मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भारतीय निशानेबाज नीरू ढांडा को एशियन गेम्स 2026 में ऐतिहासिक प्रदर्शन करने पर बधाई दी है। नीरू ने जापान के आइची-नागोया में आयोजित एशियाई खेलों में महिला ट्रैप व्यक्तिगत स्पर्धा का स्वर्ण पदक जीतकर भारतीय निशानेबाजी के इतिहास में अपना नाम दर्ज कराया। वह इस स्पर्धा में एशियन गेम्स का व्यक्तिगत स्वर्ण पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला निशानेबाज बनीं। उनकी इस कामयाबी ने न केवल देश को गौरवान्वित किया, बल्कि मध्य प्रदेश राज्य शूटिंग अकादमी, भोपाल में उन्हें मिले प्रशिक्षण और खेल सुविधाओं की भूमिका को भी चर्चा में ला दिया है।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सोशल मीडिया पर साझा संदेश में नीरू ढांडा को उनकी ऐतिहासिक उपलब्धि के लिए शुभकामनाएं दीं। उन्होंने इस सफलता को देश की बेटियों और युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणादायक उपलब्धि बताया। नीरू की कामयाबी इसलिए भी खास है, क्योंकि उन्होंने सीमित संसाधनों से शुरुआत करने के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई और एशियाई खेलों जैसे बड़े मंच पर भारत के लिए स्वर्ण पदक हासिल किया।
नीरू ढांडा ने फाइनल में 28 अंक हासिल कर रचा इतिहास
एशियन गेम्स 2026 में महिला ट्रैप व्यक्तिगत स्पर्धा का फाइनल 29 सितंबर को जापान में खेला गया था। नीरू ढांडा ने दबाव के बीच शानदार निशानेबाजी करते हुए फाइनल में 28 हिट के साथ पहला स्थान हासिल किया। उन्होंने इस प्रदर्शन के साथ एशियाई खेलों का नया रिकॉर्ड भी बनाया। इससे पहले इस स्पर्धा का रिकॉर्ड 24 हिट का था। चीन की सुन युनोंग ने 26 हिट के साथ रजत पदक जीता, जबकि कुवैत की हाजर अब्दुलमलिक 21 हिट के साथ तीसरे स्थान पर रहीं।
नीरू ने फाइनल से पहले क्वालिफिकेशन राउंड में भी दमदार प्रदर्शन किया था। उन्होंने 125 में से 118 निशाने सही लगाकर शीर्ष स्थान हासिल किया और फाइनल में अपनी जगह पक्की की। इस प्रदर्शन ने दिखाया कि वह केवल फाइनल में ही नहीं, बल्कि प्रतियोगिता के शुरुआती दौर से ही पदक की मजबूत दावेदार थीं। निर्णायक मुकाबले में भी उन्होंने अपना संयम बनाए रखा और भारत के लिए स्वर्ण पदक जीत लिया।
इस उपलब्धि का महत्व सिर्फ एक स्वर्ण पदक तक सीमित नहीं है। एशियाई खेलों की महिला ट्रैप व्यक्तिगत स्पर्धा में इससे पहले किसी भारतीय महिला निशानेबाज ने स्वर्ण पदक नहीं जीता था। भारत ने पुरुष ट्रैप व्यक्तिगत स्पर्धा में 1978 में रणधीर सिंह के जरिए स्वर्ण पदक हासिल किया था। नीरू की जीत ने लगभग 48 साल बाद एशियाई खेलों में भारतीय निशानेबाजी को व्यक्तिगत ट्रैप का स्वर्ण दिलाया।
महिला टीम को रजत, मिक्स्ड टीम में भी भारत को स्वर्ण
नीरू ढांडा का एशियन गेम्स अभियान व्यक्तिगत स्वर्ण पदक तक ही सीमित नहीं रहा। उन्होंने महिला ट्रैप टीम स्पर्धा में आशिमा अहलावत और मनीषा कीर के साथ मिलकर भारत को रजत पदक दिलाने में भी अहम भूमिका निभाई। भारतीय टीम ने कुल 328 अंक हासिल किए। चीन की टीम 346 अंकों के साथ पहले स्थान पर रही, जबकि कुवैत ने 325 अंकों के साथ कांस्य पदक जीता।
इसके बाद 30 सितंबर को नीरू ने क्यानन चेनाई के साथ ट्रैप मिक्स्ड टीम स्पर्धा में भी स्वर्ण पदक जीता। भारतीय जोड़ी ने फाइनल में कुल 34 अंक हासिल किए और नया एशियन गेम्स रिकॉर्ड कायम किया। कतर को 32 अंकों के साथ रजत और चीन को 23 अंकों के साथ कांस्य पदक मिला। इस तरह नीरू ढांडा ने एशियाई खेलों में कुल तीन पदक अपने नाम किए। इनमें दो स्वर्ण और एक रजत पदक शामिल रहे।
एक ही प्रतियोगिता में अलग-अलग स्पर्धाओं में इस तरह का प्रदर्शन करना किसी भी खिलाड़ी के लिए बड़ी उपलब्धि है। व्यक्तिगत स्पर्धा में स्वर्ण जीतने के बाद मिक्स्ड टीम में भी शीर्ष स्थान हासिल करना नीरू की निरंतरता और दबाव में प्रदर्शन करने की क्षमता को दर्शाता है। महिला टीम स्पर्धा का रजत पदक भी भारतीय निशानेबाजी दल के लिए महत्वपूर्ण रहा।
