मंदसौर: मध्य प्रदेश के मंदसौर जिले में मादक पदार्थों की अवैध तस्करी के खिलाफ कार्रवाई करते हुए सीतामऊ पुलिस ने 48 वर्षीय आजाद पठान को एक साल के लिए निरुद्ध किया है। सीतामऊ थाना क्षेत्र के लदुना गांव निवासी आजाद पिता शेरुखान पठान को Prevention of Illicit Traffic in Narcotic Drugs and Psychotropic Substances Act, 1988 (PIT-NDPS Act) की धारा 3(1) के तहत केंद्रीय जेल इंदौर में निरुद्ध किया गया है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, यह कार्रवाई उज्जैन संभाग आयुक्त के आदेश पर मंदसौर पुलिस अधीक्षक विनोद कुमार मीणा के निर्देशानुसार की गई।
इस कार्रवाई में PIT-NDPS एक्ट की धारा 3(1) महत्वपूर्ण है। यह कानून नशीले पदार्थों और मन:प्रभावी पदार्थों की अवैध तस्करी को रोकने के उद्देश्य से बनाया गया है। इसके तहत निर्धारित कानूनी शर्तें पूरी होने और सक्षम प्राधिकारी की संतुष्टि के बाद किसी व्यक्ति को भविष्य में ऐसी गतिविधियों में शामिल होने से रोकने के लिए निवारक निरोध का आदेश जारी किया जा सकता है। इस प्रावधान का उद्देश्य केवल पहले से हो चुके अपराध पर कार्रवाई करना नहीं, बल्कि अवैध मादक पदार्थों के कारोबार को आगे बढ़ने से रोकना भी है।
सामान्य NDPS कार्रवाई से कैसे अलग है यह कदम? नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस एक्ट, 1985 के तहत मादक पदार्थों से जुड़े अपराधों की जांच और अभियोजन की कार्रवाई की जा सकती है। इसके विपरीत, PIT-NDPS एक्ट, 1988 निवारक निरोध के लिए अलग कानूनी व्यवस्था प्रदान करता है। इसका इस्तेमाल ऐसे मामलों में किया जा सकता है, जहां संबंधित प्राधिकारी को उपलब्ध तथ्यों के आधार पर अवैध मादक पदार्थों की तस्करी रोकने के लिए निरोध आवश्यक लगता है। इस तरह की कार्रवाई अपने आप में अदालत से दोषसिद्धि होने का प्रमाण नहीं होती।
मंदसौर पुलिस की इस कार्रवाई को जिले में मादक पदार्थों की अवैध तस्करी पर अंकुश लगाने के प्रयास के रूप में देखा जा सकता है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में आजाद पठान के खिलाफ दर्ज मामलों की संख्या, मादक पदार्थों की किसी विशिष्ट बरामदगी, कथित तस्करी नेटवर्क या निरोध आदेश के विस्तृत आधार का उल्लेख नहीं है। इसलिए इन पहलुओं के बारे में किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा।
फिलहाल उपलब्ध सूचना के मुताबिक, आजाद पठान को PIT-NDPS एक्ट की धारा 3(1) के तहत एक वर्ष के लिए केंद्रीय जेल इंदौर में निरुद्ध करने की कार्रवाई की गई है। इस मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया और संबंधित प्राधिकारी के आदेशों से जुड़े अतिरिक्त विवरण सामने आने पर कार्रवाई के अन्य पहलुओं की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
