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रायपुर में साधु बनकर 15 लाख की ठगी, बीमारी ठीक करने और परिवार पर अनहोनी का डर दिखाकर ऐंठे जेवर; ग्वालियर का युवक गिरफ्तार

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रायपुर में साधु बनकर 15 लाख की ठगी, बीमारी ठीक करने और परिवार पर अनहोनी का डर दिखाकर ऐंठे जेवर; ग्वालियर का युवक गिरफ्तार

Raipur Crime News: छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में साधु का वेश धारण कर पूजा-पाठ और बीमारी ठीक करने का झांसा देकर एक परिवार से करीब 15 लाख रुपये की ठगी करने का मामला सामने आया है। आरोपियों ने महिला की बीमारी, आंखों की परेशानी और घरेलू समस्याओं को दूर करने का भरोसा दिलाकर धीरे-धीरे सोने-चांदी के आभूषण और नकदी हासिल की। इतना ही नहीं, महिला को डराया गया कि अगर उसने इस घटना की जानकारी किसी को दी तो उसके परिवार के साथ बड़ी अनहोनी हो सकती है। मामले में गंज थाना पुलिस ने कार्रवाई करते हुए मध्य प्रदेश के ग्वालियर निवासी 22 वर्षीय आरोपी गुरुदयाल सिंह उर्फ दल्लू को गिरफ्तार किया है। उसके साथ एक नाबालिग को भी पकड़ा गया है। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से करीब 3 लाख रुपये कीमत के 17 ग्राम सोने के आभूषण और वारदात में इस्तेमाल किया गया मोबाइल फोन जब्त किया है। गिरोह के अन्य सदस्य अभी फरार हैं।

पुलिस के मुताबिक, यह पूरा मामला रायपुर के फाफाडीह इलाके में स्थित जयलक्ष्मी कॉम्प्लेक्स का है। यहां रहने वाले जसवंत परमार ने थाना गंज में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत के अनुसार, मार्च 2026 में तीन अज्ञात व्यक्ति साधु के वेश में उनके घर पहुंचे थे। उन्होंने बातचीत के दौरान जसवंत परमार की पत्नी की बीमारी, आंखों की परेशानी और परिवार से जुड़ी घरेलू समस्याओं के बारे में ऐसी बातें बताईं, जिससे महिला को लगा कि उन्हें उसकी परेशानियों की जानकारी है। इसी भरोसे का फायदा उठाकर आरोपियों ने पूजा-पाठ के जरिए समस्याएं दूर करने का दावा किया और ठगी का सिलसिला शुरू कर दिया।

पहले अंगूठी और नकदी ली, फिर धीरे-धीरे ऐंठते रहे सोने-चांदी के जेवर

शिकायत के मुताबिक, साधु बनकर पहुंचे आरोपियों ने सबसे पहले पूजा-पाठ कराने के नाम पर महिला से सोने की अंगूठी और नकदी ले ली। उन्होंने भरोसा दिलाया कि पूजा पूरी होने के बाद आभूषण वापस कर दिए जाएंगे। करीब 10 से 12 दिन बाद आरोपी दोबारा महिला के घर पहुंचे। इस बार उन्होंने पूजा के नाम पर सोने की चेन समेत अन्य सोने-चांदी के आभूषण भी ले लिए।

इसके बाद आरोपियों ने महिला के साथ संपर्क बनाए रखा। वे अलग-अलग समय पर पूजा-पाठ और धार्मिक अनुष्ठान का हवाला देकर उससे और आभूषण लेते रहे। महिला को लगातार यह भरोसा दिलाया जाता था कि उसकी परेशानियां दूर करने के लिए यह सब जरूरी है और पूजा पूरी होते ही उसके गहने लौटा दिए जाएंगे। इसी तरह कई बार महिला से आभूषण लिए गए, लेकिन आरोपियों ने न तो कोई पूजा-पाठ कराया और न ही उसके जेवर वापस किए।

इस पूरे मामले में सबसे गंभीर बात यह रही कि आरोपियों ने महिला को मानसिक रूप से डराने की भी कोशिश की। शिकायत के अनुसार, उन्होंने कहा था कि अगर उसने इस घटना के बारे में अपने पति या परिवार के किसी सदस्य को बताया तो उसके परिवार में किसी की मृत्यु हो सकती है या कोई बड़ी अनहोनी हो सकती है। इसी डर के कारण महिला काफी समय तक परिवार के अन्य सदस्यों को कुछ नहीं बता सकी।

