छत्तीसगढ़ की राजनीति में बिलासपुर विधानसभा क्षेत्र से अपनी पहचान बनाने वाले कांग्रेस नेता शैलेष पांडेय का राजनीतिक सफर कई महत्वपूर्ण पड़ावों से होकर गुजरा है। शिक्षा के क्षेत्र में काम करने से लेकर विधानसभा सदस्य बनने और फिर राष्ट्रीय स्तर पर कांग्रेस संगठन की चुनावी गतिविधियों में जिम्मेदारी निभाने तक उन्होंने अलग-अलग भूमिकाओं में काम किया है। वर्ष 2018 के छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव में उन्होंने भाजपा के कद्दावर नेता और पूर्व मंत्री अमर अग्रवाल को हराकर बिलासपुर की राजनीति में बड़ा बदलाव किया था। हालांकि, 2023 के विधानसभा चुनाव में उन्हें अमर अग्रवाल के हाथों हार का सामना करना पड़ा। वर्तमान में वे बिलासपुर के पूर्व विधायक और कांग्रेस के सक्रिय नेता हैं।
शैलेष पांडेय की राजनीतिक पहचान केवल बिलासपुर तक सीमित नहीं रही है। कांग्रेस संगठन ने उन्हें उत्तर प्रदेश, त्रिपुरा, कर्नाटक और बिहार जैसे राज्यों में चुनावी तथा संगठनात्मक जिम्मेदारियां सौंपीं। वर्ष 2023 में त्रिपुरा विधानसभा चुनाव के दौरान उन्हें चार विधानसभा क्षेत्रों का पर्यवेक्षक बनाया गया था। वहीं, कर्नाटक विधानसभा चुनाव में भी उन्होंने पार्टी की ओर से पर्यवेक्षक के रूप में जिम्मेदारी निभाई। वर्ष 2025 में बिहार विधानसभा चुनाव के लिए अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) ने उन्हें चुनाव पर्यवेक्षकों की सूची में शामिल किया। बिहार में संगठनात्मक गतिविधियों से लेकर चुनावी तैयारियों और SIR यानी मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण से जुड़े काम में भी उनकी भूमिका का उल्लेख मिलता है।
आइए जानते हैं शैलेष पांडेय की व्यक्तिगत जिंदगी, शिक्षा, राजनीतिक करियर, कांग्रेस संगठन में मिली जिम्मेदारियों, विधानसभा में उनके प्रदर्शन, चुनावी इतिहास और परिवार के बारे में विस्तार से।
शैलेष पांडेय का जीवन परिचय
शैलेष पांडेय भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के नेता और छत्तीसगढ़ के बिलासपुर विधानसभा क्षेत्र के पूर्व विधायक हैं। वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव के दौरान दाखिल उनके चुनावी हलफनामे में पिता का नाम एम.पी. पांडेय और उम्र 48 वर्ष दर्ज थी। उनके शुरुआती जीवन की विस्तृत जानकारी सार्वजनिक रूप से सीमित है, लेकिन उनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि और राजनीतिक गतिविधियों से संबंधित कई महत्वपूर्ण जानकारियां उपलब्ध हैं।
शिक्षा की बात करें तो शैलेष पांडेय ने मैकेनिकल इंजीनियरिंग में बैचलर ऑफ इंजीनियरिंग (BE) की पढ़ाई की है। उन्होंने भिलाई इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (BIT), दुर्ग से यह डिग्री हासिल की। उनके चुनावी हलफनामे और सार्वजनिक शैक्षणिक परिचय में वर्ष 1997 में इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी करने का उल्लेख मिलता है। उनकी तकनीकी शिक्षा ने उन्हें राजनीति में आने से पहले एक अलग पेशेवर पहचान दी।
