मध्य प्रदेश में शरद पूर्णिमा के अवसर पर धार्मिक आस्था की एक झलक देखने को मिली। प्रदेश सरकार में पंचायत एवं ग्रामीण विकास तथा श्रम मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल ने रविवार, 25 अक्टूबर 2026 को मां नर्मदा को नमन किया। उन्होंने सोशल मीडिया मंच एक्स (X) पर तस्वीर साझा करते हुए बताया कि भोपाल से नर्मदापुरम जाते समय उन्होंने मां नर्मदा को प्रणाम किया। मंत्री ने इस अवसर पर मां नर्मदा की कृपा सभी पर बनी रहने की कामना भी की।
प्रहलाद सिंह पटेल ने अपनी पोस्ट में लिखा, “भोपाल से नर्मदापुरम जाते समय मां नर्मदा जी को नमन किया। आज शरद पूर्णिमा भी है। मां की कृपा सब पर बनी रहे। नर्मदे हर।” उनके साथ साझा की गई तस्वीरों में वे नदी के किनारे मां नर्मदा को नमन करते नजर आ रहे हैं। तस्वीर में उनके हाथ में फूलों की माला भी दिखाई दे रही है। इस पोस्ट के माध्यम से उन्होंने शरद पूर्णिमा के अवसर पर अपनी धार्मिक आस्था और मां नर्मदा के प्रति श्रद्धा व्यक्त की।
मंत्री की पोस्ट में उनके नर्मदापुरम पहुंचने के कार्यक्रम, यात्रा के दौरान नदी के किस घाट पर रुकने या किसी अन्य धार्मिक आयोजन में शामिल होने की विस्तृत जानकारी नहीं दी गई है। इसलिए फिलहाल इस यात्रा से जुड़ी पुष्टि उनकी सोशल मीडिया पोस्ट में साझा की गई जानकारी तक ही सीमित है।
भोपाल से नर्मदापुरम जाते समय माँ नर्मदा जी को नमन किया। आज शरद पूर्णिमा भी है। माँ की कृपा सब पर बनी रहे।
नर्मदे हर🙏 pic.twitter.com/GVeEE5qqiu
— Prahlad Singh Patel ( वृक्ष से जल, जल से जीवन) (@prahladspatel) October 25, 2026
शरद पूर्णिमा का क्यों है विशेष महत्व?
हिंदू पंचांग के अनुसार शरद पूर्णिमा आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को मनाई जाती है। वर्ष 2026 में यह पर्व रविवार, 25 अक्टूबर को मनाया जा रहा है। धार्मिक मान्यताओं में इस पूर्णिमा का विशेष महत्व बताया गया है। इस दिन मां लक्ष्मी और चंद्रदेव की पूजा करने की परंपरा है। कई स्थानों पर श्रद्धालु व्रत रखते हैं और परिवार की सुख-समृद्धि तथा खुशहाली की कामना करते हैं।
शरद पूर्णिमा से जुड़ी सबसे प्रचलित परंपराओं में रात के समय खीर बनाकर उसे चंद्रमा की रोशनी में रखने की परंपरा भी शामिल है। मान्यता के अनुसार इस रात चंद्रमा की किरणें विशेष महत्व रखती हैं। कई परिवार पूजा के बाद खीर को प्रसाद के रूप में ग्रहण करते हैं। हालांकि, इन परंपराओं और उनसे जुड़ी मान्यताओं का स्वरूप अलग-अलग क्षेत्रों तथा परिवारों में भिन्न हो सकता है।
ब्रज क्षेत्र में शरद पूर्णिमा को रास पूर्णिमा के रूप में भी जाना जाता है। धार्मिक परंपरा के अनुसार इस रात का संबंध भगवान श्रीकृष्ण की महारास लीला से जोड़ा जाता है। वहीं, देश के कई हिस्सों में इस अवसर पर मां लक्ष्मी की पूजा, भजन-कीर्तन और अन्य धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। इस तरह शरद पूर्णिमा भारतीय धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं में महत्वपूर्ण स्थान रखती है।
मध्य प्रदेश में मां नर्मदा के प्रति गहरी आस्था
मां नर्मदा मध्य प्रदेश की प्रमुख नदियों में से एक हैं। प्रदेश के धार्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक जीवन में इस नदी का विशेष स्थान है। नर्मदा के किनारे बसे कई नगरों और तीर्थस्थलों पर वर्षभर श्रद्धालु पूजा-पाठ और धार्मिक अनुष्ठानों के लिए पहुंचते हैं। नर्मदा को मां के रूप में पूजने की परंपरा मध्य प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान से भी जुड़ी हुई है।
नर्मदापुरम भी नर्मदा नदी के किनारे बसा एक प्रमुख शहर है। यहां नदी के घाटों पर धार्मिक गतिविधियां होती रहती हैं और विशेष पर्वों पर श्रद्धालुओं की आवाजाही बढ़ जाती है। नर्मदा से जुड़ी आस्था केवल धार्मिक अनुष्ठानों तक सीमित नहीं है, बल्कि नदी का जल कृषि, स्थानीय जीवन और क्षेत्रीय पर्यावरण के लिए भी महत्वपूर्ण है। यही वजह है कि नदी के संरक्षण और स्वच्छता को लेकर भी लगातार जागरूकता की आवश्यकता रहती है।
प्रहलाद सिंह पटेल की पोस्ट में भी मां नर्मदा के प्रति इसी श्रद्धा की झलक दिखाई देती है। उन्होंने शरद पूर्णिमा के दिन नदी को नमन करते हुए सभी के कल्याण की कामना की। उनकी पोस्ट का संदेश धार्मिक आस्था और मां नर्मदा के प्रति सम्मान से जुड़ा है। मंत्री ने अपने संदेश का समापन ‘नर्मदे हर’ के साथ किया, जो नर्मदा के प्रति श्रद्धा व्यक्त करने के लिए व्यापक रूप से इस्तेमाल किया जाने वाला अभिवादन है।
