खंडवा, मध्य प्रदेश: मध्य प्रदेश के खंडवा शहर में मां नवचंडी मेला ग्राउंड पर बुधवार, 21 अक्टूबर 2026 की रात भव्य रावण दहन का आयोजन किया गया। 81 फीट ऊंचे रावण के पुतले को अग्निबाण से जलाया गया। देखते ही देखते करीब 20 सेकंड में पुतला जलकर खाक हो गया। इससे पहले रात 8 बजे से शुरू हुई आतिशबाजी ने आसमान को रंग-बिरंगी रोशनी से भर दिया। रावण दहन देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग नवचंडी मंदिर और मेला ग्राउंड के आसपास जुटे।
स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, रावण दहन देखने के लिए नवचंडी मंदिर से लेकर मेला ग्राउंड तक करीब 50 हजार लोगों की मौजूदगी का अनुमान लगाया गया। शाम से ही लोगों का पहुंचना शुरू हो गया था। परिवारों के साथ पहुंचे श्रद्धालुओं ने आतिशबाजी और रावण दहन का आनंद लिया। जब रावण के पुतले पर अग्निबाण छोड़ा गया, तो मैदान में मौजूद लोगों ने जयकारों के साथ इस दृश्य का स्वागत किया। पूरे आयोजन में धार्मिक आस्था और उत्सव का माहौल देखने को मिला।
रात 8 बजे शुरू हुई आतिशबाजी, 9:40 बजे हुआ रावण दहन
नवचंडी मेला ग्राउंड पर आयोजित कार्यक्रम में सबसे पहले आतिशबाजी का सिलसिला शुरू हुआ। रात 8 बजे से आसमान में रंग-बिरंगी रोशनी बिखरने लगी। इसके बाद रात करीब 9:40 बजे 81 फीट ऊंचे रावण के पुतले पर अग्निबाण छोड़ा गया। आग लगते ही पुतले में तेजी से लपटें फैल गईं और करीब 20 सेकंड में वह जलकर नीचे आ गया। इस दौरान मैदान और आसपास मौजूद लोगों की निगाहें रावण के पुतले पर टिकी रहीं।
इस वर्ष खंडवा में रावण दहन का आयोजन कई वजहों से चर्चा में रहा। एक ओर दशहरे की तैयारियों पर बारिश और तेज हवाओं का असर पड़ा, वहीं दूसरी ओर नवचंडी मैदान में आयोजन की तारीख को लेकर प्रशासन और नवचंडी धाम के महंत बाबा गंगाराम के बीच पहले असहमति सामने आई थी। इसके बावजूद बुधवार रात यहां रावण दहन का कार्यक्रम आयोजित किया गया।
रावण दहन की तारीख को लेकर क्यों बनी थी असमंजस की स्थिति?
खंडवा में इस बार रावण दहन की तारीख को लेकर प्रशासन और नवचंडी धाम के महंत बाबा गंगाराम की अलग-अलग राय सामने आई थी। स्थानीय समाचार रिपोर्टों के अनुसार, प्रशासन सुरक्षा व्यवस्था और पुलिस बल की उपलब्धता को ध्यान में रखते हुए शहर के सभी स्थानों पर 20 अक्टूबर को ही रावण दहन कराना चाहता था। दूसरी ओर, नवचंडी धाम में महंत बाबा गंगाराम ने धार्मिक परंपरा और उदया तिथि के आधार पर 21 अक्टूबर को आयोजन करने की बात कही थी।
इस मुद्दे पर पुलिस कंट्रोल रूम में हुई बैठक में दोनों पक्षों के बीच सहमति नहीं बन सकी थी। महंत का कहना था कि नवचंडी धाम में नवरात्रि की पूर्णाहुति के बाद हवन-पूजन और भंडारे की परंपरा निभाई जाती है, जिसके बाद रावण दहन होता है। इसी धार्मिक विधान को ध्यान में रखते हुए उन्होंने बुधवार को आयोजन करने का निर्णय लिया। इस मतभेद के कारण शहर के अलग-अलग स्थानों पर रावण दहन के कार्यक्रम अलग-अलग तारीखों पर आयोजित होने की स्थिति बनी।