उनका संबंध केवल इंजीनियरिंग क्षेत्र तक सीमित नहीं रहा। पढ़ाई पूरी करने के बाद वे उच्च शिक्षा के क्षेत्र में भी सक्रिय रहे। राजनीति में आने से पहले उन्होंने बिलासपुर के कोटा स्थित डॉ. सी.वी. रमन विश्वविद्यालय में कुलसचिव (Registrar) के रूप में काम किया। विश्वविद्यालय के प्रशासनिक कार्यों से जुड़े रहने के दौरान उन्हें शिक्षा व्यवस्था और संस्थागत प्रबंधन का अनुभव मिला। यही वजह है कि उनकी पहचान एक राजनीतिज्ञ के साथ-साथ शिक्षाविद के रूप में भी की जाती है।
शिक्षा के क्षेत्र से राजनीति तक का सफर
शैलेष पांडेय का राजनीतिक सफर शुरू होने से पहले उनका जुड़ाव शिक्षा और सामाजिक गतिविधियों से रहा। डॉ. सी.वी. रमन विश्वविद्यालय में कुलसचिव के पद पर रहते हुए उन्होंने उच्च शिक्षा संस्थान के प्रशासनिक कामकाज को करीब से समझा। बाद में उन्होंने सक्रिय राजनीति में प्रवेश किया और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के साथ जुड़कर संगठनात्मक गतिविधियों में भाग लेना शुरू किया।
उनके राजनीतिक जीवन का सबसे महत्वपूर्ण मोड़ वर्ष 2018 का विधानसभा चुनाव रहा। कांग्रेस ने उन्हें बिलासपुर विधानसभा क्षेत्र से अपना उम्मीदवार बनाया। उस समय इस सीट पर भाजपा के वरिष्ठ नेता अमर अग्रवाल का लंबे समय से प्रभाव था। अमर अग्रवाल इस सीट से लगातार चार बार जीत दर्ज कर चुके थे और राज्य की राजनीति में एक मजबूत चेहरा माने जाते थे। ऐसे मुकाबले में शैलेष पांडेय को उम्मीदवार बनाना कांग्रेस के लिए एक महत्वपूर्ण राजनीतिक फैसला था।
2018 में अमर अग्रवाल को हराकर बने विधायक
छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव 2018 में बिलासपुर सीट पर कांग्रेस और भाजपा के बीच कड़ा मुकाबला देखने को मिला। कांग्रेस प्रत्याशी शैलेष पांडेय ने भाजपा के अमर अग्रवाल को हराकर पहली बार विधानसभा में प्रवेश किया। भारत निर्वाचन आयोग के चुनावी आंकड़ों के अनुसार, शैलेष पांडेय को 67,896 वोट मिले थे, जबकि अमर अग्रवाल को 56,675 वोट प्राप्त हुए थे। इस तरह उन्होंने 11,221 मतों के अंतर से जीत दर्ज की।
यह जीत इसलिए भी महत्वपूर्ण थी क्योंकि बिलासपुर को अमर अग्रवाल का मजबूत राजनीतिक क्षेत्र माना जाता था। लगातार चार चुनाव जीतने के बाद अमर अग्रवाल को मिली हार ने शहर की राजनीति में नई चर्चा शुरू कर दी। शैलेष पांडेय ने अपने पहले ही विधानसभा चुनाव में जीत हासिल करके कांग्रेस के भीतर अपनी राजनीतिक स्थिति मजबूत की।
11 दिसंबर 2018 को उन्होंने विधायक के रूप में कार्यभार संभाला। इसके बाद वर्ष 2018 से 2023 तक उन्होंने बिलासपुर विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया। इस दौरान शहर के विकास, सड़क, पेयजल, सफाई, स्वास्थ्य सेवाओं, शिक्षा, रेलवे और नागरिक सुविधाओं से जुड़े मुद्दे उनके राजनीतिक कार्यों का हिस्सा रहे।
विधानसभा में शैलेष पांडेय का प्रदर्शन और समितियों में भूमिका
विधायक के रूप में शैलेष पांडेय का प्रदर्शन उनकी विधानसभा में उपस्थिति और पूछे गए सवालों के आंकड़ों से भी समझा जा सकता है। PRS Legislative Research के अनुसार, 2018 से 2023 के पांचवीं छत्तीसगढ़ विधानसभा के कार्यकाल में उनकी उपस्थिति 98.9 प्रतिशत रही। यह उस अवधि में राज्य के विधायकों की औसत उपस्थिति 88.5 प्रतिशत से अधिक थी।
