आंध्र प्रदेश में नगर निकाय चुनावों को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। काकीनाडा जिले के पिथापुरम, सामर्लकोट, तुनि और गोल्लप्रोलु नगरपालिकाओं में चेयरपर्सन पद के आरक्षण और उम्मीदवारों के चयन को लेकर राजनीतिक दलों की तैयारियां निर्णायक दौर में पहुंच रही हैं। कहीं आरक्षित श्रेणी के अनुसार उम्मीदवार तलाशे जा रहे हैं, तो कहीं गठबंधन के भीतर टिकट बंटवारे को लेकर हलचल है। इस बीच जनसेना ने तुनि में चेयरपर्सन पद के लिए मल्ला मीनाक्षी के नाम की घोषणा की है, जबकि गोल्लप्रोलु में वार्ड सदस्य के पदों के लिए नामांकन भी शुरू हो चुके हैं।
राज्य में शहरी स्थानीय निकाय चुनावों की प्रक्रिया शुरू हो गई है। घोषित कार्यक्रम के अनुसार मतदान 28 अक्टूबर 2026 को होगा, जबकि मतगणना 30 अक्टूबर को निर्धारित है। ऐसे में उम्मीदवारों के चयन, आरक्षण के अनुसार पात्रता और चुनावी रणनीति को लेकर राजनीतिक दलों के सामने समय कम है।
चार नगरपालिकाओं में चेयरपर्सन पद का आरक्षण क्या है?
नगरपालिका चेयरपर्सन पदों के लिए जारी आरक्षण सूची के मुताबिक पिथापुरम और सामर्लकोट में पद अनुसूचित जाति (एससी) की सामान्य श्रेणी के लिए आरक्षित है। तुनि में चेयरपर्सन का पद पिछड़ा वर्ग (बीसी) की महिला उम्मीदवार के लिए निर्धारित किया गया है। वहीं, गोल्लप्रोलु में यह पद अनारक्षित रखा गया है। इन चारों नगरपालिकाओं में आरक्षण की अलग-अलग व्यवस्था होने से उम्मीदवारों के चयन और पार्टियों की रणनीति पर सीधा असर पड़ रहा है।
पिथापुरम और सामर्लकोट में एससी सामान्य आरक्षण का अर्थ है कि निर्धारित श्रेणी की पात्रता रखने वाले उम्मीदवार पद के लिए चुनाव लड़ सकते हैं। यह महिला आरक्षण नहीं है। इसके विपरीत, तुनि में बीसी महिला आरक्षण के कारण चेयरपर्सन पद के लिए संबंधित आरक्षित वर्ग की पात्र महिला उम्मीदवार ही चुनाव लड़ सकती है। गोल्लप्रोलु में चेयरपर्सन पद अनारक्षित होने के कारण किसी विशेष जाति या महिला वर्ग के लिए अलग आरक्षण की बाध्यता नहीं है। हालांकि, सभी उम्मीदवारों को चुनाव संबंधी अन्य कानूनी शर्तें पूरी करनी होंगी।
यहां यह समझना भी जरूरी है कि चेयरपर्सन पद का आरक्षण और नगरपालिका के अलग-अलग वार्डों का आरक्षण दो अलग व्यवस्थाएं हैं। किसी नगरपालिका का चेयरपर्सन पद एससी या बीसी वर्ग के लिए आरक्षित होने का अर्थ यह नहीं है कि उसके सभी वार्ड भी उसी श्रेणी के लिए आरक्षित होंगे। पार्षद पदों के लिए संबंधित वार्ड की आरक्षण सूची अलग से लागू होती है।
आंध्र प्रदेश सरकार ने 12 अक्टूबर 2026 को गजट अधिसूचना संख्या 448 के माध्यम से 106 नगरपालिकाओं और नगर पंचायतों के चेयरपर्सन पदों के आरक्षण का विवरण जारी किया था। राज्य स्तर पर इनमें अनुसूचित जनजाति (एसटी) के लिए तीन, अनुसूचित जाति के लिए 14 और पिछड़ा वर्ग के लिए 36 पद निर्धारित किए गए हैं। इसके अलावा 27 पद सामान्य महिला श्रेणी और 26 पद अनारक्षित श्रेणी में रखे गए हैं। इसी सूची में पिथापुरम, सामर्लकोट, तुनि और गोल्लप्रोलु की आरक्षण स्थिति स्पष्ट हुई।
तुनि में जनसेना ने मल्ला मीनाक्षी को बनाया उम्मीदवार
तुनि नगरपालिका के चेयरपर्सन पद को लेकर गठबंधन की राजनीति में भी अहम घटनाक्रम सामने आया है। स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, सत्तारूढ़ गठबंधन के सीट बंटवारे में यह पद जनसेना के हिस्से में आया है। पार्टी ने मल्ला मीनाक्षी को अपना चेयरपर्सन उम्मीदवार घोषित किया है। वह मल्ला गणेश की पत्नी हैं, जिनके हाल में तेलुगु देशम पार्टी (टीडीपी) छोड़कर जनसेना में शामिल होने की खबर सामने आई थी।
