देशभर के किसानों के लिए डिजिटल कृषि व्यवस्था की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि सामने आई है। केंद्र सरकार ने 11 करोड़ फार्मर आईडी (Farmer ID) बनाने का लक्ष्य निर्धारित समय से करीब पांच महीने पहले पूरा कर लिया है। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने 24 अक्टूबर 2026 को इसकी जानकारी साझा करते हुए बताया कि 23 अक्टूबर की रात तक देश में 11 करोड़ फार्मर आईडी बनाई जा चुकी थीं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस लक्ष्य को 31 मार्च 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा था। सरकार का कहना है कि इस व्यवस्था से किसानों को सरकारी योजनाओं का लाभ अधिक पारदर्शी तरीके से दिलाने, कागजी कार्रवाई कम करने और कृषि सेवाओं को आसान बनाने में मदद मिलेगी।
यह पहल केंद्र सरकार के डिजिटल कृषि मिशन के तहत आगे बढ़ाई जा रही है। फार्मर आईडी को किसानों की विशिष्ट डिजिटल पहचान के रूप में तैयार किया जा रहा है, ताकि उनकी पहचान, जमीन से जुड़े रिकॉर्ड और कृषि सेवाओं की जानकारी को व्यवस्थित तरीके से जोड़ा जा सके। सरकार का उद्देश्य है कि किसानों को अलग-अलग योजनाओं का लाभ लेने के लिए बार-बार वही दस्तावेज जमा करने और सत्यापन कराने में कम समय लगे। हालांकि, फार्मर आईडी बन जाने का अर्थ यह नहीं है कि हर किसान को सभी योजनाओं का लाभ अपने आप मिल जाएगा। संबंधित योजनाओं की पात्रता और अन्य जरूरी शर्तें पूरी करना भी आवश्यक होगा।
क्या है फार्मर आईडी और इसे क्यों बनाया जा रहा है?
फार्मर आईडी किसानों के लिए बनाई जा रही एक विशिष्ट डिजिटल पहचान है। इसे केंद्र सरकार की एग्रीस्टैक (AgriStack) व्यवस्था के अंतर्गत विकसित किया जा रहा है। इसका उद्देश्य किसान की पहचान और खेती से संबंधित जानकारियों को एक व्यवस्थित डिजिटल रिकॉर्ड से जोड़ना है। इसमें किसान का विवरण, जमीन के रिकॉर्ड और उपलब्ध कृषि संबंधी जानकारी शामिल हो सकती है। इससे सरकारी विभागों को पात्र किसानों की पहचान करने और योजनाओं का लाभ पहुंचाने की प्रक्रिया बेहतर बनाने में सहायता मिल सकती है।
डिजिटल कृषि मिशन को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 2 सितंबर 2024 को मंजूरी दी थी। इस मिशन के लिए 2,817 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया। इसके तहत कृषि क्षेत्र में डिजिटल सुविधाओं का विकास, किसानों से जुड़ा रिकॉर्ड व्यवस्थित करना और तकनीक के माध्यम से कृषि सेवाओं को बेहतर बनाना शामिल है। फार्मर आईडी इसी व्यापक पहल का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।
प्रिय किसान बहनों और भाइयों,
आज का दिन भारतीय कृषि और किसानों के लिए ऐतिहासिक है। एक सपना साकार हुआ है, एक संकल्प पूरा हुआ है। आदरणीय प्रधानमंत्री श्री @narendramodi जी ने मार्च 2027 तक 11 करोड़ फार्मर आईडी बनाने का लक्ष्य तय किया था। मुझे यह बताते हुए खुशी है कि तय समय से 5… pic.twitter.com/q387e7HaRI
— Shivraj Singh Chouhan (@ChouhanShivraj) October 24, 2026
एग्रीस्टैक व्यवस्था में तीन प्रमुख डिजिटल रजिस्ट्रियां शामिल हैं। इनमें किसानों की पहचान से संबंधित फार्मर रजिस्ट्री, गांवों के भौगोलिक रूप से संदर्भित नक्शे और खेतों में बोई गई फसलों का रिकॉर्ड रखने वाली क्रॉप सown रजिस्ट्री शामिल हैं। फसल संबंधी जानकारी जुटाने के लिए डिजिटल क्रॉप सर्वे का भी उपयोग किया जा रहा है। इन व्यवस्थाओं को जोड़ने का मकसद कृषि से संबंधित सूचनाओं की उपलब्धता और सरकारी सेवाओं के संचालन को अधिक प्रभावी बनाना है।
किसानों को फार्मर आईडी से क्या-क्या फायदे मिल सकते हैं?