विधानसभा में सवाल पूछने के मामले में भी उनका रिकॉर्ड दर्ज किया गया है। PRS के आंकड़ों के अनुसार, उन्होंने अपने विधायक कार्यकाल के दौरान कुल 392 प्रश्न पूछे। वहीं, इस अवधि में छत्तीसगढ़ के विधायकों द्वारा पूछे गए सवालों का औसत 194.4 रहा। इन आंकड़ों से पता चलता है कि उन्होंने विधानसभा की कार्यवाही में नियमित भागीदारी की और विभिन्न विभागों से संबंधित मुद्दों पर सरकार से जवाब मांगे।
विधानसभा की समितियों में भी उन्हें जिम्मेदारी मिली थी। वर्ष 2019-20 के दौरान वे लोक लेखा समिति और पुस्तकालय समिति के सदस्य रहे। इसके बाद वर्ष 2021-22 के दौरान वे लोक लेखा समिति और प्राक्कलन समिति के सदस्य के रूप में दर्ज हैं। वर्ष 2022-23 की समिति सूची में भी उनका नाम प्राक्कलन समिति के सदस्य के रूप में मिलता है।
यहां एक महत्वपूर्ण तथ्य स्पष्ट करना जरूरी है। कुछ साझा परिचयों में शैलेष पांडेय को प्राक्कलन समिति का सभापति बताया गया है, लेकिन छत्तीसगढ़ विधानसभा की आधिकारिक समिति सूचियों में ऐसा दर्ज नहीं है। वर्ष 2019-20 में प्राक्कलन समिति के सभापति मनोज सिंह मंडावी और वर्ष 2021-22 में मोहन मरकाम थे। शैलेष पांडेय इन समितियों में सदस्य रहे थे।
कांग्रेस संगठन में राष्ट्रीय स्तर पर मिली जिम्मेदारियां
शैलेष पांडेय का राजनीतिक अनुभव केवल विधानसभा चुनाव लड़ने और बिलासपुर क्षेत्र तक सीमित नहीं रहा। कांग्रेस संगठन ने उन्हें अलग-अलग राज्यों में चुनावी प्रबंधन, कार्यकर्ताओं के साथ समन्वय और पार्टी प्रत्याशियों के पक्ष में संगठनात्मक काम करने की जिम्मेदारियां दीं। उनके साझा संगठनात्मक परिचय में आठ राज्यों में AICC स्तर पर जिम्मेदारियां निभाने का उल्लेख है। सार्वजनिक रिपोर्टों में उत्तर प्रदेश, त्रिपुरा, कर्नाटक और बिहार में उनकी अलग-अलग भूमिकाएं सामने आती हैं।
उत्तर प्रदेश में कांग्रेस ने उन्हें मिर्जापुर, रायबरेली और फतेहपुर जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में समन्वय की जिम्मेदारी दी थी। इन क्षेत्रों में पार्टी संगठन और चुनावी गतिविधियों से जुड़े कार्यों में उनकी भूमिका रही। चुनाव के दौरान स्थानीय नेताओं और कार्यकर्ताओं के साथ तालमेल बनाना, पार्टी की रणनीति को जमीन पर लागू करने में सहयोग करना और चुनावी गतिविधियों का समन्वय करना इन जिम्मेदारियों का हिस्सा था।
त्रिपुरा विधानसभा चुनाव में चार सीटों के पर्यवेक्षक बने
जनवरी 2023 में अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के निर्देश पर शैलेष पांडेय को त्रिपुरा विधानसभा चुनाव के लिए चार विधानसभा क्षेत्रों का पर्यवेक्षक बनाया गया था। यह जिम्मेदारी उन्हें संगठन में उनके अनुभव और राजनीतिक गतिविधियों को देखते हुए दी गई थी। उन्हें अगरतला, रामनगर, टाउन बोरडोवाली और बनमालीपुर विधानसभा क्षेत्रों की जिम्मेदारी सौंपी गई थी।
इन चारों विधानसभा क्षेत्रों में कांग्रेस उम्मीदवारों के पक्ष में चुनावी गतिविधियों का समन्वय करना और पार्टी संगठन को मजबूत करने का काम उनकी जिम्मेदारी में शामिल था। यह नियुक्ति उनके राजनीतिक करियर में एक महत्वपूर्ण पड़ाव रही, क्योंकि बिलासपुर के बाहर किसी दूसरे राज्य के विधानसभा चुनाव में उन्हें संगठनात्मक जिम्मेदारी मिली थी।
