विजयादशमी के अवसर पर आयोजित इस कार्यक्रम में रावण दहन प्रमुख आकर्षण रहा। निर्धारित समय पर 51 फीट ऊंचे पुतले का दहन किया गया। कार्यक्रम में राज्य मंत्री नारायण सिंह पंवार की मौजूदगी भी रही। उनके साथ प्रशासनिक अधिकारी, कर्मचारी और विभिन्न जनप्रतिनिधि आयोजन में शामिल हुए। हालांकि, कार्यक्रम में शामिल लोगों की कुल संख्या और आयोजन समिति से जुड़ी विस्तृत जानकारी उपलब्ध नहीं है।
दशहरे पर रावण दहन की परंपरा बुराई पर अच्छाई और अधर्म पर धर्म की जीत का प्रतीक मानी जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान श्रीराम ने लंका के राजा रावण का वध कर माता सीता को उसके बंधन से मुक्त कराया था। इसी विजय की स्मृति में हर साल आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को विजयादशमी का पर्व मनाया जाता है। इस दिन देश के विभिन्न हिस्सों में रामलीला के मंचन, पूजा-अर्चना और रावण दहन जैसे आयोजन होते हैं।
ब्यावरा में भी नवीन दशहरा मैदान में आयोजित रावण दहन कार्यक्रम इसी पारंपरिक उत्सव का हिस्सा रहा। 51 फीट ऊंचे पुतले के दहन के साथ आतिशबाजी की गई। दशहरे से जुड़े ऐसे आयोजन धार्मिक आस्था के साथ-साथ स्थानीय सांस्कृतिक परंपराओं को आगे बढ़ाने का अवसर भी प्रदान करते हैं।
गौरतलब है कि विजयादशमी का संदेश केवल रावण दहन तक सीमित नहीं है। यह पर्व लोगों को अहंकार, अन्याय और नकारात्मक प्रवृत्तियों से दूर रहकर सत्य, सदाचार और न्याय के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। ब्यावरा में आयोजित कार्यक्रम में रावण दहन के माध्यम से इसी पारंपरिक संदेश को प्रमुखता मिली।
