उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले समाजवादी पार्टी (सपा) और कांग्रेस के बीच सीट बंटवारे को लेकर राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गई हैं। इसी बीच लखनऊ और प्रदेश के कुछ अन्य इलाकों में कांग्रेस नेताओं की तस्वीरों के साथ ‘200 सीट हमारा हक है’ लिखे पोस्टर और होर्डिंग लगाए जाने का मामला सामने आया है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने इन पोस्टरों को कथित तौर पर फर्जी बताते हुए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर विपक्षी गठबंधन में भ्रम पैदा करने का आरोप लगाया है। अखिलेश का कहना है कि इस तरह की कोशिशों से समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के बीच एकता कमजोर नहीं होगी, बल्कि PDA की ताकत और बढ़ेगी।
सोमवार, 26 अक्टूबर 2026 को लखनऊ स्थित समाजवादी पार्टी के मुख्यालय में पत्रकारों से बातचीत के दौरान अखिलेश यादव ने पोस्टरों को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि इन होर्डिंग्स को कौन लगवा रहा है और इनके पीछे पैसा कौन खर्च कर रहा है। उन्होंने यह भी सवाल किया कि यदि पोस्टर नियमों के तहत लगाए गए हैं, तो उनकी अनुमति और शुल्क से संबंधित जानकारी सामने क्यों नहीं आ रही है। अखिलेश ने संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग करते हुए कहा कि इस तरह के प्रचार के जरिए राजनीतिक माहौल को प्रभावित करने की कोशिश की जा रही है।
इन पोस्टरों पर कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा सहित पार्टी के अन्य नेताओं की तस्वीरें दिखाई देने की खबर है। पोस्टरों पर ‘200 सीट हमारा हक है’ और ‘यूपी को है राहुल गांधी पर भरोसा’ जैसे नारे लिखे गए हैं। ये पोस्टर ऐसे समय सामने आए हैं, जब उत्तर प्रदेश में अगले विधानसभा चुनाव के लिए समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के बीच संभावित सीट बंटवारे को लेकर बातचीत और राजनीतिक आकलन चल रहा है।
हालांकि, पोस्टर किसने लगवाए और इसके पीछे वास्तव में किस राजनीतिक दल या संगठन का हाथ है, इसकी स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। अखिलेश यादव ने भाजपा पर आरोप लगाया है, लेकिन इस आरोप को किसी स्थापित तथ्य के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। पोस्टरों को लेकर विवाद का एक प्रमुख पहलू यह भी है कि इन्हें लगाने की अनुमति ली गई थी या नहीं और निर्धारित शुल्क जमा किया गया था या नहीं। इन सवालों की आधिकारिक जांच या संबंधित अधिकारियों की पुष्टि के बिना पोस्टरों के पीछे की जिम्मेदारी तय करना जल्दबाजी होगी।
कांग्रेस और सपा के बीच सीट बंटवारे पर क्या है चर्चा?
