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गुमला भारतमाला प्रोजेक्ट फायरिंग मामले में दो संदिग्ध गिरफ्तार, रांची में पुलिस से मुठभेड़ के दौरान एक को लगी गोली

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गुमला भारतमाला प्रोजेक्ट फायरिंग मामले में दो संदिग्ध गिरफ्तार, रांची में पुलिस से मुठभेड़ के दौरान एक को लगी गोली

झारखंड के गुमला जिले में भारतमाला परियोजना के तहत बन रहे पुल के निर्माण स्थल पर हुई गोलीबारी के मामले में पुलिस को अहम सफलता मिली है। राहुल सिंह गिरोह से जुड़े दो संदिग्धों को रांची में पुलिस के साथ मुठभेड़ के बाद गिरफ्तार किया गया है। कार्रवाई के दौरान एक आरोपी के पैर में गोली लगी, जिसके बाद उसे इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया। पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार आरोपियों की कथित भूमिका गुमला के निर्माण स्थल पर हुई फायरिंग समेत अन्य आपराधिक घटनाओं में भी जांच के दायरे में है।

यह मामला 24 अक्टूबर 2026 को गुमला के खटवा नदी के पास भारतमाला परियोजना के अंतर्गत चल रहे पुल निर्माण कार्यस्थल पर हुई गोलीबारी से जुड़ा है। घटना के दौरान निर्माण कार्य में लगे एक कर्मचारी के घायल होने की सूचना सामने आई थी। इसके बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू की और आरोपियों की पहचान करने के लिए कार्रवाई तेज कर दी। 27 अक्टूबर को रांची के नयासराय इलाके में हुई पुलिस कार्रवाई के बाद दो संदिग्धों की गिरफ्तारी की जानकारी सामने आई।

खटवा नदी के पास निर्माण स्थल पर हुई थी गोलीबारी

जानकारी के मुताबिक, 24 अक्टूबर की शाम गुमला सदर थाना क्षेत्र में खटवा नदी के समीप भारतमाला परियोजना के तहत बन रहे खरका ब्रिज के निर्माण स्थल पर हथियारबंद लोग पहुंचे थे। आरोप है कि उन्होंने वहां कई राउंड गोलियां चलाईं और निर्माण कार्य बंद करने की धमकी देकर मौके से फरार हो गए। अचानक हुई गोलीबारी के कारण निर्माण स्थल पर मौजूद कर्मचारियों के बीच अफरा-तफरी मच गई।

इस घटना में उत्तर प्रदेश के सहारनपुर निवासी निर्माण कर्मचारी मोहम्मद सलीम घायल हो गए। रिपोर्टों के अनुसार, गोली उनकी जांघ को छूते हुए निकल गई थी। घटना के बाद उन्हें गुमला सदर अस्पताल ले जाया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद छुट्टी दे दी गई। शुरुआती खबरों में हमलावरों की संख्या को लेकर अलग-अलग जानकारी सामने आई थी। हालांकि, इस बात पर सहमति है कि निर्माण स्थल पर गोलीबारी हुई और एक कर्मचारी घायल हुआ।

घटना के बाद सोशल मीडिया पर राहुल सिंह गिरोह के नाम से हमले की जिम्मेदारी लेने का दावा किए जाने की खबरें भी सामने आईं। कथित संदेश में निर्माण कार्य बंद करने की धमकी दिए जाने की बात कही गई थी। हालांकि, इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए गोलीबारी के पीछे गिरोह की वास्तविक भूमिका और घटना के उद्देश्य को पुलिस जांच के निष्कर्षों के आधार पर ही तय किया जा सकता है।

निर्माण कार्य करा रही शिवालया कंस्ट्रक्शन के पदाधिकारी जीपी शुक्ला ने कर्मचारी के घायल होने की पुष्टि की थी। प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने बताया कि कंपनी से अब तक लेवी या किसी अन्य तरह की मांग को लेकर संपर्क नहीं किया गया था। ऐसे में घटना के पीछे रंगदारी वसूली का मकसद होने की बात की भी अभी पुष्टि नहीं हुई है। पुलिस के लिए यह पता लगाना महत्वपूर्ण है कि हमला निर्माण कार्य रोकने के उद्देश्य से किया गया था या इसके पीछे कोई अन्य वजह थी।