कर्नाटक विधानसभा चुनाव में भी निभाई पर्यवेक्षक की भूमिका
वर्ष 2023 के कर्नाटक विधानसभा चुनाव में भी शैलेष पांडेय को कांग्रेस की ओर से जिम्मेदारी मिली थी। उस समय कर्नाटक में कांग्रेस की चुनावी तैयारियां तेजी से चल रही थीं। पार्टी की तरफ से उन्हें भटकल विधानसभा क्षेत्र में पर्यवेक्षक के रूप में काम करने की जिम्मेदारी दिए जाने की खबरें सामने आई थीं। उन्होंने वहां कांग्रेस प्रत्याशी के समर्थन में प्रचार और संगठनात्मक गतिविधियों में भाग लिया।
कर्नाटक विधानसभा चुनाव के दौरान बेंगलुरु में आयोजित कांग्रेस की महत्वपूर्ण संगठनात्मक बैठक में भी वे शामिल हुए थे। इस बैठक में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, महासचिव केसी वेणुगोपाल, रणदीप सिंह सुरजेवाला और कर्नाटक प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं सहित कई नेता मौजूद थे। चुनाव के बाद कांग्रेस की सरकार बनने पर उन्हें मुख्यमंत्री के शपथ ग्रहण समारोह में भी आमंत्रित किया गया था।
कर्नाटक में उनकी इस भूमिका ने उनके संगठनात्मक अनुभव को दूसरे राज्य के चुनावी अभियान से जोड़ने का अवसर दिया। पार्टी के भीतर विभिन्न नेताओं और कार्यकर्ताओं के साथ काम करने का अनुभव उनके राजनीतिक सफर का महत्वपूर्ण हिस्सा बना।
बिहार में विधानसभा चुनाव से लेकर SIR तक संगठनात्मक काम
बिहार में कांग्रेस संगठन के लिए भी शैलेष पांडेय ने जिम्मेदारी निभाई। वर्ष 2025 में बिहार विधानसभा चुनाव की तैयारियों के दौरान अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी ने 58 वरिष्ठ नेताओं को चुनाव पर्यवेक्षक नियुक्त किया था। इस सूची में छत्तीसगढ़ के चार नेताओं को शामिल किया गया था, जिनमें पूर्व मंत्री अमरजीत भगत, पूर्व विधायक शैलेष पांडेय, दीपक मिश्रा और भुवनेश्वर बघेल के नाम शामिल थे।
29 जून 2025 को इस नियुक्ति से संबंधित जानकारी सार्वजनिक हुई थी। कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल द्वारा जारी आदेश के तहत पर्यवेक्षकों को बिहार में संगठनात्मक रणनीति लागू करने और चुनावी तैयारियों को मजबूत करने की जिम्मेदारी दी गई थी। इसमें बूथ प्रबंधन, स्थानीय कार्यकर्ताओं के साथ समन्वय, चुनाव प्रचार की निगरानी और उम्मीदवारों की जरूरतों का आकलन जैसे काम शामिल थे।
बिहार में उनकी भूमिका को लेकर साझा की गई संगठनात्मक जानकारी में चुनावी तैयारियों के साथ-साथ SIR यानी Special Intensive Revision (मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण) के दौरान भी काम करने का उल्लेख है। इस दौरान मतदाता सूची से जुड़े विषयों और संगठनात्मक गतिविधियों में पार्टी स्तर पर सहयोग की बात कही गई है। SIR निर्वाचन आयोग की प्रक्रिया है, इसलिए इसे उनके लिए किसी अलग निर्वाचन आयोग के पद या नियुक्ति के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
बिहार की यह जिम्मेदारी बताती है कि कांग्रेस संगठन ने उन्हें केवल चुनावी प्रचार तक सीमित नहीं रखा, बल्कि पार्टी के जमीनी काम, स्थानीय कार्यकर्ताओं के साथ तालमेल और चुनावी रणनीति से जुड़े कार्यों में भी शामिल किया।