उत्तर प्रदेश विधानसभा में कुल 403 सीटें हैं। 2027 के चुनाव से पहले कांग्रेस की ओर से लगभग 175 से 200 सीटों पर चुनाव लड़ने की दावेदारी को लेकर मीडिया में चर्चा हुई है। हालांकि, दोनों दलों के बीच कितनी सीटों पर सहमति बनेगी, इसका अंतिम फैसला अभी घोषित नहीं हुआ है। ऐसे में 200 सीटों वाले पोस्टरों को लेकर विवाद ने सीट बंटवारे की बातचीत को राजनीतिक चर्चा के केंद्र में ला दिया है।
अखिलेश यादव ने कहा कि समाजवादी पार्टी और उसके नेताओं को राजनीतिक दलों के साथ गठबंधन बनाने तथा उन्हें साथ लेकर चलने का अनुभव है। उन्होंने भरोसा जताया कि विधानसभा चुनाव से पहले गठबंधन को मजबूत किया जाएगा। उनके बयान का संकेत यह है कि पोस्टरों और सीटों की संख्या को लेकर पैदा हुए विवाद के बावजूद सपा नेतृत्व कांग्रेस के साथ गठबंधन को आगे बढ़ाने के पक्ष में है। दूसरी ओर, सीटों की संख्या को लेकर दोनों दलों की राजनीतिक अपेक्षाएं और चुनावी रणनीति आगे की बातचीत में अहम भूमिका निभा सकती हैं।
समाजवादी पार्टी, उत्तर प्रदेश
19, विक्रमादित्य मार्ग, लखनऊ
प्रकाशन/प्रसारण हेतु- दिनांकः 26.10.2026
हाथरस जनपद के श्री दीपक सेंगर ठुलई गांव निवासी अपने कई साथियों सर्वश्री भगवान सिंह सेंगर, मुकेश कुमार सेंगर, संजू सेंगर, मोनू सेंगर के साथ भाजपा छोड़कर समाजवादी पार्टी… pic.twitter.com/VesRKTlhRk— Samajwadi Party (@samajwadiparty) October 26, 2026
अखिलेश यादव ने अपने बयान में PDA का भी जिक्र किया। PDA का अर्थ ‘पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक’ है। यह समाजवादी पार्टी की राजनीतिक रणनीति का प्रमुख हिस्सा रहा है, जिसके तहत पार्टी इन वर्गों को अपने सामाजिक और राजनीतिक समर्थन आधार के रूप में जोड़ने पर जोर देती है। अखिलेश का कहना है कि विपक्षी दलों के बीच भ्रम पैदा करने की कोशिशों से PDA कमजोर नहीं होगा। उन्होंने संकेत दिया कि इस तरह के विवादों के बावजूद पार्टी अपनी राजनीतिक रणनीति और गठबंधन को मजबूत करने पर ध्यान देती रहेगी।
उत्तर प्रदेश की राजनीति में कांग्रेस और समाजवादी पार्टी का गठबंधन नया नहीं है। दोनों दलों ने 2017 के विधानसभा चुनाव में साथ मिलकर चुनाव लड़ा था, हालांकि उस समय उन्हें अपेक्षित सफलता नहीं मिली थी। इसके बाद 2022 के विधानसभा चुनाव में दोनों दल अलग-अलग मैदान में उतरे। वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में सपा और कांग्रेस ने फिर साथ चुनाव लड़ा और उत्तर प्रदेश में संयुक्त रूप से 43 सीटों पर जीत दर्ज की। इनमें समाजवादी पार्टी को 37 और कांग्रेस को छह सीटें मिली थीं। इस परिणाम ने प्रदेश की राजनीति में विपक्षी गठबंधन की भूमिका को महत्वपूर्ण बना दिया।
अब 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले दोनों दलों के सामने लोकसभा चुनाव जैसी एकजुटता बनाए रखने के साथ-साथ सीटों का व्यावहारिक बंटवारा करने की चुनौती है। कांग्रेस अधिक सीटों पर चुनाव लड़ने की कोशिश कर सकती है, जबकि समाजवादी पार्टी को अपने मौजूदा संगठन, विधानसभा क्षेत्रों में प्रभाव और चुनावी संभावनाओं को ध्यान में रखना होगा। ऐसे में पोस्टर विवाद को केवल प्रचार से जुड़ा मामला मानकर नजरअंदाज करना आसान नहीं है, क्योंकि यह गठबंधन के भीतर सीटों की हिस्सेदारी को लेकर चल रही राजनीतिक चर्चा से भी जुड़ा है।
फिलहाल, पोस्टरों को लेकर अखिलेश यादव के आरोपों और दोनों दलों के बीच सीट बंटवारे की चर्चा ने उत्तर प्रदेश की सियासत को गर्म कर दिया है। लेकिन इस विवाद का गठबंधन पर वास्तविक असर क्या होगा, यह आने वाले दिनों में होने वाली बातचीत और दोनों दलों के आधिकारिक फैसलों से स्पष्ट होगा। अभी तक सीटों के अंतिम बंटवारे की घोषणा नहीं हुई है और पोस्टरों के पीछे जिम्मेदार लोगों की पहचान भी स्वतंत्र रूप से स्थापित नहीं हुई है।