रांची के नयासराय में पुलिस और संदिग्धों के बीच मुठभेड़

गुमला में फायरिंग की घटना के बाद राहुल सिंह गिरोह से जुड़े संदिग्धों की तलाश के बीच रांची पुलिस ने 27 अक्टूबर को कार्रवाई की। पुलिस के अनुसार, संदिग्धों की गतिविधियों के बारे में सूचना मिलने पर टीम ने उनकी तलाश शुरू की। इसी दौरान रांची के नयासराय इलाके में पुलिस और संदिग्धों के बीच मुठभेड़ हो गई। पुलिस का कहना है कि आरोपियों ने रुकने के बजाय गोलीबारी की, जिसके जवाब में आत्मरक्षा में कार्रवाई की गई। इस दौरान एक संदिग्ध के पैर में गोली लग गई।

मुठभेड़ के बाद पुलिस ने दोनों आरोपियों को पकड़ लिया। घायल आरोपी की पहचान शाहिद अंसारी के रूप में बताई गई है, जबकि दूसरे आरोपी का नाम शमशाद बताया गया है। शाहिद को इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया। गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने दोनों के कब्जे से दो पिस्टल और कारतूस बरामद किए जाने की जानकारी दी। बरामद हथियारों की जांच और उनका अन्य आपराधिक घटनाओं से संभावित संबंध भी मामले की जांच का हिस्सा है।

पुलिस के मुताबिक, दोनों संदिग्धों का नाम रांची के कांके थाना क्षेत्र में रिंग रोड के पास एक पेट्रोल पंप पर हुई गोलीबारी की जांच में भी सामने आया है। इसके अलावा गुमला जिले में शिवालया कंस्ट्रक्शन के निर्माण स्थल पर हुई फायरिंग से उनके कथित संबंध की पड़ताल की जा रही है। कुछ रिपोर्टों में बेड़ो क्षेत्र के लूटकांड समेत अन्य आपराधिक मामलों में भी उनकी भूमिका की जांच किए जाने की बात कही गई है। हालांकि, इन मामलों में उनकी संलिप्तता को अभी आरोप और जांच के विषय के रूप में ही देखा जाना चाहिए। गिरफ्तारी अपने आप में किसी अपराध में दोष सिद्ध होने का प्रमाण नहीं है।

गिरोह के अन्य सदस्यों और फायरिंग के मकसद की जांच

गुमला की घटना ने निर्माण स्थलों पर काम कर रहे कर्मचारियों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ाई है। सड़क और पुल निर्माण जैसे बड़े बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के कामकाज में हिंसा या धमकी की घटनाएं सामने आने पर कर्मचारियों की सुरक्षा के साथ-साथ निर्माण कार्य की निरंतरता भी प्रभावित हो सकती है। इस मामले में पुलिस के सामने हमलावरों की पहचान, घटना की योजना बनाने वालों का पता लगाने और कथित धमकी की वास्तविकता की जांच करने जैसी चुनौतियां हैं।

फिलहाल जांच का एक प्रमुख पहलू यह है कि रांची में पकड़े गए दोनों संदिग्धों का गुमला की फायरिंग से क्या संबंध था और घटना में उनकी भूमिका किस स्तर तक थी। पुलिस गिरोह से जुड़े अन्य लोगों की संभावित संलिप्तता की भी जांच कर रही है। सोशल मीडिया पर जिम्मेदारी लेने के दावे, निर्माण कार्य बंद करने की कथित धमकी और लेवी की मांग से जुड़े पहलुओं का भी सत्यापन आवश्यक है।

मामले में आगे की कार्रवाई पूछताछ, उपलब्ध साक्ष्यों, बरामद हथियारों और संबंधित घटनाओं के रिकॉर्ड की जांच पर निर्भर करेगी। पुलिस जांच पूरी होने और आधिकारिक जानकारी सामने आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि भारतमाला परियोजना के निर्माण स्थल पर गोलीबारी की योजना किसने बनाई थी और इसका वास्तविक उद्देश्य क्या था।

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