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डॉ. निलेश ढाकणे पर कार्रवाई के विरोध में दिंद्रुड में गांव बंद का आह्वान, एंबुलेंस विवाद से बढ़ा मामला

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डॉ. निलेश ढाकणे पर कार्रवाई के विरोध में दिंद्रुड में गांव बंद का आह्वान, एंबुलेंस विवाद से बढ़ा मामला

महाराष्ट्र के बीड जिले के माजलगांव तालुका स्थित दिंद्रुड गांव में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के चिकित्सा अधिकारी डॉ. निलेश ढाकणे के खिलाफ की गई कार्रवाई को लेकर विरोध सामने आया है। इस कार्रवाई के विरोध में ग्रामीणों की ओर से गांव बंद का आह्वान किए जाने की जानकारी सामने आई है। यह मामला एक बीमार बच्ची को सरकारी एंबुलेंस से दूसरे अस्पताल ले जाने के दौरान डीजल के पैसे मांगने के आरोपों से जुड़ा है। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने मामले की जांच की और डॉ. ढाकणे को उनके पद के प्रभार से मुक्त कर दिया। अब इस कार्रवाई के विरोध ने मामले को एक नया मोड़ दे दिया है। हालांकि, गांव बंद के आह्वान के बीच पूरे गांव में वास्तव में बंद लागू हुआ या नहीं, इसकी स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है।

इस पूरे मामले की शुरुआत 29 सितंबर 2026 को हुई थी। रिपोर्टों के अनुसार, दिंद्रुड के जिला परिषद स्कूल में पढ़ने वाली एक छात्रा की तबीयत अचानक बिगड़ गई थी। छात्रा को दौरा पड़ने के बाद स्कूल के प्रधानाध्यापक मनोहर कटारे और अन्य कर्मचारियों की मदद से दिंद्रुड प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया गया। वहां शुरुआती उपचार के बाद चिकित्सा अधिकारी ने बच्ची को बेहतर इलाज के लिए दूसरे अस्पताल में ले जाने की सलाह दी थी। इसके बाद परिवार के सदस्य उसे आगे के उपचार के लिए ले जाने की तैयारी करने लगे।

आरोप है कि बच्ची को दूसरे अस्पताल में ले जाने के लिए सरकारी एंबुलेंस की व्यवस्था की गई, लेकिन इसी दौरान डीजल के लिए पैसे मांगे जाने को लेकर विवाद हो गया। बच्ची के परिजनों के मुताबिक, उनके पास ईंधन के लिए मांगी गई रकम देने के पैसे नहीं थे। आरोप है कि रकम नहीं दे पाने के कारण परिवार को एंबुलेंस से उतरने के लिए कहा गया। इसके बाद बच्ची के पिता उसे कंधे पर उठाकर पैदल जाते दिखाई दिए। इस घटना का वीडियो सामने आने के बाद सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं में मरीजों के साथ व्यवहार और आपात स्थिति में एंबुलेंस की भूमिका को लेकर सवाल उठने लगे।

मामले ने उस समय और गंभीर रूप ले लिया, जब वायरल वीडियो में स्वास्थ्य केंद्र के एक कर्मचारी की ओर से परिवार की आर्थिक स्थिति को लेकर कथित तौर पर आपत्तिजनक टिप्पणी सुनाई देने की बात सामने आई। बच्ची के परिवार की आर्थिक स्थिति पहले से ही कमजोर बताई गई है। रिपोर्टों के अनुसार, उसके पिता मजदूरी करके परिवार का पालन-पोषण करते हैं और पत्नी की मृत्यु के बाद बच्चों की जिम्मेदारी भी उन्हीं पर है। ऐसे में एंबुलेंस के ईंधन को लेकर सामने आए आरोपों ने लोगों का ध्यान ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं की जवाबदेही की ओर खींचा। हालांकि, घटना से जुड़े सभी आरोपों और संबंधित कर्मचारियों की भूमिका का अंतिम निर्धारण जांच और विभागीय कार्रवाई के आधार पर ही किया जा सकता है।

स्वास्थ्य विभाग ने डॉ. ढाकणे के खिलाफ क्या कार्रवाई की?