हरियाणा के छोटे से गांव से अंतरराष्ट्रीय मंच तक का सफर
नीरू ढांडा हरियाणा के जींद जिले के संगतपुरा गांव की रहने वाली हैं। उनका शुरुआती सफर आसान नहीं था। उन्होंने शुरुआत में कबड्डी खेली, लेकिन अपने चचेरे भाई और ट्रैप निशानेबाज लक्ष्य श्योराण की उपलब्धियों से प्रेरित होकर शूटिंग को करियर बनाने का फैसला किया। लक्ष्य ने 2018 के एशियाई खेलों में ट्रैप स्पर्धा का रजत पदक जीता था। इसी उपलब्धि ने नीरू को निशानेबाजी की ओर आगे बढ़ने की प्रेरणा दी।
शुरुआती दौर में उनके पास आधुनिक उपकरणों और पेशेवर प्रशिक्षण की सुविधाएं नहीं थीं। परिवार के सहयोग से उन्होंने उपलब्ध संसाधनों के साथ अभ्यास शुरू किया। बाद में उन्होंने मध्य प्रदेश राज्य शूटिंग अकादमी, भोपाल में चयन के लिए प्रयास किया और वर्ष 2019 में यहां प्रशिक्षण से जुड़ीं। अकादमी में बेहतर खेल सुविधाओं, उपकरणों और प्रशिक्षकों के मार्गदर्शन ने उनके खेल को निखारने में मदद की। यहीं से उनके पेशेवर निशानेबाजी करियर को नई दिशा मिली।
नीरू की कहानी में मध्य प्रदेश की भूमिका महत्वपूर्ण है। हालांकि उनका संबंध हरियाणा के जींद जिले से है, लेकिन भोपाल स्थित मध्य प्रदेश राज्य शूटिंग अकादमी में मिले प्रशिक्षण ने उन्हें राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आगे बढ़ने का अवसर दिया। उनकी सफलता यह भी दिखाती है कि सही प्रशिक्षण, नियमित अभ्यास और परिवार के सहयोग से छोटे शहरों तथा गांवों से आने वाले खिलाड़ी भी दुनिया के बड़े खेल मंचों पर देश का प्रतिनिधित्व कर सकते हैं।
वर्ल्ड कप में भी गोल्ड जीत चुकी हैं नीरू
एशियन गेम्स में स्वर्ण पदक जीतने से पहले भी नीरू ढांडा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा साबित कर चुकी थीं। जुलाई 2026 में इटली के लोनाटो में आयोजित आईएसएसएफ शॉटगन वर्ल्ड कप में उन्होंने महिला ट्रैप स्पर्धा का स्वर्ण पदक जीता था। इस उपलब्धि के साथ वह महिला ट्रैप में आईएसएसएफ वर्ल्ड कप का स्वर्ण जीतने वाली पहली भारतीय महिला निशानेबाज बनी थीं। लगातार बड़े टूर्नामेंट में पदक जीतने से भारतीय निशानेबाजी में उनकी स्थिति मजबूत हुई है।
ट्रैप शूटिंग निशानेबाजी की एक ऐसी स्पर्धा है, जिसमें मशीन के जरिए हवा में लक्ष्य छोड़े जाते हैं और खिलाड़ी को अपनी सटीकता, प्रतिक्रिया और एकाग्रता के दम पर उन्हें निशाना बनाना होता है। इसमें तकनीक के साथ मानसिक मजबूती और दबाव में सही फैसला लेने की क्षमता भी जरूरी होती है। नीरू ने एशियन गेम्स के फाइनल में लगातार अच्छा प्रदर्शन करके इन गुणों का परिचय दिया।
मध्य प्रदेश की खेल सुविधाओं के लिए भी अहम उपलब्धि
नीरू ढांडा की सफलता मध्य प्रदेश में खेल प्रशिक्षण और निशानेबाजी सुविधाओं के महत्व को भी सामने लाती है। भोपाल की राज्य शूटिंग अकादमी में प्रशिक्षण लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचना उन युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा है, जो खेल को अपना करियर बनाना चाहते हैं। इस उपलब्धि से प्रदेश में निशानेबाजी को बढ़ावा देने और नई प्रतिभाओं को बेहतर अवसर उपलब्ध कराने की जरूरत पर भी ध्यान जाता है।
नीरू की उपलब्धि से यह संदेश मिलता है कि किसी खिलाड़ी की पहचान केवल उसके गृह राज्य से नहीं, बल्कि उसकी मेहनत, प्रशिक्षण और देश के लिए किए गए प्रदर्शन से भी बनती है। हरियाणा के जींद से निकलकर भोपाल में प्रशिक्षण लेने और फिर एशियाई खेलों में ऐतिहासिक स्वर्ण पदक जीतने तक का उनका सफर कई युवा खिलाड़ियों को आगे बढ़ने की प्रेरणा दे सकता है।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की ओर से दी गई बधाई के बीच नीरू ढांडा की उपलब्धि भारतीय खेल जगत के लिए गर्व का विषय है। एशियन गेम्स में व्यक्तिगत स्वर्ण, महिला टीम का रजत और मिक्स्ड टीम का स्वर्ण जीतकर उन्होंने अपने अभियान को यादगार बनाया। अब उनकी नजरें आने वाली अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं और भविष्य में ओलंपिक जैसे बड़े मंच पर भारत का प्रतिनिधित्व करने पर होंगी।