इसी बीच 20 अक्टूबर को हुई तेज बारिश और हवा ने खंडवा में दशहरे के कई आयोजनों की तैयारियों को प्रभावित किया। कुछ स्थानों पर रावण के पुतले भीग गए, जबकि कहीं तेज हवा के कारण पुतलों को नुकसान पहुंचा। मैदानों में कीचड़ और जलभराव की समस्या भी सामने आई। कुछ आयोजकों को कार्यक्रम स्थगित करना पड़ा, जबकि अन्य स्थानों पर पुतलों को दोबारा तैयार करने की कोशिश की गई। ऐसे हालात के बीच नवचंडी मैदान का आयोजन अगले दिन हुआ।
रावण दहन के दौरान मोबाइल की टॉर्च जलाकर जताया समर्थन
नवचंडी मैदान में इस बार रावण दहन के साथ एक और दृश्य चर्चा में रहा। कार्यक्रम के दौरान बड़ी संख्या में लोगों ने अपने मोबाइल फोन की टॉर्च जलाकर महंत बाबा गंगाराम के प्रति समर्थन जताया। मोबाइल की रोशनी से मैदान जगमगा उठा। स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार, नवचंडी मेले के आयोजन और व्यवस्थाओं को लेकर पिछले दो वर्षों से नगर निगम और महंत बाबा गंगाराम से जुड़े पक्षों के बीच अधिकारों को लेकर असहमति चर्चा में रही है। ऐसे में रावण दहन के दौरान लोगों की मौजूदगी और मोबाइल की टॉर्च जलाने के दृश्य को भी खास तौर पर देखा गया।
कार्यक्रम में भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस से जुड़े स्थानीय नेताओं ने भी मंच से संबोधन किया। वक्ताओं ने आयोजन के दौरान सामने आई कठिनाइयों और महंत बाबा गंगाराम के प्रयासों का जिक्र किया। कार्यक्रम में विधायक कंचन तनवे और शहर कांग्रेस अध्यक्ष प्रतिभा रघुवंशी सहित स्थानीय राजनीतिक हस्तियों की मौजूदगी की जानकारी भी सामने आई। हालांकि, आयोजन में आई मुश्किलों के लिए किसी विशेष व्यक्ति या संस्था को जिम्मेदार ठहराने वाले विस्तृत तथ्य सामने नहीं आए।
कार्यक्रम के दौरान महंत बाबा गंगाराम ने यादव परिवार के साथ अपने संबंधों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि यादव परिवार हमेशा उनके साथ रहा है और उन्हें किसी से कोई परेशानी नहीं है। मंच पर रामायण के प्रसंगों का वाचन भी किया गया। कार्यक्रम का संचालन प्रफुल्ल मंडलोई और लव जोशी ने किया।
आस्था और परंपरा के साथ संपन्न हुआ आयोजन
खंडवा के नवचंडी मेला ग्राउंड पर हुआ रावण दहन इस बार धार्मिक आयोजन के साथ-साथ तारीख को लेकर हुए मतभेद और मौसम की बाधाओं के कारण भी चर्चा में रहा। 81 फीट ऊंचे पुतले का दहन, आतिशबाजी और बड़ी संख्या में लोगों की मौजूदगी रात के प्रमुख आकर्षण रहे। रावण दहन की परंपरा बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश देती है। इसी प्रतीकात्मक महत्व के साथ नवचंडी मैदान में विजयादशमी का आयोजन संपन्न हुआ।
इस वर्ष की घटनाओं ने यह भी दिखाया कि बड़े सार्वजनिक और धार्मिक आयोजनों में मौसम, धार्मिक परंपराओं और सुरक्षा व्यवस्था के बीच समन्वय कितना महत्वपूर्ण है। ऐसे आयोजनों में आयोजकों, प्रशासन, पुलिस और श्रद्धालुओं के बीच बेहतर तालमेल से कार्यक्रम को सुरक्षित और व्यवस्थित तरीके से संपन्न कराने में मदद मिलती है।
