रायपुर। छत्तीसगढ़ में चक्रवाती तूफान अर्नब का असर अब किसानों की चिंता बढ़ा रहा है। बंगाल की खाड़ी से उठे इस तूफान के कारण प्रदेश के कई हिस्सों में हुई बेमौसम बारिश और तेज हवाओं ने धान की तैयार फसल के सामने नई मुसीबत खड़ी कर दी है। कई इलाकों में खेतों में खड़ी धान की फसल तेज हवाओं के कारण जमीन पर गिर गई है, जबकि कुछ स्थानों पर खेतों में पानी भरने से कटाई और मिंजाई का काम प्रभावित हुआ है। सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में खेतों में खड़ी धान की फसल जमीन पर बिछी हुई और खेतों में पानी भरा दिखाई दे रहा है। सालभर की मेहनत के बाद फसल तैयार होने के समय मौसम की इस मार ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है।
इस बीच राज्य सरकार ने भी फसलों को हुए नुकसान को गंभीरता से लिया है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने प्रदेश के सभी जिला कलेक्टरों को प्रभावित क्षेत्रों में तत्काल फसल क्षति का सर्वेक्षण कराने के निर्देश दिए हैं। सरकार ने स्पष्ट किया है कि सर्वेक्षण के आधार पर पात्र किसानों को राजस्व पुस्तक परिपत्र (आरबीसी) 6-4 के प्रावधानों के तहत सहायता राशि उपलब्ध कराई जाएगी। वहीं, भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार चक्रवात अर्नब कमजोर पड़कर निम्न दबाव के क्षेत्र में बदल गया है, लेकिन इसके प्रभाव से छत्तीसगढ़ में बारिश का सिलसिला अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है।
तैयार धान की फसल पर बारिश और तेज हवाओं की मार
छत्तीसगढ़ के किसानों के लिए अक्टूबर का आखिरी सप्ताह धान की फसल के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण होता है। इस समय कई क्षेत्रों में खरीफ की धान फसल पकने की अवस्था में पहुंच जाती है और किसान कटाई की तैयारी शुरू कर देते हैं। कुछ इलाकों में कटाई का काम भी शुरू हो चुका होता है। ऐसे समय में लगातार बारिश और तेज हवाओं ने फसल की सुरक्षा को लेकर मुश्किलें बढ़ा दी हैं।
खेतों में खड़ी पकी हुई धान की फसल जब तेज हवा और बारिश का सामना करती है तो उसके जमीन पर गिरने का खतरा बढ़ जाता है। कृषि की भाषा में फसल के इस तरह गिरने को लॉजिंग (Lodging) कहा जाता है। फसल जमीन पर गिरने के बाद उसकी कटाई करना कठिन हो जाता है। इसके अलावा यदि गिरे हुए धान के बालों पर लंबे समय तक पानी और नमी बनी रहती है तो दानों की गुणवत्ता प्रभावित होने, उनमें अंकुरण होने और फफूंद लगने जैसी समस्याएं पैदा हो सकती हैं।
बारिश के कारण खेतों में पानी भरने से भी किसानों की परेशानी बढ़ी है। जिन किसानों ने धान काटकर खेतों में रखा है, उनके लिए उपज को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाना बड़ी चुनौती बन गया है। कटी हुई फसल यदि लंबे समय तक खुले में भीगी रहती है तो उसकी गुणवत्ता प्रभावित होने की आशंका रहती है। इससे किसानों को उत्पादन और आर्थिक नुकसान दोनों का सामना करना पड़ सकता है।
हालांकि, फिलहाल पूरे छत्तीसगढ़ में कितने हेक्टेयर क्षेत्र में धान की फसल प्रभावित हुई है, इसका आधिकारिक आंकड़ा सामने नहीं आया है। इसी वास्तविक स्थिति का पता लगाने के लिए राज्य सरकार ने जिलों में फसल क्षति का सर्वे कराने के निर्देश दिए हैं।
IMD ने क्या बताया? जगदलपुर के पास कमजोर होकर डिप्रेशन में बदला था अर्नब
भारत मौसम विज्ञान विभाग की 29 अक्टूबर 2026 की प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, चक्रवाती तूफान अर्नब पहले तटीय आंध्र प्रदेश और यानम के ऊपर गंभीर चक्रवाती तूफान की स्थिति में था। 28 अक्टूबर को यह कमजोर होकर चक्रवाती तूफान बना और इसके बाद उत्तर दिशा की ओर बढ़ते हुए गहरे अवदाब (Deep Depression) में बदल गया। 29 अक्टूबर की सुबह यह दक्षिण छत्तीसगढ़ और उससे सटे दक्षिण ओडिशा के ऊपर अवदाब (Depression) के रूप में पहुंच गया था।