तुनि में चेयरपर्सन का पद बीसी महिला के लिए आरक्षित होने के कारण उम्मीदवार की आरक्षण संबंधी पात्रता महत्वपूर्ण होगी। पार्टी के उम्मीदवार घोषित करने के बाद अब नामांकन प्रक्रिया और उसकी जांच पर नजर रहेगी। अंतिम चुनावी मुकाबले की स्थिति नामांकन पत्रों की जांच और नाम वापस लेने की समयसीमा पूरी होने के बाद अधिक स्पष्ट होगी।
तुनि में यह चुनाव गठबंधन के घटक दलों के बीच स्थानीय राजनीतिक संतुलन की भी परीक्षा होगा। टिकट वितरण के दौरान पार्टी कार्यकर्ताओं की अपेक्षाओं, स्थानीय नेताओं के प्रभाव और वार्ड स्तर पर संगठन की स्थिति का असर चुनाव प्रचार पर पड़ सकता है। हालांकि, केवल उम्मीदवार की घोषणा के आधार पर किसी दल की जीत या हार का अनुमान लगाना अभी जल्दबाजी होगी।
पिथापुरम में आरक्षण के बाद उम्मीदवार चयन पर नजर
पिथापुरम नगरपालिका में चेयरपर्सन का पद एससी सामान्य श्रेणी के लिए आरक्षित होने के बाद राजनीतिक दलों के सामने पात्र उम्मीदवार तय करने की चुनौती है। इससे पहले जनसेना की वरिष्ठ नेता और अधिवक्ता कमिशेट्टी सत्यवेणी चेयरपर्सन पद के लिए अपनी दावेदारी सार्वजनिक कर चुकी थीं। लेकिन आरक्षण की अंतिम अधिसूचना के बाद किसी भी दावेदार की उम्मीदवारी का आकलन संबंधित पात्रता और पार्टी की आधिकारिक घोषणा के आधार पर ही किया जा सकता है। केवल पहले दावेदारी जताने से किसी उम्मीदवार का नाम अंतिम सूची में शामिल होना तय नहीं होता।
दूसरी ओर, वाईएसआर कांग्रेस पार्टी भी पिथापुरम में स्थानीय निकाय चुनावों की तैयारी में जुटी है। पार्टी की स्थानीय प्रभारी वंगा गीता विश्वनाथ ने अक्टूबर के पहले सप्ताह में कार्यकर्ताओं और नेताओं से सभी सीटों पर मुकाबले के लिए तैयार रहने का आह्वान किया था। इससे संकेत मिलता है कि मुकाबला केवल चेयरपर्सन पद तक सीमित नहीं रहने वाला, बल्कि वार्ड स्तर पर भी राजनीतिक दल अपनी ताकत दिखाने की कोशिश करेंगे।
अब पिथापुरम में उम्मीदवारों की पात्रता, पार्टी के भीतर सहमति और वार्डों में संभावित जीत की स्थिति महत्वपूर्ण होगी। एससी सामान्य आरक्षण होने के कारण चेयरपर्सन पद के लिए संबंधित श्रेणी की पात्रता पूरी करना अनिवार्य है। अंतिम उम्मीदवारों की स्थिति नामांकन पत्रों की जांच और चुनाव आयोग की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।
सामर्लकोट में चेयरपर्सन टिकट को लेकर टीडीपी के भीतर नाराजगी
सामर्लकोट नगरपालिका में चेयरपर्सन का पद एससी सामान्य श्रेणी के लिए आरक्षित है। इसके बावजूद स्थानीय स्तर पर राजनीतिक दलों के टिकट वितरण को लेकर विवाद सामने आया है। 16 अक्टूबर को टीडीपी के कुछ दलित नेताओं ने पार्टी से चेयरपर्सन पद का उम्मीदवार दलित समुदाय से चुनने की मांग को लेकर प्रदर्शन किया। स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार, प्रदर्शन के दौरान सड़क पर धरना दिया गया, जिससे यातायात प्रभावित हुआ। इसी घटनाक्रम में एक पार्टी कार्यकर्ता द्वारा आत्मदाह की कोशिश किए जाने की भी खबर आई।
इस घटना ने सामर्लकोट में उम्मीदवार चयन और पार्टी के अंदर प्रतिनिधित्व को लेकर चल रही बहस को सामने ला दिया है। यहां आरक्षण की श्रेणी पहले से निर्धारित है, लेकिन राजनीतिक दल के भीतर किस पात्र व्यक्ति को टिकट मिलेगा, यह अलग सवाल है। आरक्षित पद पर चुनाव लड़ने की कानूनी पात्रता और पार्टी का टिकट मिलना एक ही बात नहीं है। इस वजह से उम्मीदवार चयन के दौरान स्थानीय नेतृत्व और कार्यकर्ताओं के बीच सहमति बनाना दलों के लिए महत्वपूर्ण होगा।
सामर्लकोट में अब यह देखना होगा कि टीडीपी अपने स्थानीय नेताओं की मांगों पर क्या रुख अपनाती है और अन्य दल किन उम्मीदवारों को मैदान में उतारते हैं। नामांकन प्रक्रिया पूरी होने तक उम्मीदवारों को लेकर स्थिति में बदलाव की संभावना बनी रहेगी।