2023 के विधानसभा चुनाव में अमर अग्रवाल से मिली हार
वर्ष 2018 में अमर अग्रवाल को हराकर विधायक बने शैलेष पांडेय के सामने 2023 में एक बार फिर वही राजनीतिक चुनौती थी। कांग्रेस ने उन्हें बिलासपुर विधानसभा सीट से दोबारा उम्मीदवार बनाया, जबकि भाजपा ने अमर अग्रवाल को मैदान में उतारा। इस बार चुनावी परिणाम भाजपा के पक्ष में गया और अमर अग्रवाल ने बड़ी जीत दर्ज की।
निर्वाचन आयोग के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव में अमर अग्रवाल को 83,022 वोट मिले थे, जबकि कांग्रेस प्रत्याशी शैलेष पांडेय को 54,063 वोट प्राप्त हुए। इस तरह अमर अग्रवाल ने 28,959 मतों के अंतर से जीत हासिल की। वर्ष 2018 में जीतने वाले शैलेष पांडेय इस बार दूसरे स्थान पर रहे।
इस हार के बाद बिलासपुर विधानसभा में कांग्रेस का प्रतिनिधित्व बदल गया। अमर अग्रवाल दोबारा विधायक बने और शैलेष पांडेय का विधानसभा कार्यकाल समाप्त हो गया। इसलिए वर्तमान समय में उन्हें बिलासपुर का पूर्व विधायक कहना ही सही है।
विधायक पद के बाद भी बिलासपुर के मुद्दों पर सक्रिय
वर्ष 2023 का विधानसभा चुनाव हारने के बाद भी शैलेष पांडेय ने स्थानीय राजनीति से दूरी नहीं बनाई। वे बिलासपुर के नागरिक मुद्दों और कांग्रेस की राजनीतिक गतिविधियों में सक्रिय रहे। जुलाई 2024 में मेलापारा क्षेत्र में प्रभावित और बेघर परिवारों को आवास उपलब्ध कराने की मांग को लेकर उन्होंने जिला प्रशासन को पत्र लिखा था। उन्होंने इस मामले में कलेक्टर से प्रभावित परिवारों की समस्याओं पर ध्यान देने और उन्हें आवास उपलब्ध कराने की मांग की थी।
इसी तरह जुलाई 2024 में बिलासपुर नगर निगम के वार्ड परिसीमन को लेकर भी उन्होंने अपनी प्रतिक्रिया दी थी। उन्होंने मांग की थी कि वार्डों का गठन राजनीतिक प्रभाव के बजाय जनसंख्या और भौगोलिक स्थिति के आधार पर किया जाना चाहिए। उनके अनुसार, परिसीमन में स्थानीय लोगों की जरूरतों और मतदाताओं की संख्या को प्राथमिकता मिलनी चाहिए।
अक्टूबर 2026 में भी उन्होंने बिलासपुर के जलभराव और बिजली संकट को प्रमुख स्थानीय मुद्दों के रूप में उठाया। शहर में जलभराव का स्थायी समाधान, निर्बाध बिजली आपूर्ति, बिलासपुर हवाई अड्डे का विस्तार और नगर निगम की सीमा बढ़ाने जैसे विषय उनकी राजनीतिक प्राथमिकताओं में शामिल रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि उनके लिए पद से ज्यादा काम महत्वपूर्ण है।
शैलेष पांडेय की संपत्ति और चुनावी हलफनामे में दर्ज मामले
चुनावी हलफनामे के अनुसार, वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव के दौरान शैलेष पांडेय ने अपनी कुल संपत्ति 2 करोड़ 74 लाख 53 हजार 418 रुपये घोषित की थी। वहीं, उनकी कुल देनदारियां 10 लाख 19 हजार 547 रुपये दर्ज थीं। ये आंकड़े चुनाव के समय दाखिल किए गए हलफनामे पर आधारित हैं, इसलिए इन्हें उनकी वर्तमान संपत्ति नहीं माना जाना चाहिए।
