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हैदराबाद: मीरचौक इंस्पेक्टर पर ₹6 लाख रिश्वत मांगने का आरोप, होमगार्ड से ₹3 लाख बरामद; ACB ने दोनों को किया गिरफ्तार

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हैदराबाद: मीरचौक इंस्पेक्टर पर ₹6 लाख रिश्वत मांगने का आरोप, होमगार्ड से ₹3 लाख बरामद; ACB ने दोनों को किया गिरफ्तार

हैदराबाद के पुराने शहर में भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ी कार्रवाई सामने आई है। तेलंगाना की एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) ने मीरचौक पुलिस स्टेशन के इंस्पेक्टर एम. कोंडल राव और होमगार्ड आबिद अली को कथित रिश्वतखोरी के मामले में गिरफ्तार किया है। आरोप है कि एक मामले में राहत देने और शिकायतकर्ता के पिता के खिलाफ दर्ज केस को बंद कराने के बदले 6 लाख रुपये की मांग की गई थी। मंगलवार, 27 अक्टूबर को कथित तौर पर 3 लाख रुपये की पहली किस्त लेते समय ACB ने कार्रवाई की। अधिकारियों के मुताबिक, होमगार्ड के पास से रिश्वत की रकम बरामद की गई है। मामले की जांच जारी है।

यह कार्रवाई हैदराबाद के पुराने शहर के मीरचौक इलाके में हुई। शुरुआती जानकारी के अनुसार, शिकायत मिलने के बाद ACB की सिटी रेंज-1 टीम ने जाल बिछाया था। जांच एजेंसी का आरोप है कि पुलिस इंस्पेक्टर ने अपने पद का इस्तेमाल करते हुए शिकायतकर्ता से पैसे मांगे और रकम सीधे लेने के बजाय होमगार्ड के माध्यम से भुगतान कराया। हालांकि, मामले में लगाए गए आरोपों की पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगी।

क्या है पूरा मामला?

ACB के अनुसार, शिकायतकर्ता के पिता के खिलाफ एक मामला दर्ज था। आरोप है कि इस मामले में कार्रवाई से राहत दिलाने, केस बंद कराने और भविष्य में मदद करने के नाम पर कथित तौर पर 6 लाख रुपये की मांग की गई थी। शिकायतकर्ता से रकम मांगे जाने के बाद मामला भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो तक पहुंचा। इसके बाद अधिकारियों ने शिकायत के आधार पर कार्रवाई की योजना बनाई।

जांच एजेंसी के मुताबिक, इंस्पेक्टर एम. कोंडल राव पर रिश्वत की मांग करने का आरोप है, जबकि मीरचौक थाने में तैनात होमगार्ड आबिद अली पर उनकी ओर से रकम स्वीकार करने का आरोप लगाया गया है। ACB की टीम ने कथित भुगतान के दौरान कार्रवाई की और होमगार्ड के पास से 3 लाख रुपये बरामद किए। यह राशि बताई गई 6 लाख रुपये की कुल मांग का एक हिस्सा थी।

मामले में सबसे अहम पहलू यह है कि कथित रिश्वत किसी सरकारी काम में सामान्य सुविधा देने के बजाय पुलिस के पास दर्ज एक मामले में राहत देने से जुड़ी बताई गई है। जांच एजेंसी के अनुसार, शिकायतकर्ता के पिता के खिलाफ मामले को बंद करने, उनके विरुद्ध कठोर कार्रवाई से बचने और आगे सहायता देने के बदले पैसे मांगे गए थे। फिलहाल यह पूरा घटनाक्रम ACB की ओर से लगाए गए आरोपों पर आधारित है। मामले के सभी पहलुओं की जांच और अदालत में होने वाली कार्यवाही से ही आगे की स्थिति स्पष्ट होगी।

शिकायत के बाद ACB ने कैसे की कार्रवाई?

भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो आम तौर पर सरकारी पद पर बैठे किसी व्यक्ति के खिलाफ रिश्वत मांगने की शिकायत मिलने पर तथ्यों की जांच करता है। शिकायत की प्रकृति और उपलब्ध जानकारी के आधार पर जाल बिछाकर कथित रिश्वत स्वीकार किए जाने की स्थिति में कार्रवाई की जा सकती है। मीरचौक मामले में भी ACB की सिटी रेंज-1 इकाई की कार्रवाई के दौरान 3 लाख रुपये बरामद होने की जानकारी सामने आई है।

ACB का आरोप है कि इंस्पेक्टर और होमगार्ड ने अपने आधिकारिक पदों का अनुचित इस्तेमाल कर अनुचित आर्थिक लाभ लेने की कोशिश की। इस मामले में दोनों को गिरफ्तार किया गया है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, आरोपियों को हैदराबाद के नामपल्ली स्थित SPE और ACB मामलों की विशेष अदालत में न्यायिक रिमांड के लिए पेश किए जाने की प्रक्रिया थी। अदालत में आगे की कार्यवाही और जांच के निष्कर्ष इस मामले की दिशा तय करेंगे।

शिकायतकर्ता की पहचान रखी गई गोपनीय

इस मामले में शिकायतकर्ता की पहचान और व्यक्तिगत विवरण सार्वजनिक नहीं किए गए हैं। भ्रष्टाचार के मामलों में शिकायत करने वाले व्यक्ति की सुरक्षा महत्वपूर्ण होती है, खासकर तब जब शिकायत ऐसे अधिकारी के खिलाफ हो जिसके पास स्थानीय स्तर पर कार्रवाई करने का अधिकार रहा हो। जांच एजेंसी ने शिकायतकर्ता का विवरण गोपनीय रखा है।

फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि कथित रिश्वत की मांग से जुड़े मामले में आगे और किन लोगों से पूछताछ की जाएगी या जांच के दौरान कोई अतिरिक्त तथ्य सामने आएंगे। इसलिए जांच पूरी होने और अदालत की कार्यवाही से पहले किसी भी आरोपी को दोषी ठहराना उचित नहीं होगा। आरोपों की पुष्टि साक्ष्यों और कानूनी प्रक्रिया के आधार पर ही की जाएगी।

रिश्वत मांगने पर कहां करें शिकायत?

तेलंगाना में किसी सरकारी कर्मचारी या अधिकारी द्वारा रिश्वत मांगे जाने की स्थिति में लोग एंटी करप्शन ब्यूरो से संपर्क कर सकते हैं। ACB ने भ्रष्टाचार से जुड़ी शिकायतों के लिए टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर 1064 जारी किया है। शिकायत करते समय घटना का समय, स्थान, संबंधित व्यक्ति का पद और उपलब्ध साक्ष्यों की जानकारी देना उपयोगी हो सकता है। किसी भी कथित रिश्वत भुगतान को स्वयं रिकॉर्ड करने या कार्रवाई करने से पहले संबंधित एजेंसी से कानूनी मार्गदर्शन लेना चाहिए।

मीरचौक इंस्पेक्टर और होमगार्ड के खिलाफ हुई कार्रवाई एक बार फिर सरकारी कामकाज में जवाबदेही और भ्रष्टाचार की शिकायतों पर जांच की अहमियत सामने लाती है। फिलहाल मामले में ACB की जांच और न्यायिक कार्यवाही पर नजर रहेगी। दोनों आरोपियों के खिलाफ लगाए गए आरोपों का अंतिम फैसला अदालत में साक्ष्यों और कानूनी प्रक्रिया के आधार पर होगा।

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