गोल्लप्रोलु में वार्ड स्तर पर नामांकन शुरू
गोल्लप्रोलु नगरपालिका में चेयरपर्सन का पद अनारक्षित श्रेणी में है। इस व्यवस्था के कारण किसी खास जाति या महिला वर्ग के लिए चेयरपर्सन पद पर अलग आरक्षण लागू नहीं है। ऐसे में राजनीतिक दलों के लिए उम्मीदवार चुनते समय स्थानीय जनाधार, संगठनात्मक ताकत और चुनावी समीकरण महत्वपूर्ण हो सकते हैं।
गोल्लप्रोलु में वार्ड सदस्य के पदों के लिए नामांकन से जुड़ी गतिविधियां भी सामने आई हैं। स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार, जनसेना की ज्योतुला श्री तुलसी ने वार्ड संख्या 18 से नामांकन दाखिल किया। वार्ड संख्या 7 से नधीपा रामकृष्ण और वार्ड संख्या 17 से गुणबत्तुला रामबाबू के नामांकन की भी खबर है। ये वार्ड स्तर के उम्मीदवार हैं; इन्हें नगरपालिका चेयरपर्सन पद के उम्मीदवारों के रूप में नहीं समझना चाहिए।
गोल्लप्रोलु में अनारक्षित चेयरपर्सन पद के कारण विभिन्न वर्गों के पात्र उम्मीदवारों के लिए चुनाव लड़ने का रास्ता खुला है। हालांकि, आरक्षण की स्थिति अपने आप किसी पार्टी को जीत की बढ़त नहीं देती। अंतिम परिणाम वार्डों में उम्मीदवारों की स्थिति, स्थानीय मुद्दों, मतदाताओं के रुझान और राजनीतिक दलों के प्रचार पर निर्भर करेगा।
28 अक्टूबर को मतदान, 30 अक्टूबर को मतगणना
आंध्र प्रदेश राज्य निर्वाचन आयोग की घोषित समय-सारणी के अनुसार शहरी स्थानीय निकाय चुनावों के लिए नामांकन 16 अक्टूबर से शुरू हुए हैं। नामांकन दाखिल करने की अंतिम तारीख 18 अक्टूबर है। नामांकन पत्रों की जांच 19 अक्टूबर को होगी, जबकि उम्मीदवार 21 अक्टूबर तक नाम वापस ले सकेंगे। इसके बाद चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों की अंतिम सूची सामने आएगी। मतदान 28 अक्टूबर और मतगणना 30 अक्टूबर को निर्धारित है।
राज्य में इस चरण के चुनाव 100 शहरी स्थानीय निकायों के लिए निर्धारित किए गए हैं। इनमें नगर निगम, नगरपालिकाएं और नगर पंचायतें शामिल हैं। अन्य 23 शहरी स्थानीय निकायों के चुनाव कानूनी मामलों के कारण फिलहाल अलग रखे गए हैं। इसलिए आरक्षण की राज्यव्यापी सूची और मौजूदा चरण में मतदान करने वाले निकायों की संख्या को एक ही नहीं समझना चाहिए।
काकीनाडा जिले में चुनाव तैयारियों को लेकर प्रशासन भी सक्रिय है। जिला कलेक्टर एम.एन. हरेंधिर प्रसाद ने 16 अक्टूबर को पिथापुरम, गोल्लप्रोलु, पेद्दापुरम और सामर्लकोट नगरपालिकाओं में चुनावी व्यवस्थाओं का निरीक्षण किया। इस दौरान मतदान सामग्री वितरण, सामग्री जमा करने, मतगणना केंद्रों और स्ट्रॉन्ग रूम की तैयारियों की समीक्षा की गई। अधिकारियों को चुनाव प्रक्रिया पारदर्शी, निष्पक्ष और शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न कराने के निर्देश दिए गए।
कुल मिलाकर, पिथापुरम, सामर्लकोट, तुनि और गोल्लप्रोलु में चेयरपर्सन पदों का आरक्षण अलग-अलग होने से उम्मीदवार चयन की दिशा स्पष्ट हुई है, लेकिन चुनावी मुकाबले की पूरी तस्वीर अभी बननी बाकी है। तुनि में जनसेना की ओर से मल्ला मीनाक्षी के नाम की घोषणा, सामर्लकोट में टिकट वितरण को लेकर असंतोष और गोल्लप्रोलु में वार्ड स्तर पर नामांकन जैसी घटनाएं स्थानीय राजनीति की अहम कड़ियां हैं। 18 अक्टूबर तक नामांकन, 19 अक्टूबर को जांच और 21 अक्टूबर को नाम वापसी की प्रक्रिया पूरी होने के बाद पता चलेगा कि इन नगरपालिकाओं में चेयरपर्सन पद के लिए कौन-कौन उम्मीदवार मैदान में बने रहते हैं। इसके बाद 28 अक्टूबर के मतदान और 30 अक्टूबर की मतगणना पर सभी की नजर रहेगी।
