मध्यप्रदेश शूटिंग अकादमी से जुड़ी भारतीय निशानेबाज नीरू ढांडा ने एशियन गेम्स 2026 में स्वर्ण पदक जीतकर देश का नाम रोशन किया है। उन्होंने जापान के आइची-नागोया में आयोजित प्रतियोगिता में महिलाओं की व्यक्तिगत ट्रैप शूटिंग स्पर्धा में शानदार प्रदर्शन करते हुए गोल्ड मेडल अपने नाम किया। इस उपलब्धि के साथ नीरू एशियन गेम्स में महिला ट्रैप की व्यक्तिगत स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला बन गईं। उनकी इस ऐतिहासिक सफलता पर मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने उन्हें बधाई देते हुए इसे देश की बेटियों और युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणादायक उपलब्धि बताया।
नीरू ढांडा की यह जीत कई मायनों में खास है। उन्होंने ऐसे समय में अपनी प्रतिभा साबित की, जब भारतीय निशानेबाजी के लिए इस स्पर्धा में स्वर्ण पदक का इंतजार लंबे समय से बना हुआ था। नीरू ने फाइनल में कुल 30 में से 28 निशाने सटीक लगाए और एशियाई रिकॉर्ड भी अपने नाम किया। चीन की सुन युनोंग 26 अंकों के साथ दूसरे स्थान पर रहीं, जबकि कुवैत की हाजर अब्दुलमलिक ने 21 अंक हासिल कर कांस्य पदक जीता। नीरू के इस प्रदर्शन ने उन्हें एशियन गेम्स की सबसे चर्चित भारतीय खिलाड़ियों में शामिल कर दिया।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर नीरू को बधाई देते हुए कहा कि एशियन गेम्स में महिला ट्रैप व्यक्तिगत स्पर्धा का पहला स्वर्ण पदक जीतकर उन्होंने इतिहास रचा है। मुख्यमंत्री ने उनकी उपलब्धि को देश की बेटियों और युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा बताते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। मध्यप्रदेश के लिए भी यह उपलब्धि महत्वपूर्ण है, क्योंकि नीरू राज्य की शूटिंग अकादमी से जुड़ी रही हैं और महू में सेना की शूटिंग इकाई में प्रशिक्षण लेती हैं।
फाइनल में 28 सटीक निशाने लगाकर तोड़ा एशियाई रिकॉर्ड
महिला ट्रैप शूटिंग में निशानेबाजों को हवा में छोड़े जाने वाले मिट्टी के लक्ष्यों को बंदूक से निशाना बनाकर तोड़ना होता है। इसमें लक्ष्य तेजी से दिशा बदलते हैं, इसलिए खिलाड़ी को बेहद कम समय में उनकी गति, दिशा और दूरी का अनुमान लगाना पड़ता है। थोड़ी सी चूक भी अंक गंवाने का कारण बन सकती है। ऐसे में लगातार सही निशाने लगाना खिलाड़ी के कौशल, एकाग्रता और दबाव में प्रदर्शन करने की क्षमता को दर्शाता है।
एशियन गेम्स 2026 की महिला ट्रैप स्पर्धा के क्वालिफिकेशन राउंड में नीरू ने 125 में से 118 अंक हासिल किए। इस स्कोर के साथ वह कतर की रे बासिल के बराबर शीर्ष स्थान पर रहीं। इसके बाद फाइनल में नीरू ने अपने प्रदर्शन को और बेहतर किया और 30 में से 28 लक्ष्य तोड़कर स्वर्ण पदक जीत लिया। उनके 28 अंकों ने इस स्पर्धा के पिछले एशियाई रिकॉर्ड 24 को पीछे छोड़ दिया। चीन की सुन युनोंग ने 26 अंकों के साथ रजत पदक हासिल किया।
इस परिणाम ने यह भी दिखाया कि निशानेबाजी में क्वालिफिकेशन के अच्छे प्रदर्शन को फाइनल में दोहराना कितना महत्वपूर्ण है। नीरू ने शुरुआती दौर में अपनी निरंतरता बनाए रखी और निर्णायक मुकाबले में भी दबाव को अपने ऊपर हावी नहीं होने दिया। बारिश और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के बीच उनका सटीक निशाना भारतीय टीम के लिए बड़ी उपलब्धि बन गया।
टीम स्पर्धा में भी भारत को दिलाया रजत पदक
नीरू ढांडा की सफलता केवल व्यक्तिगत स्वर्ण पदक तक सीमित नहीं रही। उन्होंने एशियन गेम्स में महिला ट्रैप टीम स्पर्धा में भी भारतीय टीम को रजत पदक दिलाने में अहम योगदान दिया। इस स्पर्धा में नीरू के साथ आशिमा अहलावत और मनीषा कीर भारतीय टीम का हिस्सा थीं। तीनों खिलाड़ियों ने मिलकर कुल 328 अंक हासिल किए और दूसरा स्थान प्राप्त किया।
टीम स्पर्धा में चीन ने 346 अंकों के साथ स्वर्ण पदक जीता, जबकि कुवैत की टीम 325 अंक लेकर तीसरे स्थान पर रही। भारतीय टीम ने कुवैत को पीछे छोड़ते हुए रजत पदक अपने नाम किया। नीरू ने इस स्पर्धा में 118 अंक बनाए, जबकि आशिमा अहलावत ने 106 और मनीषा कीर ने 104 अंक हासिल किए। इस तरह भारतीय टीम के कुल स्कोर में नीरू का योगदान सबसे अधिक रहा।