1. बैंक लोन और किसान क्रेडिट कार्ड: फार्मर आईडी को बैंकिंग सेवाओं और कृषि ऋण व्यवस्था से जोड़ने पर किसानों की पहचान और भूमि संबंधी जानकारियों के सत्यापन में आसानी हो सकती है। इससे किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) और कृषि ऋण के लिए आवेदन की प्रक्रिया सरल बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है। हालांकि, ऋण की मंजूरी बैंक के नियमों, पात्रता और जरूरी शर्तों पर निर्भर करेगी। केवल फार्मर आईडी होने से लोन की मंजूरी की गारंटी नहीं होगी।
2. प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना: फसल बीमा से जुड़ी प्रक्रियाओं में किसान की पहचान और खेती संबंधी रिकॉर्ड का डिजिटल इस्तेमाल होने से सत्यापन और नुकसान के आकलन की प्रक्रिया बेहतर हो सकती है। प्राकृतिक आपदा या फसल खराब होने की स्थिति में पात्र किसानों के दावों को निपटाने में मदद मिलने की उम्मीद है। हालांकि, बीमा का लाभ संबंधित योजना की शर्तों, बीमित फसल, लागू नियमों और दावे की पात्रता के आधार पर ही मिलेगा।
3. आपदा राहत राशि: बाढ़, सूखा और अन्य प्राकृतिक आपदाओं से फसलों को नुकसान होने पर राहत वितरण के दौरान पात्र किसानों की पहचान करना महत्वपूर्ण होता है। डिजिटल रिकॉर्ड से संबंधित विभागों को सत्यापन और लाभार्थियों की पहचान में सहायता मिल सकती है। इससे जरूरतमंद किसानों तक सहायता पहुंचाने की प्रक्रिया अधिक पारदर्शी बनाने में मदद मिल सकती है।
4. न्यूनतम समर्थन मूल्य पर फसल की बिक्री: फार्मर आईडी और डिजिटल फसल रिकॉर्ड को सरकारी खरीद व्यवस्था से जोड़ने पर किसानों के पंजीकरण, फसल के सत्यापन और खरीद से जुड़ी प्रक्रियाओं में आसानी हो सकती है। इससे अनावश्यक कागजी कार्रवाई और गलत रिकॉर्ड की समस्या कम करने में मदद मिलने की उम्मीद है। हालांकि, न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर खरीद के लिए लागू फसल, पंजीकरण, गुणवत्ता और राज्य के निर्धारित नियमों का पालन करना होगा।
5. सरकारी योजनाओं का लाभ: फार्मर आईडी को किसान-केंद्रित योजनाओं से जोड़ने का उद्देश्य सही लाभार्थियों की पहचान करना और बार-बार दस्तावेजों की जांच की जरूरत कम करना है। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि, कृषि ऋण, फसल बीमा, कृषि आदान वितरण और आपदा राहत जैसी सेवाओं में डिजिटल रिकॉर्ड उपयोगी हो सकते हैं। योजनाओं के बीच बेहतर समन्वय होने से पात्रता की जांच और लाभ पहुंचाने की प्रक्रिया सरल बनने की संभावना है।
सरकार के मुताबिक, 6 करोड़ से अधिक किसानों को मिल चुका है लाभ
कृषि मंत्रालय के अनुसार, फार्मर आईडी आधारित सेवा वितरण व्यवस्था के माध्यम से देश में अब तक 6 करोड़ से अधिक किसानों को विभिन्न योजनाओं के तहत सीधे लाभ मिल चुका है। सरकार का कहना है कि सत्यापित किसान रिकॉर्ड को कृषि सेवाओं से जोड़ने से दोहराव वाले सत्यापन और गड़बड़ियों को कम करने में मदद मिल रही है। इससे सरकारी विभागों के बीच समन्वय बेहतर बनाने और योजनाओं की प्रगति पर नजर रखने में भी सहायता मिल सकती है।
इस व्यवस्था का असर केवल किसान की पहचान तक सीमित नहीं है। डिजिटल रिकॉर्ड का इस्तेमाल कृषि खरीद, ऋण वितरण, फसल बीमा और आपदा राहत जैसी अलग-अलग जरूरतों में किया जा सकता है। हालांकि, इन सुविधाओं का वास्तविक फायदा इस बात पर निर्भर करेगा कि संबंधित राज्य में डिजिटल व्यवस्था किस स्तर तक लागू हुई है और संबंधित योजना को फार्मर आईडी से किस तरह जोड़ा गया है।
फार्मर आईडी कैसे बनेगी और किसानों को क्या करना चाहिए?
