हें विरोध-प्रदर्शनों और राजनीति से दूर रखा जाए, क्योंकि वह राजनेता नहीं हैं।
उनके इस बयान पर कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने आपत्ति जताई थी। दीपके का मानना था कि दिलजीत जैसे प्रभावशाली कलाकार को सामाजिक और सार्वजनिक मुद्दों पर अपनी भूमिका स्पष्ट करनी चाहिए। उनका तर्क था कि एक तरफ दिलजीत मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालड़ा के जीवन पर आधारित फिल्म ‘सतलुज’ से जुड़े हैं, वहीं दूसरी तरफ छात्र आंदोलन के संदर्भ में खुद को केवल कलाकार बताकर जिम्मेदारी से दूरी बना रहे हैं। इस वजह से दिलजीत पर दोहरे मापदंड अपनाने के आरोप भी लगाए गए थे।
विवाद उस समय और बढ़ गया, जब CJP से जुड़े एक प्रदर्शन के दौरान अभिजीत दीपके ने दिलजीत की फिल्म ‘सतलुज’ को लेकर टिप्पणी की। उन्होंने मंच से कहा था कि कलाकारों को सामने आना पड़ता है, वरना उनकी फिल्में प्रतिबंधित हो सकती हैं। उनकी इस टिप्पणी को दिलजीत और उनकी फिल्म से जोड़कर देखा गया।
फिल्म ‘सतलुज’ मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालड़ा के जीवन और उनके काम पर आधारित है। यह परियोजना पहले ‘पंजाब 95’ नाम से चर्चा में रही थी। खालड़ा ने पंजाब में लापता लोगों और मानवाधिकार उल्लंघन से जुड़े मामलों को उठाया था। इसलिए फिल्म का विषय संवेदनशील माना जाता रहा है और इसे लेकर सेंसर तथा रिलीज से संबंधित विवाद भी सामने आए थे।
दिल्ली के मंच से बोले- पंजाबियों को लड़ना मत सिखाओ
30 अक्टूबर को दिल्ली के कॉन्सर्ट के दौरान दिलजीत ने इस पूरे विवाद पर बिना किसी का नाम लिए अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि वह एक कलाकार हैं और सभी से प्यार करते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि जब वह चुप हैं, तो उन्हें चुप रहने दिया जाना चाहिए। हालांकि, उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि पंजाबियों को यह सिखाने की जरूरत नहीं है कि लड़ाई कैसे लड़ी जाती है।
जसवंत सिंह खालड़ा पर बनी फिल्म का जिक्र करते हुए दिलजीत ने कहा कि जिस फिल्म का मंच से मजाक उड़ाया गया, उसके लिए उन्होंने और उनकी टीम ने लंबे समय तक संघर्ष किया है। उन्होंने दोहराया कि वह सभी लोगों से प्यार करते हैं और यदि कोई उनसे नफरत करता है, तब भी उनकी तरफ से किसी के प्रति नफरत नहीं है। उनके इस बयान को CJP और अभिजीत दीपके की पिछली टिप्पणियों के जवाब के रूप में देखा गया। हालांकि, उन्होंने अपने संबोधन में सीधे तौर पर दीपके का नाम नहीं लिया।
अभिजीत दीपके ने कहा- ‘छोटा भाई समझकर मिट्टी डालो’
दिलजीत के बयान के बाद अभिजीत दीपके ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट लिखकर विवाद को खत्म करने की इच्छा जाहिर की। उन्होंने पंजाबी अंदाज में कहा, ‘मिट्टी पाओ, छोटा भाई समझकर।’ उनके इस संदेश को दोनों के बीच चल रही सार्वजनिक खींचतान को विराम देने की कोशिश माना जा रहा है।
दीपके ने अपनी पोस्ट में बताया कि जून में जब उनका प्रदर्शन चल रहा था, तब दिलजीत के बयान से उन्हें थोड़ी निराशा हुई थी। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी नाराजगी किसी व्यक्तिगत दुश्मनी की वजह से नहीं थी। वह लंबे समय से दिलजीत के प्रशंसक रहे हैं और उन्हें ऐसे कलाकार के रूप में देखते थे, जो सामाजिक मुद्दों पर अपनी आवाज उठाता है। दीपके ने कहा कि दिलजीत के प्रति उनका सम्मान और प्रशंसा आज भी कायम है।
उन्होंने यह भी याद दिलाया कि वह अमेरिका के शिकागो में दिलजीत का कॉन्सर्ट देखने गए थे। इससे उन्होंने यह स्पष्ट करने की कोशिश की कि राजनीतिक या सामाजिक मुद्दे पर मतभेद होने के बावजूद वह दिलजीत को एक कलाकार और व्यक्ति के रूप में पसंद करते हैं। उनका ‘मिट्टी पाओ’ संदेश पुराने विवाद को पीछे छोड़कर संबंध सामान्य करने की अपील के तौर पर सामने आया।
इस घटनाक्रम में एक महत्वपूर्ण बात यह भी है कि दोनों के बीच मतभेद की शुरुआत सार्वजनिक बयानों से हुई थी, लेकिन दीपके की बाद की प्रतिक्रिया में व्यक्तिगत सम्मान बनाए रखने की बात प्रमुख रही। फिलहाल इस विवाद के खत्म होने की दिशा में उनकी ओर से सकारात्मक संदेश सामने आया है।
बिहार में कॉन्सर्ट क्यों नहीं कर पाए दिलजीत दोसांझ?