वीडियो सामने आने और मामला चर्चा में आने के बाद बीड जिला परिषद के स्वास्थ्य विभाग ने जांच की। जिला स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. उल्हास गंडाल के अनुसार, प्रारंभिक जांच में डॉ. निलेश ढाकणे के खिलाफ कर्तव्य में लापरवाही का प्रथमदृष्टया मामला पाया गया। इसके बाद उन्हें दिंद्रुड प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के चिकित्सा अधिकारी पद के प्रभार से तत्काल प्रभाव से मुक्त कर दिया गया। उन्हें अगले आदेश तक बीड जिला परिषद के जिला स्वास्थ्य अधिकारी कार्यालय में तैनात किया गया है।

स्वास्थ्य विभाग ने डॉ. ढाकणे के खिलाफ आगे की अनुशासनात्मक कार्रवाई के लिए प्रस्ताव भी भेजा है। यह प्रस्ताव उपनिदेशक, स्वास्थ्य सेवाएं, लातूर मंडल के माध्यम से स्वास्थ्य सेवा आयुक्त, मुंबई को भेजे जाने की जानकारी दी गई। प्रस्ताव में महाराष्ट्र सिविल सेवा (अनुशासन एवं अपील) नियम, 1979 के तहत कार्रवाई की मांग की गई है। यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि पद का प्रभार वापस लिया जाना और निलंबन या अन्य अंतिम अनुशासनात्मक सजा अलग-अलग प्रक्रियाएं हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, डॉ. ढाकणे के खिलाफ आगे की कार्रवाई का प्रस्ताव भेजा गया है; इसे अंतिम दंडात्मक निर्णय नहीं माना जाना चाहिए।

जिला स्वास्थ्य अधिकारी ने यह भी कहा था कि एंबुलेंस के ईंधन के लिए नियमित रूप से मासिक भुगतान किया जा रहा है, ईंधन कार्ड उपलब्ध कराया गया है और ईंधन खर्च की निगरानी की व्यवस्था भी है। इसलिए मामले में डीजल के पैसे मांगने के पीछे किसी भुगतान में देरी की स्थिति थी या नहीं, यह सवाल भी महत्वपूर्ण है। विभाग की ओर से दी गई जानकारी और परिवार के आरोपों के बीच तथ्यों को स्पष्ट करने के लिए जांच के निष्कर्ष अहम होंगे।

डॉ. ढाकणे पर कार्रवाई के विरोध में गांव बंद का आह्वान

दिंद्रुड में अब डॉ. निलेश ढाकणे के खिलाफ की गई कार्रवाई के विरोध में गांव बंद का आह्वान किया गया है। स्थानीय स्तर पर सामने आई जानकारी के अनुसार, ग्रामीण इस कार्रवाई के विरोध में एकजुट होकर अपना विरोध दर्ज कराने की तैयारी में हैं। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में गांव बंद के आयोजकों, उनकी ओर से रखी गई विस्तृत मांगों और बंद के वास्तविक प्रभाव की पूरी पुष्टि नहीं हो सकी है। इसलिए इसे गांव बंद का आह्वान ही माना जाना चाहिए, न कि पूरे गांव में बंद सफलतापूर्वक लागू होने की पुष्ट खबर।

इस घटनाक्रम ने मामले को दो स्तरों पर महत्वपूर्ण बना दिया है। एक ओर, बीमार बच्ची और उसके परिवार के साथ एंबुलेंस में कथित व्यवहार को लेकर जवाबदेही तय करने की मांग उठी। दूसरी ओर, डॉ. ढाकणे के खिलाफ विभागीय कार्रवाई का विरोध सामने आया है। ऐसे मामलों में किसी अधिकारी के पक्ष या विपक्ष में उठने वाली आवाजों के साथ-साथ घटना के वास्तविक तथ्यों, संबंधित कर्मचारियों के बयान और प्रशासनिक जांच को भी महत्व देना जरूरी है। किसी भी पक्ष के दावे को अंतिम निष्कर्ष मानने से पहले पूरे मामले की निष्पक्ष जांच आवश्यक है।

फिलहाल, डॉ. निलेश ढाकणे को दिंद्रुड प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के चिकित्सा अधिकारी पद के प्रभार से हटाया जा चुका है और आगे की अनुशासनात्मक कार्रवाई का प्रस्ताव स्वास्थ्य विभाग के उच्च अधिकारियों को भेजा गया है। दूसरी ओर, ग्रामीणों की ओर से कार्रवाई के विरोध में गांव बंद का आह्वान किया गया है। आने वाले समय में प्रशासन की ओर से जांच और प्रस्तावित कार्रवाई पर क्या निर्णय लिया जाता है, इस पर पूरे मामले की दिशा निर्भर करेगी।

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