व्यक्तिगत स्पर्धा में स्वर्ण और टीम स्पर्धा में रजत पदक जीतकर नीरू ने एशियन गेम्स में अपने प्रदर्शन की मजबूती साबित की। यह उपलब्धि मध्यप्रदेश शूटिंग अकादमी से जुड़े खिलाड़ियों के लिए भी महत्वपूर्ण है। इससे पता चलता है कि लगातार अभ्यास, उचित प्रशिक्षण और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने का अनुभव खिलाड़ियों को बड़े मंच पर सफलता हासिल करने में मदद कर सकता है।
हरियाणा के जींद से शुरू हुआ नीरू का सफर
नीरू ढांडा मूल रूप से हरियाणा के जींद जिले की रहने वाली हैं। उनकी निशानेबाजी की यात्रा आसान नहीं रही। उन्हें इस खेल में आगे बढ़ने की प्रेरणा अपने रिश्ते के भाई लक्ष्य श्योराण से मिली, जिन्होंने 2018 के एशियन गेम्स में ट्रैप शूटिंग में रजत पदक जीता था। लक्ष्य की उपलब्धि देखने के बाद नीरू की दिलचस्पी भी निशानेबाजी में बढ़ी और उन्होंने इसे गंभीरता से अपनाने का फैसला किया।
शुरुआती दिनों में उन्हें महंगे उपकरणों और अभ्यास के संसाधनों की सीमाओं का सामना करना पड़ा। परिवार की डबल बैरल बंदूक से टीन के डिब्बों पर निशाना लगाने का अभ्यास भी उनके शुरुआती सफर का हिस्सा रहा। बाद में लक्ष्य श्योराण ने उन्हें अपनी बंदूक से अभ्यास करने में मदद की। इससे नीरू को खेल की बारीकियां समझने और अपने निशाने को बेहतर बनाने का अवसर मिला।
वर्ष 2019 में नीरू मध्यप्रदेश शूटिंग अकादमी से जुड़ीं। यहां उपलब्ध प्रशिक्षण सुविधाओं और अभ्यास के अवसरों से उनके खेल को आगे बढ़ने में मदद मिली। वह भारतीय सेना की कोर ऑफ मिलिट्री पुलिस में नायब सूबेदार भी हैं और मध्यप्रदेश के महू स्थित आर्मी मार्क्समैनशिप यूनिट में प्रशिक्षण लेती हैं। हरियाणा से शुरू हुआ उनका सफर मध्यप्रदेश में प्रशिक्षण और निरंतर मेहनत के सहारे अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचा।
नीरू ने इससे पहले भी अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में अपनी प्रतिभा दिखाई है। वर्ष 2025 में उन्होंने एशियाई चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीता था। वर्ष 2026 में इटली के लोनाटो में आयोजित आईएसएसएफ शॉटगन विश्व कप में महिला ट्रैप स्पर्धा का स्वर्ण जीतकर वह इस प्रतियोगिता में व्यक्तिगत स्वर्ण पदक हासिल करने वाली पहली भारतीय महिला बनी थीं। एशियन गेम्स में मिली सफलता ने उनके करियर को एक और बड़ी उपलब्धि दी है।
भारतीय निशानेबाजी के लिए क्यों अहम है यह जीत?
एशियन गेम्स में नीरू ढांडा का स्वर्ण पदक भारतीय निशानेबाजी के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि है। महिला ट्रैप की व्यक्तिगत स्पर्धा में इससे पहले कोई भारतीय महिला एशियन गेम्स का स्वर्ण नहीं जीत सकी थी। इसके अलावा, भारतीय निशानेबाजों ने पुरुषों की व्यक्तिगत ट्रैप स्पर्धा में आखिरी बार 1978 के एशियन गेम्स में स्वर्ण पदक जीता था। नीरू की जीत ने इस स्पर्धा में भारत की लंबे समय से चली आ रही पदक संबंधी प्रतीक्षा को समाप्त किया।
उनकी उपलब्धि का महत्व केवल पदक तक सीमित नहीं है। निशानेबाजी जैसे खेल में उपकरण, गोला-बारूद, अभ्यास और विशेषज्ञ प्रशिक्षण की जरूरत होती है। ऐसे में किसी खिलाड़ी का शुरुआती कठिनाइयों से निकलकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्वर्ण पदक जीतना उन युवाओं के लिए उम्मीद जगाता है, जो सीमित संसाधनों के बावजूद खेल में अपना करियर बनाना चाहते हैं। नीरू की कहानी यह भी बताती है कि सही मार्गदर्शन और लगातार अभ्यास से खिलाड़ी बड़े मुकाबलों में अपनी पहचान बना सकते हैं।
मुख्यमंत्री मोहन यादव की ओर से दी गई बधाई इसी उपलब्धि के महत्व को रेखांकित करती है। नीरू ढांडा ने अपने प्रदर्शन से मध्यप्रदेश की शूटिंग अकादमी और भारतीय खेल जगत को गौरवान्वित किया है। एशियन गेम्स में गोल्ड और टीम स्पर्धा में सिल्वर जीतने के बाद अब उनसे भविष्य की अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भी अच्छे प्रदर्शन की उम्मीद रहेगी। उनकी यह सफलता देश की उन युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा है, जो मेहनत और समर्पण के दम पर अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत का तिरंगा ऊंचा उठाना चाहती हैं।
