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भोपाल में विकसित भारत उद्योग व्यापार सम्मेलन, निवेश और औद्योगिक विकास पर मंथन; CM मोहन यादव ने कही ये बात

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भोपाल में विकसित भारत उद्योग व्यापार सम्मेलन, निवेश और औद्योगिक विकास पर मंथन; CM मोहन यादव ने कही ये बात

भोपाल। मध्य प्रदेश में औद्योगिक विकास को गति देने, निवेश की संभावनाओं को बढ़ाने और उद्योग-व्यापार जगत के बीच सहयोग मजबूत करने के उद्देश्य से राजधानी भोपाल में दो दिवसीय ‘विकसित भारत उद्योग व्यापार सम्मेलन 2026’ आयोजित किया जा रहा है। 22 और 23 अक्टूबर को आयोजित इस सम्मेलन में उद्योगपतियों, उद्यमियों और निवेशकों के साथ प्रदेश की औद्योगिक संभावनाओं, व्यापार विस्तार, रोजगार सृजन और निवेश के अनुकूल माहौल जैसे विषयों पर चर्चा की जा रही है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सोशल मीडिया पर कार्यक्रम की तस्वीरें साझा करते हुए कहा कि केंद्र और राज्य सरकार मिलकर मध्य प्रदेश के विकास को नई गति दे रही हैं।

मुख्यमंत्री ने अपनी पोस्ट में बताया कि भोपाल में आयोजित सम्मेलन के दौरान उद्योगपतियों एवं निवेशकों के साथ प्रदेश में औद्योगिक विकास और निवेश की संभावनाओं पर विचार-विमर्श किया गया। इस आयोजन का उद्देश्य मध्य प्रदेश की औद्योगिक क्षमताओं को सामने लाने के साथ देश के विभिन्न राज्यों के उद्योग संगठनों और व्यापारिक संस्थाओं के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करना है। सम्मेलन के माध्यम से प्रदेश में नए कारोबारी अवसरों और औद्योगिक साझेदारियों को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया जा रहा है।

क्या है विकसित भारत उद्योग व्यापार सम्मेलन का उद्देश्य?

विकसित भारत उद्योग व्यापार सम्मेलन का आयोजन फेडरेशन ऑफ मध्य प्रदेश चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (FMPCCI) की ओर से किया जा रहा है। इसका मकसद उद्योग एवं व्यापार संगठनों को एक मंच पर लाकर निवेश, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSME), निर्यात, नवाचार और औद्योगिक सहयोग से जुड़े मुद्दों पर चर्चा करना है। आयोजकों ने सम्मेलन में देश के 10 से 15 राज्यों के लगभग 400 उद्यमियों और उद्योग-व्यापार संगठनों के प्रतिनिधियों की भागीदारी की संभावना जताई थी। विदेशी कारोबारी प्रतिनिधियों की भागीदारी भी प्रस्तावित थी।

सम्मेलन के जरिए मध्य प्रदेश के उद्योगों को दूसरे राज्यों के कारोबारियों से जोड़ने, नए व्यावसायिक संपर्क विकसित करने और आपूर्ति शृंखला को मजबूत बनाने पर ध्यान दिया जा रहा है। इससे स्थानीय उद्योगों को नए बाजारों तक पहुंच बनाने, उत्पादों की बिक्री बढ़ाने और अन्य कंपनियों के साथ कारोबारी साझेदारी की संभावनाएं तलाशने का अवसर मिल सकता है। हालांकि, इस तरह के आयोजनों से वास्तविक लाभ कितना होगा, यह आगे होने वाले समझौतों, निवेश के क्रियान्वयन और उद्योगों की स्थापना पर निर्भर करेगा।

MSME, निर्यात और नई तकनीकों पर रहेगा जोर

सम्मेलन के कार्यक्रम में छोटे और मध्यम उद्योगों के लिए ऋण की उपलब्धता, निर्यात में सहयोग, खाद्य प्रसंस्करण, कृषि, वस्त्र, इंजीनियरिंग, ऊर्जा, पर्यटन और उभरती तकनीकों जैसे विषय शामिल हैं। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), रोबोटिक्स और इंडस्ट्री 4.0 जैसी आधुनिक तकनीकों को अपनाने के अवसरों पर भी चर्चा का प्रावधान है। इन क्षेत्रों में तकनीकी विकास और निवेश से उद्योगों की उत्पादन क्षमता बढ़ाने, लागत घटाने और उत्पादों को अधिक प्रतिस्पर्धी बनाने में मदद मिल सकती है।