29 अक्टूबर को सुबह 8:30 बजे जारी मौसम विभाग की जानकारी के मुताबिक, इस मौसम प्रणाली का केंद्र जगदलपुर से लगभग 40 किलोमीटर उत्तर-पश्चिम में था। उस समय इसके आसपास हवा की अधिकतम निरंतर गति 45 से 55 किलोमीटर प्रति घंटे तथा झोंकों के साथ 65 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंचने का अनुमान था। इसके बाद सिस्टम के उत्तर दिशा में आगे बढ़ने और कमजोर होकर कम दबाव के क्षेत्र में बदलने की संभावना जताई गई थी।
मौसम विभाग की 30 अक्टूबर की रिपोर्ट में इसकी पुष्टि हुई। विभाग के अनुसार, चक्रवात अर्नब का अवशेष कमजोर होकर कम दबाव के क्षेत्र में बदल गया था। 30 अक्टूबर की सुबह 8:30 बजे यह उत्तरी छत्तीसगढ़ और उससे लगे पूर्वी मध्य प्रदेश के ऊपर स्थित था। यानी चक्रवात की तीव्रता कम होने के बावजूद इससे जुड़ी मौसमी गतिविधियों का प्रभाव प्रदेश में बना हुआ है।
IMD ने 30 अक्टूबर को जारी रिपोर्ट में बताया कि इससे पहले के 24 घंटों के दौरान छत्तीसगढ़ में अत्यधिक भारी बारिश दर्ज की गई। बलरामपुर जिले के कुसमी में 28 सेंटीमीटर और सुकमा में 7 सेंटीमीटर बारिश रिकॉर्ड की गई। यह आंकड़ा बताता है कि प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में बारिश की तीव्रता में काफी अंतर रहा। कुछ क्षेत्रों में भारी बारिश का सामना करना पड़ा, जबकि अन्य इलाकों में इसका प्रभाव अपेक्षाकृत कम रहा।
धान और अन्य खरीफ फसलों के लिए कृषि विश्वविद्यालय की सलाह
मौसम की स्थिति को देखते हुए इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर के कृषि मौसम विज्ञान विभाग ने किसानों के लिए विशेष कृषि परामर्श जारी किया है। विभाग ने किसानों से कहा है कि जिन खेतों में धान, दलहन और तिलहन की फसलें पकने की अवस्था में हैं, वहां मौसम की प्रतिकूल परिस्थितियों को देखते हुए कम से कम आगामी दो दिनों तक कटाई और मिंजाई का काम स्थगित रखें।
जिन किसानों ने पहले ही धान की कटाई कर ली है, उन्हें कटी हुई फसल को जल्द से जल्द सुरक्षित और ऊंचे स्थानों पर रखने की सलाह दी गई है। उपज को बारिश से बचाने के लिए तिरपाल या अन्य उचित ढकाव की व्यवस्था करना जरूरी है। इससे अनाज के भीगने और उसकी गुणवत्ता खराब होने की आशंका कम की जा सकती है।
कृषि वैज्ञानिकों ने खेतों में जलभराव रोकने के लिए अतिरिक्त पानी की निकासी की उचित व्यवस्था करने पर भी जोर दिया है। खेतों में लंबे समय तक पानी जमा रहने से पक रही फसल प्रभावित हो सकती है। इसके अलावा बारिश और तेज हवाओं की संभावना को देखते हुए फिलहाल सिंचाई, उर्वरक और कीटनाशकों के छिड़काव का काम स्थगित रखने की सलाह दी गई है। मौसम साफ होने के बाद ही आवश्यक कृषि कार्य शुरू करने को कहा गया है।
कृषि उपज के भंडारण को लेकर भी सावधानी बरतने की जरूरत है। कटाई के बाद धान और अन्य अनाज को पर्याप्त रूप से सुखाने के बाद ही भंडारित करना चाहिए। भंडारण स्थल साफ, हवादार और नमी से सुरक्षित होना चाहिए। गोदाम या घर में रखी कृषि उपज को बारिश के पानी से बचाने के लिए छत, फर्श और पानी की निकासी की व्यवस्था पहले से सुनिश्चित करना भी जरूरी है।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने सभी कलेक्टरों को दिए सर्वे के निर्देश
