सिंगरौली: मध्य प्रदेश के सिंगरौली जिले के बरगवां में स्ट्रीट लाइट के उद्घाटन को लेकर विवाद सामने आया है। यहां पहले से जल रही स्ट्रीट लाइटों के उद्घाटन को लेकर वार्ड पार्षद ने सवाल उठाए हैं। पार्षद ने नगर परिषद अध्यक्ष प्रमिला वर्मा पर अनदेखी करने का आरोप लगाया है। इस मामले से नगर परिषद के विकास कार्यों और जनप्रतिनिधियों की भूमिका को लेकर स्थानीय स्तर पर चर्चा शुरू हो गई है। 16 अक्टूबर 2026 को सामने आई एक स्थानीय वीडियो रिपोर्ट में इस विवाद का उल्लेख किया गया है।
रिपोर्ट के मुताबिक, विवाद की मुख्य वजह स्ट्रीट लाइटों के उद्घाटन को लेकर उठे सवाल हैं। पार्षद का आरोप है कि जिन स्ट्रीट लाइटों को लेकर उद्घाटन की बात सामने आई, वे पहले से ही जल रही थीं। ऐसे में उद्घाटन की आवश्यकता और उससे जुड़े घटनाक्रम को लेकर सवाल उठाए गए हैं। हालांकि, उपलब्ध जानकारी से यह स्पष्ट नहीं होता कि संबंधित लाइटें कब लगाई गई थीं, उन्हें पहली बार कब चालू किया गया था और उद्घाटन कार्यक्रम किस तारीख को आयोजित हुआ।
इस मामले में नगर परिषद अध्यक्ष प्रमिला वर्मा पर अनदेखी के आरोप भी लगाए गए हैं। हालांकि, उपलब्ध रिपोर्ट में संबंधित वार्ड पार्षद का नाम, कार्यक्रम में उनकी भागीदारी से जुड़ी विस्तृत जानकारी और आरोपों के समर्थन में स्वतंत्र रूप से सत्यापित दस्तावेज सामने नहीं आए हैं। इसलिए फिलहाल इस पूरे मामले को पार्षद की ओर से लगाए गए आरोपों के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
बरगवां में विकास कार्यों को लेकर क्या है मामला?
बरगवां में स्ट्रीट लाइट को लेकर सामने आए विवाद के बीच नगर परिषद के हालिया विकास प्रस्तावों का संदर्भ भी महत्वपूर्ण है। 14 अक्टूबर 2026 को प्रकाशित एक स्थानीय रिपोर्ट के अनुसार, नगर परिषद बरगवां की बैठक में कुल 5 करोड़ 66 लाख रुपये के विकास कार्यों को मंजूरी दिए जाने की जानकारी सामने आई थी। इन कार्यों में बिजली व्यवस्था को मजबूत करना, स्ट्रीट लाइट पोल लगाना, पेयजल सुविधाओं का विस्तार, शिवदरा तालाब का सौंदर्यीकरण और मुक्तिधाम का विकास शामिल बताया गया था।
रिपोर्ट के अनुसार, बिजली व्यवस्था के सुदृढ़ीकरण के लिए 2 करोड़ 8 लाख रुपये और विभिन्न स्थानों पर स्ट्रीट लाइट पोल की व्यवस्था के लिए 30 लाख रुपये स्वीकृत किए गए थे। इसके अलावा शिवदरा तालाब के सौंदर्यीकरण के लिए 2 करोड़ 54 लाख रुपये, हैंडपंप और पेयजल सुविधाओं के विस्तार के लिए 30 लाख रुपये तथा मुक्तिधाम के निर्माण एवं विकास के लिए 44 लाख रुपये की मंजूरी का उल्लेख किया गया था। इन सभी प्रस्तावों की कुल राशि 5 करोड़ 66 लाख रुपये बताई गई थी।
हालांकि, इन विकास कार्यों की मंजूरी और स्ट्रीट लाइट के उद्घाटन को लेकर सामने आए विवाद के बीच सीधा संबंध अभी स्पष्ट नहीं है। उपलब्ध जानकारी से यह पुष्टि नहीं होती कि वीडियो में जिन स्ट्रीट लाइटों का उल्लेख है, वे इन्हीं स्वीकृत कार्यों का हिस्सा थीं या किसी पहले से पूरी हो चुकी परियोजना के तहत लगाई गई थीं। इसके लिए संबंधित कार्यादेश, परियोजना की लागत, स्थापना की तारीख और उद्घाटन से जुड़े आधिकारिक विवरणों की पुष्टि जरूरी होगी।
पार्षद के आरोपों पर आधिकारिक स्थिति स्पष्ट होना जरूरी
नगर परिषद में होने वाले विकास कार्यों का उद्देश्य नागरिकों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना होता है। स्ट्रीट लाइट जैसी बुनियादी सुविधा का सीधा संबंध सार्वजनिक सुरक्षा, रात में आवागमन और स्थानीय लोगों की रोजमर्रा की जरूरतों से है। इसलिए ऐसे कार्यों को लेकर उठने वाले सवालों का जवाब तथ्यों और आधिकारिक रिकॉर्ड के आधार पर दिया जाना जरूरी है।
यदि किसी वार्ड में स्ट्रीट लाइट पहले से चालू थीं और बाद में उनके उद्घाटन को लेकर विवाद हुआ है, तो परियोजना की स्थिति, कार्य पूरा होने की तारीख और कार्यक्रम का उद्देश्य स्पष्ट किए जाने से मामले को समझने में मदद मिल सकती है। इसी तरह, पार्षद द्वारा लगाए गए अनदेखी के आरोपों पर नगर परिषद का पक्ष सामने आने से भी विवाद की वास्तविक परिस्थितियां स्पष्ट होंगी।
फिलहाल बरगवां में स्ट्रीट लाइट के उद्घाटन को लेकर सामने आई जानकारी एक स्थानीय वीडियो रिपोर्ट और उसमें दर्ज आरोपों पर आधारित है। संबंधित वार्ड, पार्षद का नाम, स्ट्रीट लाइटों की संख्या और इस विशेष कार्य की लागत की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध जानकारी से नहीं हो सकी है। नगर परिषद अध्यक्ष प्रमिला वर्मा या संबंधित अधिकारियों की आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आने के बाद मामले के अन्य पहलुओं पर स्थिति अधिक स्पष्ट हो सकेगी।
