खरगोन। मध्य प्रदेश के खरगोन जिले के कसरावद में ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण को लेकर सवाल उठ रहे हैं। नगर के खरगोन मार्ग पर ऊंची पहाड़ी पर स्थित जिला पुरातत्व संग्रहालय परिसर में रखी प्राचीन प्रतिमाएं पर्याप्त रखरखाव और सुविधाओं के अभाव में धूप, धूल और मौसम की मार झेल रही हैं। इन बेशकीमती धरोहरों की स्थिति ने उनके संरक्षण और देखभाल को लेकर चिंता बढ़ा दी है।
कसरावद का जिला पुरातत्व संग्रहालय क्षेत्र के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व को समझने के लिए महत्वपूर्ण स्थान है। यहां संरक्षित प्राचीन पाषाण प्रतिमाएं उस दौर की कला, धार्मिक परंपराओं और शिल्पकौशल की झलक प्रस्तुत करती हैं। इसके बावजूद परिसर में कुछ प्रतिमाओं का खुले वातावरण में रखा होना उनके दीर्घकालीन संरक्षण के लिहाज से चिंता का विषय है।
संग्रहालय की धरोहरों में नर्मदा क्षेत्र के जलमग्नता प्रभावित इलाकों से एकत्र की गई प्राचीन गणेश प्रतिमाएं भी शामिल हैं। सितंबर 2026 में प्रकाशित एक रिपोर्ट के मुताबिक, यहां लगभग 10 ऐतिहासिक गणेश प्रतिमाएं मौजूद हैं, जिन्हें 10वीं और 11वीं शताब्दी के आसपास का तथा परमारकालीन शिल्प परंपरा से संबंधित माना जाता है। इन प्रतिमाओं में गणेश जी के विभिन्न स्वरूप देखने को मिलते हैं। पत्थरों पर की गई बारीक नक्काशी और कलात्मक आकृतियां उस समय के मूर्तिकारों की कला को दर्शाती हैं।
ऐतिहासिक प्रतिमाओं को लंबे समय तक खुले वातावरण में रखने से उन पर प्राकृतिक क्षरण का प्रभाव पड़ सकता है। धूप, बारिश, धूल और मौसम में बदलाव के कारण पत्थर की सतह तथा बारीक नक्काशी प्रभावित होने का खतरा रहता है। ऐसे में प्रतिमाओं की नियमित देखभाल, उनकी मौजूदा स्थिति का तकनीकी आकलन और वैज्ञानिक तरीके से संरक्षण जरूरी माना जाता है।
संग्रहालय की बदहाल व्यवस्थाओं को लेकर पहले भी स्थानीय स्तर पर सवाल उठाए जा चुके हैं। भवन की मरम्मत, क्षतिग्रस्त शेड को दुरुस्त करने, प्रतिमाओं के वैज्ञानिक संरक्षण और पर्यटकों के लिए बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग सामने आई है। संग्रहालय तक पहुंचने वाले मार्ग, रोशनी, पानी और बिजली जैसी व्यवस्थाओं में सुधार की जरूरत भी बताई गई है।
स्थानीय लोगों की अपेक्षा है कि संबंधित विभाग इस ऐतिहासिक स्थल की स्थिति पर गंभीरता से ध्यान दे। प्रतिमाओं को सुरक्षित रखने के लिए उपयुक्त संरक्षित स्थान, व्यवस्थित प्रदर्शन व्यवस्था और उनकी ऐतिहासिक पृष्ठभूमि बताने वाले सूचना-पट लगाए जाने से संग्रहालय की उपयोगिता बढ़ सकती है। इससे विद्यार्थियों, शोधकर्ताओं और इतिहास में रुचि रखने वाले पर्यटकों को भी लाभ मिलेगा।
कसरावद की प्राचीन प्रतिमाएं केवल पत्थर की कलाकृतियां नहीं, बल्कि क्षेत्र के अतीत और सांस्कृतिक विरासत की महत्वपूर्ण निशानी हैं। ऐसे में इनके संरक्षण को प्राथमिकता देना जरूरी है, ताकि आने वाली पीढ़ियां भी इस ऐतिहासिक धरोहर को सुरक्षित देख सकें। फिलहाल, संग्रहालय की मौजूदा व्यवस्थाओं में सुधार और प्रतिमाओं के संरक्षण को लेकर संबंधित विभाग की ओर से किसी ताजा आधिकारिक कार्रवाई की पुष्टि उपलब्ध नहीं है।