चक्रवात अर्नब के कारण प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में फसल नुकसान की खबरों के बाद मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने प्रशासन को तत्काल कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने सभी जिला कलेक्टरों से प्रभावित क्षेत्रों में फसल क्षति का वास्तविक आकलन कराने को कहा है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया है कि सर्वेक्षण और राहत वितरण की प्रक्रिया में अनावश्यक देरी नहीं होनी चाहिए।
राज्य सरकार के अनुसार, सर्वेक्षण रिपोर्ट के आधार पर प्रभावित और पात्र किसानों को राजस्व पुस्तक परिपत्र (आरबीसी) 6-4 के प्रावधानों एवं निर्धारित मानदंडों के अनुसार आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। इसका उद्देश्य प्राकृतिक आपदा के कारण खेती में हुए नुकसान से प्रभावित किसानों को राहत पहुंचाना है।
प्रशासन को यह सुनिश्चित करना होगा कि प्रभावित गांवों और खेतों की वास्तविक स्थिति सर्वेक्षण में शामिल हो। फसल कितने क्षेत्र में प्रभावित हुई है, कितनी फसल खेतों में गिर गई है और कहां जलभराव के कारण नुकसान हुआ है, इसका आकलन राहत की प्रक्रिया के लिए महत्वपूर्ण होगा। हालांकि, सहायता की पात्रता और राशि का निर्धारण निर्धारित सरकारी नियमों और वास्तविक सर्वेक्षण के आधार पर ही किया जाएगा।
30 अक्टूबर से 2 नवंबर तक कैसा रहेगा छत्तीसगढ़ का मौसम?
चक्रवात कमजोर पड़ने के बाद भी प्रदेश में बारिश की गतिविधियां जारी रहने का अनुमान है। भारत मौसम विज्ञान विभाग की 30 अक्टूबर 2026 की प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, 30 और 31 अक्टूबर को छत्तीसगढ़ में कई स्थानों पर बारिश की संभावना है। इस दौरान कुछ इलाकों में गरज-चमक और बिजली गिरने की स्थिति भी बन सकती है।
विभाग ने 1 नवंबर को प्रदेश के कुछ स्थानों पर बारिश और 2 नवंबर को कुछ इलाकों में भारी बारिश की संभावना जताई है। 2 नवंबर को गरज-चमक के साथ तेज हवाएं चलने का भी अनुमान है, जिनकी गति 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे और झोंकों के साथ 60 किलोमीटर प्रति घंटे तक हो सकती है। इसके अलावा 4 और 5 नवंबर को भी कुछ स्थानों पर बारिश होने की संभावना जताई गई है।
ऐसे में किसानों को मौसम की ताजा चेतावनियों पर नजर रखने और जल्दबाजी में कटाई या मिंजाई शुरू करने से बचने की जरूरत है। विशेष रूप से उन किसानों को सतर्क रहना होगा जिनकी धान की फसल पूरी तरह पक चुकी है या जिनकी कटी हुई उपज अभी खेतों में रखी हुई है।
किसानों के लिए क्यों महत्वपूर्ण हैं आने वाले कुछ दिन?
छत्तीसगढ़ में धान की खेती बड़ी संख्या में किसानों की आजीविका का आधार है। फसल तैयार होने के समय बारिश, तेज हवाएं और खेतों में जलभराव जैसी परिस्थितियां किसानों की पूरी साल की मेहनत पर असर डाल सकती हैं। फसल जमीन पर गिरने से कटाई में अधिक समय और मेहनत लगती है। वहीं, लगातार नमी बने रहने से धान की गुणवत्ता भी प्रभावित हो सकती है।
इस बार किसानों की चिंता सिर्फ खेत में खड़ी फसल तक सीमित नहीं है। कटाई के बाद अनाज को सुखाने, सुरक्षित रखने और उसकी गुणवत्ता बनाए रखने की चुनौती भी सामने है। ऐसे में कृषि विभाग की सलाह का पालन करना और स्थानीय मौसम की जानकारी के अनुसार खेती से जुड़े फैसले लेना जरूरी हो गया है।
फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि चक्रवात अर्नब कमजोर पड़ चुका है, लेकिन उसके प्रभाव से हुई बारिश के कारण छत्तीसगढ़ में धान की फसल को लेकर स्थिति अभी पूरी तरह सामान्य नहीं हुई है। राज्य सरकार ने नुकसान का सर्वे कराने के निर्देश दे दिए हैं और पात्र किसानों को नियमानुसार सहायता देने का भरोसा दिलाया है। अब किसानों की नजर इस बात पर रहेगी कि सर्वेक्षण कितनी तेजी से पूरा होता है और प्रभावित परिवारों तक राहत कब पहुंचती है।