दिल्ली कॉन्सर्ट के बाद दिलजीत ने इंस्टाग्राम लाइव सेशन में अपने आने वाले कार्यक्रमों और भारत में शो आयोजित करने के दौरान आने वाली चुनौतियों पर भी बात की। इसी दौरान एक प्रशंसक ने उनसे पूछा कि वह बिहार में कॉन्सर्ट करने कब आएंगे। इस सवाल के जवाब में दिलजीत ने बताया कि उनकी टीम ने पहले भी बिहार में कार्यक्रम आयोजित करने की कोशिश की थी, लेकिन भीड़ प्रबंधन को लेकर जरूरी जिम्मेदारियां तय नहीं हो सकीं।
दिलजीत के मुताबिक, बिहार में कार्यक्रम आयोजित करने की योजना पर बातचीत के दौरान उनसे पूछा गया था कि क्या वह खुद वहां आने वाली भारी भीड़ को संभालने की जिम्मेदारी लेंगे। उन्होंने इसके लिए सहमति नहीं दी, क्योंकि इतने बड़े आयोजन में दर्शकों की सुरक्षा और भीड़ को नियंत्रित करने की जिम्मेदारी केवल कलाकार या उसकी टीम की नहीं हो सकती। इसके लिए स्थानीय प्रशासन और संबंधित एजेंसियों का सहयोग जरूरी होता है।
उन्होंने बताया कि उनके कॉन्सर्ट में सामान्य कार्यक्रमों की तुलना में बहुत बड़ी संख्या में लोग पहुंचते हैं। ऐसे में भीड़ को नियंत्रित करना आसान नहीं होता। कार्यक्रम स्थल की क्षमता, प्रवेश और निकास के रास्ते, सुरक्षा व्यवस्था, यातायात, पार्किंग और आपातकालीन स्थितियों से निपटने की तैयारी जैसे कई पहलुओं पर पहले से काम करना पड़ता है। दिलजीत ने कहा कि यह कोई छोटी सभा नहीं होती, बल्कि बड़े स्तर का आयोजन होता है। इसकी व्यवस्थाएं दिल्ली जैसे बड़े कार्यक्रम की तरह करनी पड़ती हैं।
उनकी बातों से साफ है कि बिहार में कार्यक्रम न हो पाने की वजह वहां के दर्शकों या राज्य के प्रति उनकी अनिच्छा नहीं, बल्कि आयोजन की सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन से जुड़ी व्यावहारिक समस्याएं रही हैं। दिलजीत ने बिहार में कॉन्सर्ट के लिए कोई नई तारीख या शहर घोषित नहीं किया है। फिलहाल राज्य उनके घोषित AURA India Tour 2026 के कार्यक्रम में शामिल नहीं है।
दिल्ली कॉन्सर्ट के दौरान दिलजीत ने यह भी कहा कि भारत में शो आयोजित करते समय उन्हें अक्सर कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है। उन्होंने बताया कि दिल्ली का कार्यक्रम भी आसान नहीं था और इसे आयोजित करने में कई बाधाएं आईं, लेकिन अंततः शो सफलतापूर्वक हो गया। हालांकि, उन्होंने सभी परेशानियों का विस्तार से खुलासा नहीं किया।
30 अक्टूबर से शुरू हुए AURA India Tour 2026 के तहत दिलजीत देश के अलग-अलग शहरों में परफॉर्म करने वाले हैं। दिल्ली के बाद इस दौरे में चंडीगढ़, कोलकाता, अहमदाबाद, लखनऊ, मुंबई, बेंगलुरु और इंदौर जैसे शहर शामिल हैं। बिहार के प्रशंसकों को फिलहाल उनके कार्यक्रम का इंतजार करना होगा।
कुल मिलाकर, दिलजीत दोसांझ का दिल्ली कॉन्सर्ट कई वजहों से चर्चा में रहा। एक तरफ उन्होंने महिला CRPF अधिकारी को सम्मान देकर सुरक्षा बलों के योगदान की सराहना की, तो दूसरी तरफ अभिजीत दीपके के साथ पुराने विवाद पर अपनी बात रखी। दीपके ने भी विवाद खत्म करने का संदेश दिया। वहीं, बिहार में कार्यक्रम नहीं हो पाने को लेकर दिलजीत का खुलासा बड़े संगीत आयोजनों में सुरक्षा, प्रशासनिक सहयोग और भीड़ प्रबंधन की अहमियत सामने लाता है।
