मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने नशा मुक्ति अभियान को सफल बनाने के लिए सरकार और समाज की संयुक्त भागीदारी को जरूरी बताया है। बड़वानी जिले के आदिवासी अंचल में नशे के खिलाफ चलाए जा रहे जागरूकता प्रयासों की सराहना करते हुए उन्होंने शिव पंथ सत्संग और गायत्री परिवार के कार्यों को सामाजिक बदलाव की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताया। मुख्यमंत्री ने कहा कि नशे जैसी सामाजिक बुराई से निपटने के लिए सामूहिक प्रयास आवश्यक हैं।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव सोमवार, 26 अक्टूबर 2026 को बड़वानी जिले के दौरे पर रहे। शरद पूर्णिमा के अवसर पर उन्होंने जिले के आदिवासी क्षेत्र में समय बिताया और नशा मुक्ति अभियान से जुड़े प्रयासों की जानकारी ली। उन्होंने इस बात पर प्रसन्नता जताई कि शिव पंथ समुदाय नशे के दुष्प्रभावों के प्रति लोगों को जागरूक करने और समाज सुधार के लिए सक्रिय भूमिका निभा रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार और समाज के सहयोग से चलने वाले ऐसे अभियान बेहद जरूरी हैं। नशे के खिलाफ जागरूकता बढ़ाना केवल प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि परिवारों, सामाजिक संगठनों, धार्मिक संस्थाओं और आम नागरिकों की भी इसमें महत्वपूर्ण भूमिका है। उनके मुताबिक, समुदाय की भागीदारी से लोगों को नशे के नुकसान समझाने और सकारात्मक बदलाव के लिए प्रेरित करने में मदद मिल सकती है।
आदिवासी अंचल में नशा मुक्ति अभियान पर जोर
बड़वानी जिले के अजगरिया क्षेत्र में शरद पूर्णिमा की शाम शिव पंथ सत्संग की ओर से नशा मुक्ति अभियान आयोजित किया गया। मुख्यमंत्री ने इस पहल की सराहना करते हुए इसे सामाजिक सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया। आदिवासी क्षेत्रों में स्थानीय समुदायों के सहयोग से चलाए जाने वाले जागरूकता कार्यक्रम लोगों तक सामाजिक संदेश पहुंचाने का एक माध्यम बन सकते हैं।
नशे की समस्या का असर केवल व्यक्ति के स्वास्थ्य तक सीमित नहीं रहता। इसके कारण पारिवारिक तनाव, आर्थिक परेशानियां, कामकाज पर प्रतिकूल प्रभाव और सामाजिक संबंधों में भी समस्याएं पैदा हो सकती हैं। युवाओं में नशे की बढ़ती प्रवृत्ति को रोकने के लिए समय रहते जागरूकता, परिवार का सहयोग और जरूरत पड़ने पर उचित चिकित्सकीय सहायता महत्वपूर्ण है। ऐसे में स्थानीय स्तर पर नशे से दूर रहने का संदेश देने वाले अभियान समाज में जागरूकता बढ़ाने में योगदान दे सकते हैं।
आज आगर-मालवा के नलखेड़ा स्थित विश्व प्रसिद्ध माँ बगलामुखी मंदिर परिसर में ₹85.40 करोड़ की लागत से भव्य ‘देवी लोक’ परियोजना के प्रथम चरण का भूमिपूजन किया।
आदरणीय प्रधानमंत्री श्री @narendramodi जी के करकमलों से उज्जैन में श्रीमहाकाल लोक के लोकार्पण के बाद पूरे मालवांचल का स्वरूप… pic.twitter.com/JiELzwo0KB
— Dr Mohan Yadav (@DrMohanYadav51) October 26, 2026
मुख्यमंत्री ने गायत्री परिवार के कार्यों की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी को अच्छे संस्कार देने और उनके व्यक्तित्व के समग्र विकास के लिए परिवार तथा सामाजिक संस्थाओं की भूमिका अहम है। शिक्षा के साथ बच्चों को अनुशासन, सकारात्मक सोच और सामाजिक जिम्मेदारी का महत्व समझाना भी जरूरी है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि उन्होंने गायत्री परिवार के आश्रम में रात्रि विश्राम किया और सोमवार सुबह गायत्री धाम परिसर में योगाभ्यास सहित विभिन्न गतिविधियों में भाग लिया। सेंधवा स्थित गायत्री धाम में गायत्री परिवार के सदस्यों और गुरुकुल के विद्यार्थियों के साथ योगाभ्यास के माध्यम से उन्होंने स्वस्थ जीवनशैली अपनाने का संदेश दिया। इस दौरान योग और मालखंब जैसी गतिविधियां भी कार्यक्रम का हिस्सा रहीं।
नशा मुक्ति के लिए जागरूकता और सहयोग जरूरी
मध्य प्रदेश में नशे के खिलाफ जागरूकता बढ़ाने के लिए सरकार और विभिन्न सामाजिक संगठनों की ओर से समय-समय पर अभियान चलाए जाते रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव भी पहले नशे को परिवार और समाज के लिए गंभीर चुनौती बताते हुए लोगों से इससे दूर रहने की अपील कर चुके हैं। राज्य में जुलाई 2025 में मध्य प्रदेश पुलिस ने ‘नशे से दूरी है जरूरी’ नाम से जनजागरूकता अभियान भी चलाया था।
नशा मुक्ति के प्रयासों को प्रभावी बनाने के लिए जागरूकता के साथ-साथ नशे की समस्या से जूझ रहे लोगों को उचित उपचार और परामर्श उपलब्ध कराना भी अहम है। किसी व्यक्ति को नशे की लत से बाहर निकालने में परिवार का सहयोग, प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मियों की मदद और सामाजिक स्तर पर भेदभाव से बचना उपयोगी हो सकता है। केवल नशे के नुकसान बताने के बजाय प्रभावित लोगों को सहायता तक पहुंचाना भी जरूरी है।
बड़वानी दौरे के दौरान मुख्यमंत्री का संदेश इसी बात पर केंद्रित रहा कि नशा मुक्ति को व्यापक सामाजिक प्रयास से जोड़ने की आवश्यकता है। शिव पंथ सत्संग और गायत्री परिवार की पहल की सराहना करते हुए उन्होंने समाज सुधार, संस्कार और स्वस्थ जीवनशैली को महत्व दिया। ऐसे प्रयासों का वास्तविक असर तभी व्यापक होगा, जब स्थानीय समुदायों की भागीदारी लगातार बनी रहे और नशे से प्रभावित लोगों को जागरूकता के साथ आवश्यक सहायता भी मिले।
