भोपाल: मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में आदिवासी छात्रों के साथ कथित अभद्र व्यवहार का मामला सामने आने के बाद मिसरोद थाने के प्रभारी निरीक्षक रतनलाल सिंह परिहार को निलंबित कर दिया गया है। छात्रों के साथ कथित तौर पर आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल किए जाने से जुड़ा एक वीडियो सोशल मीडिया पर प्रसारित होने के बाद पुलिस विभाग ने कार्रवाई की। मामले में विभागीय जांच के आदेश भी दिए गए हैं।
जानकारी के अनुसार, यह घटना मंगलवार, 13 अक्टूबर को भोपाल में आदिवासी छात्रों और युवाओं के प्रदर्शन के दौरान हुई। गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के छात्र संगठन से जुड़े प्रदर्शनकारी अपनी समस्याओं को लेकर विरोध दर्ज करा रहे थे। इसी दौरान थाना प्रभारी और प्रदर्शनकारी छात्रों के बीच हुई बातचीत का वीडियो सामने आया, जिसमें अधिकारी कथित तौर पर अभद्र भाषा का इस्तेमाल करते और छात्रों को धमकाते नजर आ रहे हैं।
वीडियो के सामने आने के बाद मामले ने तूल पकड़ लिया। आदिवासी समाज के सम्मान और पुलिस के व्यवहार को लेकर सवाल उठने लगे। इसके बाद पुलिस विभाग ने मामले को गंभीरता से लेते हुए थाना प्रभारी के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई की।
15 दिन में जांच रिपोर्ट सौंपने के निर्देश
पुलिस उपायुक्त जोन-2 विकास शाहवाल के मुताबिक, प्रसारित वीडियो में थाना प्रभारी ड्यूटी के दौरान आपत्तिजनक और अनुचित टिप्पणी करते दिखाई दे रहे हैं। इस तरह का व्यवहार पुलिस सेवा के निर्धारित आचरण के अनुरूप नहीं है। इसी आधार पर रतनलाल सिंह परिहार को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर रक्षित केंद्र, भोपाल से संबद्ध किया गया है।
मामले की निष्पक्ष जांच के लिए मिसरोद के सहायक पुलिस आयुक्त को निर्देश दिए गए हैं कि वे वीडियो सहित सभी संबंधित तथ्यों की पड़ताल कर 15 दिन के भीतर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करें। जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की विभागीय और कानूनी कार्रवाई तय की जाएगी।
राज्य मंत्री नरेंद्र शिवाजी पटेल ने भी बताया कि मुख्यमंत्री मोहन यादव ने मामले का संज्ञान लिया है। उन्होंने कहा कि आदिवासी समुदाय का सम्मान महत्वपूर्ण है और जांच में यदि अन्य लोगों की भूमिका भी सामने आती है, तो उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जा सकती है।
‘जय जोहार’ को लेकर भी उठा विवाद
घटना से जुड़े वीडियो और सामने आई खबरों के अनुसार, प्रदर्शन के दौरान ‘जय जोहार’ अभिवादन को लेकर भी विवाद हुआ। ‘जय जोहार’ आदिवासी समुदाय में सम्मान और अभिवादन के तौर पर इस्तेमाल किया जाता है। वीडियो में कथित तौर पर इस्तेमाल की गई भाषा को लेकर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर भी प्रतिक्रिया सामने आई है।
मध्य प्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने घटना की निंदा करते हुए संबंधित पुलिसकर्मी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने और सख्त कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने कहा कि आदिवासी संस्कृति, पहचान और सम्मान से जुड़े प्रतीकों के प्रति संवेदनशीलता जरूरी है तथा वर्दी में तैनात अधिकारियों की जवाबदेही तय होनी चाहिए।
फिलहाल, थाना प्रभारी को निलंबित कर विभागीय जांच शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं। जांच पूरी होने के बाद ही घटना से जुड़े सभी तथ्यों और संबंधित लोगों की भूमिका स्पष्ट हो सकेगी।