उनके चुनावी हलफनामे में पांच लंबित आपराधिक मामलों का भी उल्लेख था। एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) के MyNeta पोर्टल पर उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इनमें अलग-अलग धाराओं के तहत मामले दर्ज थे। उसी हलफनामे में दोषसिद्धि के मामलों की संख्या शून्य दर्ज थी। किसी मामले का लंबित होना दोषी साबित होने के बराबर नहीं है। इन मामलों की वर्तमान स्थिति जानने के लिए संबंधित न्यायालय के नवीनतम रिकॉर्ड को देखना जरूरी है।
शैलेष पांडेय का परिवार
राजनीतिक गतिविधियों के अलावा शैलेष पांडेय के पारिवारिक जीवन को लेकर भी स्थानीय स्तर पर जानकारी सामने आती रही है। उनके परिवार से जुड़े साझा परिचय में पत्नी का नाम ऋतु पांडेय बताया गया है। वहीं, उनकी बेटियों के नाम स्वस्ति पांडेय और स्तुति पांडेय बताए गए हैं।
बिलासपुर में मतदान के दौरान शैलेष पांडेय अपनी पत्नी ऋतु पांडेय और बेटी स्वस्ति पांडेय के साथ नजर आए थे। स्थानीय समाचार रिपोर्ट में भी इसका उल्लेख किया गया था। हालांकि, परिवार के सदस्यों की निजी जिंदगी से जुड़ी विस्तृत जानकारी सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं है।
अटल बिहारी वाजपेयी विश्वविद्यालय और माध्यमिक शिक्षा मंडल से जुड़ी भूमिका
शैलेष पांडेय के साझा किए गए परिचय में अटल बिहारी वाजपेयी विश्वविद्यालय, बिलासपुर की कार्य परिषद और छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल से जुड़ी सदस्यता का भी उल्लेख किया गया है। हालांकि, इन दोनों संस्थाओं में उनकी सदस्यता के कार्यकाल और नियुक्ति की पुष्टि करने वाला स्पष्ट आधिकारिक आदेश सार्वजनिक रिकॉर्ड में नहीं मिला है। इसलिए इन पदों को उनकी निर्विवाद रूप से प्रमाणित जिम्मेदारी के रूप में प्रस्तुत करना उचित नहीं होगा। शिक्षा क्षेत्र में उनकी प्रमाणित भूमिका डॉ. सी.वी. रमन विश्वविद्यालय के कुलसचिव के रूप में रही है।
शैलेष पांडेय का राजनीतिक सफर क्यों है महत्वपूर्ण?
शैलेष पांडेय का राजनीतिक जीवन शिक्षा क्षेत्र से निकलकर विधानसभा और फिर राष्ट्रीय स्तर के कांग्रेस संगठन तक पहुंचने का सफर है। वर्ष 2018 में बिलासपुर की प्रतिष्ठित सीट पर अमर अग्रवाल को हराना उनके राजनीतिक करियर की सबसे बड़ी चुनावी उपलब्धि रही। विधायक रहते हुए उनकी 98.9 प्रतिशत उपस्थिति और 392 सवालों का रिकॉर्ड भी उनके विधानसभा कार्यकाल की महत्वपूर्ण विशेषता है।
इसके अलावा त्रिपुरा में चार विधानसभा सीटों की जिम्मेदारी, कर्नाटक के भटकल क्षेत्र में चुनावी भूमिका, उत्तर प्रदेश में संगठनात्मक समन्वय और बिहार विधानसभा चुनाव के लिए AICC पर्यवेक्षक बनाया जाना उनके राजनीतिक अनुभव को राज्य की सीमाओं से आगे ले जाता है। वर्ष 2023 में चुनावी हार के बावजूद वे बिलासपुर की राजनीति में सक्रिय रहे और स्थानीय मुद्दों को उठाते रहे।
कुल मिलाकर शैलेष पांडेय की पहचान एक ऐसे कांग्रेस नेता की है, जिन्होंने शिक्षा, विधानसभा की कार्यवाही, स्थानीय जनसमस्याओं और दूसरे राज्यों में संगठनात्मक जिम्मेदारियों के माध्यम से अपना राजनीतिक सफर आगे बढ़ाया है। आने वाले समय में बिलासपुर और छत्तीसगढ़ की राजनीति में उनकी भूमिका किस दिशा में आगे बढ़ती है, यह उनके संगठनात्मक काम, पार्टी में मिलने वाली जिम्मेदारियों और जनता के बीच उनकी सक्रियता पर निर्भर करेगा।