फार्मर आईडी बनाने की प्रक्रिया राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों के माध्यम से संचालित की जा रही है। इसमें किसानों की जानकारी का डिजिटाइज्ड भूमि रिकॉर्ड के साथ मिलान किया जाता है। जमीन से जुड़े रिकॉर्ड में अंतर, अधूरे दस्तावेज या अन्य विसंगतियां होने पर सत्यापन की जरूरत पड़ सकती है। इसलिए जिन किसानों की फार्मर आईडी अभी नहीं बनी है, उन्हें अपने राज्य के कृषि विभाग, स्थानीय कृषि कार्यालय या आधिकारिक तौर पर आयोजित पंजीकरण शिविर से जानकारी लेनी चाहिए। कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) जैसे सहायता केंद्र भी पंजीकरण और डिजिटल सेवाओं तक पहुंचने में मदद कर सकते हैं।
फार्मर आईडी की प्रक्रिया सभी राज्यों में एक जैसी हो, यह जरूरी नहीं है। जिन किसानों के पास स्मार्टफोन या इंटरनेट की सुविधा नहीं है, वे भी स्थानीय सहायता केंद्रों और पंजीकरण शिविरों के माध्यम से जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। किरायेदार किसानों और बटाई पर खेती करने वालों को शामिल करने के लिए भी व्यवस्था में प्रावधान हैं, लेकिन उनका पंजीकरण संबंधित राज्य के नियमों और निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार होगा। किसान अपनी जानकारी और भूमि रिकॉर्ड में किसी तरह की गलती होने पर उसे ठीक कराने के लिए स्थानीय विभाग से संपर्क कर सकते हैं।
किसानों को पंजीकरण के दौरान केवल आधिकारिक पोर्टल, अधिकृत केंद्र या सरकारी शिविर का ही इस्तेमाल करना चाहिए। किसी अनजान व्यक्ति के साथ आधार संबंधी जानकारी, बैंक विवरण या ओटीपी साझा नहीं करना चाहिए। यदि पहचान या भूमि रिकॉर्ड में कोई अंतर है, तो उसे समय रहते ठीक कराना उपयोगी होगा, ताकि भविष्य में योजनाओं के लिए सत्यापन के दौरान परेशानी कम हो सके।
किसानों के डेटा की सुरक्षा भी महत्वपूर्ण
फार्मर आईडी व्यवस्था में किसानों की व्यक्तिगत और भूमि संबंधी जानकारी डिजिटल रूप में रखी जाती है, इसलिए डेटा की सुरक्षा और गोपनीयता भी अहम विषय है। कृषि मंत्रालय के अनुसार, एग्रीस्टैक की व्यवस्था में किसानों के डेटा के इस्तेमाल और साझा करने के लिए निर्धारित नियमों का पालन किया जाता है। सरकारी जानकारी के मुताबिक, डेटा की सुरक्षा के लिए उसे एन्क्रिप्ट करने और अधिकृत प्रणालियों तक पहुंच सीमित रखने जैसे उपाय किए गए हैं। राज्य स्तर पर किसान रजिस्ट्री के रिकॉर्ड का स्वामित्व संबंधित राज्य सरकारों के पास रहता है।
इस व्यवस्था को प्रभावी बनाने के लिए यह भी जरूरी होगा कि भूमि रिकॉर्ड और किसानों की जानकारी समय पर अपडेट की जाए। यदि रिकॉर्ड में नाम, जमीन या अन्य जरूरी विवरण गलत हैं, तो डिजिटल प्रणाली में भी समस्या आ सकती है। इसलिए किसानों की सुविधा के साथ-साथ शिकायत निवारण, जानकारी में सुधार और डेटा की सुरक्षा पर लगातार ध्यान देना महत्वपूर्ण होगा।
आगे क्या होगा?
11 करोड़ फार्मर आईडी बनाने का लक्ष्य पूरा होना डिजिटल कृषि मिशन के लिए एक महत्वपूर्ण पड़ाव है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा निर्धारित 31 मार्च 2027 की समय-सीमा से पहले इस लक्ष्य को हासिल करने की जानकारी केंद्र सरकार ने दी है। अब बड़ी चुनौती यह होगी कि इन डिजिटल पहचानों का इस्तेमाल विभिन्न कृषि योजनाओं और सेवाओं में प्रभावी तरीके से किया जाए, ताकि किसानों को वास्तव में कम कागजी कार्रवाई, बेहतर सत्यापन और समय पर सहायता का लाभ मिल सके।
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इस उपलब्धि के लिए केंद्र सरकार के अधिकारियों, राज्य सरकारों, केंद्र शासित प्रदेशों और जिला प्रशासन के प्रयासों की सराहना की है। सरकार का दावा है कि फार्मर आईडी से किसानों को योजनाओं का लाभ अधिक पारदर्शी तरीके से मिल सकेगा। आने वाले समय में इस पहल की सफलता का आकलन केवल बनाई गई आईडी की संख्या से नहीं, बल्कि किसानों को ऋण, फसल बीमा, सरकारी खरीद और अन्य सेवाओं का लाभ कितनी आसानी और समय पर मिलता है, इससे भी किया जाएगा।