मध्य प्रदेश में छोटे और मध्यम उद्योगों की भूमिका खास मानी जाती है, क्योंकि ये स्थानीय स्तर पर रोजगार, उत्पादन और व्यापारिक गतिविधियों को बढ़ाने में योगदान देते हैं। ऐसे उद्यमों को समय पर वित्तीय सहायता, आधुनिक तकनीक, प्रशिक्षित कर्मचारी और बड़े बाजारों तक पहुंच मिलना औद्योगिक विकास के लिए महत्वपूर्ण है। सम्मेलन में इन मुद्दों पर विचार-विमर्श से राज्य की औद्योगिक नीतियों और कारोबार के माहौल को बेहतर बनाने के लिए सुझाव सामने आने की उम्मीद है।

आयोजन से जुड़ी पूर्व जानकारी के अनुसार, सम्मेलन में विभिन्न राज्यों के उद्योग संगठनों से मिले सुझावों के आधार पर ‘भोपाल डिक्लेरेशन’ प्रस्तुत करने की योजना भी रखी गई थी। इसमें MSME विकास, रोजगार, निवेश, तकनीकी उन्नयन और निर्यात को बढ़ावा देने से जुड़े सुझाव शामिल किए जाने प्रस्तावित थे। इस तरह की पहल का महत्व तभी बढ़ेगा, जब संबंधित सुझावों को नीतिगत निर्णयों और जमीन पर लागू होने वाली योजनाओं में जगह मिलेगी।

मध्य प्रदेश में निवेश को लेकर सरकार का दावा

मध्य प्रदेश सरकार पिछले कुछ वर्षों से प्रदेश को उद्योग और निवेश के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित करने पर जोर दे रही है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की ओर से पहले दिए गए बयानों के मुताबिक, राज्य में पिछले ढाई वर्षों के दौरान विभिन्न क्षेत्रों में 34 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए थे। सरकार ने इनमें से 10 लाख करोड़ रुपये से अधिक के प्रस्तावों के जमीन पर उतरने का दावा भी किया था। निवेश प्रस्तावों और वास्तव में लागू हो चुकी परियोजनाओं के बीच अंतर होता है, इसलिए इन दोनों आंकड़ों को अलग-अलग समझना जरूरी है।

मुख्यमंत्री की वर्तमान सोशल मीडिया पोस्ट के उपलब्ध स्क्रीनशॉट में ‘प्रदेश में ढाई वर्षों में 12 लाख करोड़ रुपये के…’ वाला वाक्य अधूरा दिखाई देता है। इसके आगे का विवरण उपलब्ध न होने के कारण इस राशि का पूरा संदर्भ और यह किस प्रकार के निवेश या अन्य मद से संबंधित है, इसकी स्वतंत्र पुष्टि केवल स्क्रीनशॉट के आधार पर नहीं की जा सकती। इसलिए इस आंकड़े को बिना पूरे बयान या संबंधित आधिकारिक विवरण के किसी निश्चित निवेश उपलब्धि के रूप में प्रस्तुत करना उचित नहीं होगा।

निवेश के साथ रोजगार और परियोजनाओं के क्रियान्वयन की चुनौती

किसी भी राज्य में औद्योगिक विकास का मूल्यांकन केवल निवेश प्रस्तावों की संख्या या कुल राशि से नहीं होता। यह देखना भी जरूरी होता है कि कितनी परियोजनाओं को जमीन मिली, कितने उद्योगों में उत्पादन शुरू हुआ, कितना रोजगार पैदा हुआ और स्थानीय कारोबारियों को कितना लाभ पहुंचा। उद्योगों के लिए जमीन, बिजली, पानी, सड़क, परिवहन, कुशल कर्मचारियों और समय पर सरकारी मंजूरियों की उपलब्धता भी निवेश के निर्णयों को प्रभावित करती है।

मध्य प्रदेश के लिए चुनौती यह है कि निवेश को घोषणाओं और प्रस्तावों से आगे बढ़ाकर वास्तविक औद्योगिक गतिविधियों में बदला जाए। इसके साथ स्थानीय युवाओं को कौशल प्रशिक्षण, छोटे उद्यमों को वित्तीय सहायता और राज्य के उत्पादों को राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचाने के प्रयास भी जरूरी हैं। यदि उद्योगों की स्थापना और विस्तार के साथ रोजगार के अवसर बढ़ते हैं, तो इसका असर प्रदेश की अर्थव्यवस्था और स्थानीय कारोबार पर दिखाई दे सकता है।

भोपाल में आयोजित विकसित भारत उद्योग व्यापार सम्मेलन इसी दिशा में उद्योगपतियों, निवेशकों और व्यापारिक संगठनों को एक मंच पर लाने की पहल है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इसे प्रदेश के औद्योगिक विकास और निवेश की संभावनाओं पर चर्चा का अवसर बताया है। अब सम्मेलन में सामने आने वाले सुझावों, संभावित कारोबारी साझेदारियों और निवेश प्रस्तावों को आगे किस तरह लागू किया जाता है, इस पर राज्य के उद्योग जगत और निवेशकों की नजर रहेगी।

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