पुलिस के अनुसार, 7 सितंबर 2026 से आरोपी लगातार फोन करने लगे और महिला से और अधिक जेवरात तथा नकदी की मांग करने लगे। लगातार मांग किए जाने के बाद महिला को संदेह हुआ कि उसके साथ धोखाधड़ी हो रही है। इसके बाद उसने अपने पति जसवंत परमार को पूरी घटना की जानकारी दी। परिवार को जब पता चला कि पूजा-पाठ के नाम पर उनसे लगातार आभूषण लिए जा रहे थे और उन्हें वापस करने का कोई इरादा नहीं था, तब उन्होंने पुलिस से संपर्क किया। शिकायत में सोने-चांदी के विभिन्न आभूषणों और नकदी समेत कुल करीब 15 लाख रुपये की धोखाधड़ी होने की बात कही गई है।

मोबाइल नंबरों की जांच से ग्वालियर तक पहुंची पुलिस

मामले की शिकायत मिलने के बाद थाना गंज पुलिस ने अज्ञात आरोपियों के खिलाफ अपराध क्रमांक 283/2026 के तहत भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 318(4) और 3(5) में मामला दर्ज कर जांच शुरू की। पुलिस उपायुक्त मध्य क्षेत्र तारकेश्वर पटेल, अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त विवेक शुक्ला और सहायक पुलिस आयुक्त कोतवाली दीपक मिश्रा के निर्देशन में आरोपियों की पहचान और गिरफ्तारी के लिए पुलिस टीम गठित की गई।

जांच के दौरान पुलिस ने शिकायतकर्ता जसवंत परमार और उनकी पत्नी से घटना के संबंध में विस्तार से जानकारी ली। आरोपियों द्वारा इस्तेमाल किए गए मोबाइल नंबरों और महिला को फोन करने के लिए इस्तेमाल किए गए अन्य नंबरों का तकनीकी विश्लेषण किया गया। पुलिस ने इन नंबरों से मिले सुराग और अन्य तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों की तलाश शुरू की। जांच आगे बढ़ने पर पुलिस टीम मध्य प्रदेश के ग्वालियर तक पहुंची, जहां से गुरुदयाल सिंह उर्फ दल्लू और एक विधि से संघर्षरत बालक को पकड़ा गया।

पकड़े गए आरोपी की पहचान गुरुदयाल सिंह उर्फ दल्लू, पिता भरत सिंह, उम्र 22 वर्ष, निवासी नूरगंज सेवा नगर, थाना किला गेट, जिला ग्वालियर (मध्य प्रदेश) के रूप में हुई है। पुलिस के मुताबिक, पूछताछ के दौरान आरोपी ने अपने भाई और अन्य साथियों के साथ मिलकर पूजा-पाठ कराने का झांसा देकर ठगी की वारदात को अंजाम देना स्वीकार किया है। पुलिस ने आरोपी और नाबालिग के खिलाफ आगे की कानूनी कार्रवाई की है।

3 लाख का सामान बरामद, बाकी आरोपियों की तलाश जारी

पुलिस ने पकड़े गए आरोपियों के कब्जे से 17 ग्राम सोने के आभूषण और घटना में इस्तेमाल किया गया एक मोबाइल फोन जब्त किया है। जब्त सामग्री की कुल कीमत करीब 3 लाख रुपये बताई गई है। हालांकि, शिकायत में ठगी की कुल रकम और आभूषणों का अनुमानित मूल्य करीब 15 लाख रुपये बताया गया है। यानी फिलहाल पुलिस ने कथित रूप से ठगी गई पूरी संपत्ति बरामद नहीं की है।

पुलिस के अनुसार, इस वारदात में शामिल अन्य आरोपी अभी फरार हैं। उनकी पहचान और गिरफ्तारी के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। पूछताछ में सामने आए अन्य साथियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। इसके अलावा पुलिस इस बात का भी पता लगा रही है कि आरोपियों ने रायपुर या दूसरे शहरों में इसी तरह साधु का वेश धारण कर पूजा-पाठ और बीमारी दूर करने का झांसा देकर अन्य लोगों को तो अपना शिकार नहीं बनाया है।

फिलहाल इस मामले में एक वयस्क आरोपी और एक नाबालिग को पकड़ा गया है, जबकि गिरोह के बाकी सदस्यों की तलाश जारी है। पुलिस की जांच में आगे यह स्पष्ट होगा कि इस गिरोह ने कितनी अन्य वारदातों को अंजाम दिया और ठगी के जरिए हासिल किए गए बाकी आभूषणों व नकदी को कहां रखा गया है। मामले में आरोपियों के खिलाफ कानूनी प्रक्रिया जारी है और अंतिम दोषसिद्धि न्यायालय के फैसले पर निर्भर करेगी।

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