राजस्थान के कोटा स्थित न्यू मेडिकल कॉलेज अस्पताल में सिजेरियन डिलीवरी के बाद एक और प्रसूता की मौत का मामला सामने आया है। बारां निवासी रोशन बैरवा की प्रसव के बाद लगातार रक्तस्राव होने से जान चली गई। रिपोर्टों के अनुसार, कई घंटों तक रक्तस्राव नहीं रुकने और हालत लगातार बिगड़ने के बाद शनिवार, 17 अक्टूबर 2026 को सुबह करीब 11:30 बजे उनकी मौत हो गई। इस घटना से पहले इसी अस्पताल में 40 वर्षीय प्रसूता रेशमा की भी मौत हुई थी। इस तरह करीब 24 घंटे के भीतर प्रसव के बाद दो महिलाओं की मौत से अस्पताल में मातृ स्वास्थ्य सेवाओं और ऑपरेशन के बाद मरीजों की निगरानी को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
रोशन बैरवा की मौत के बाद उनके परिजनों ने इलाज में लापरवाही के आरोप लगाए हैं। दूसरी ओर, अस्पताल प्रशासन का कहना है कि महिला की गर्भावस्था हाई-रिस्क श्रेणी में थी और उन्हें बचाने के लिए चिकित्सकीय टीम ने प्रयास किए। फिलहाल उपलब्ध जानकारी के आधार पर इलाज में लापरवाही को मौत का प्रमाणित कारण नहीं कहा जा सकता। मामले में सामने आए तथ्यों, अस्पताल प्रशासन के पक्ष और परिजनों के आरोपों की अलग-अलग जांच आवश्यक है।
रात में अस्पताल पहुंचीं, डिलीवरी के बाद लगातार होता रहा रक्तस्राव
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, रोशन बैरवा का बारां और कोटा के निजी अस्पतालों में भी इलाज चल रहा था। बाद में परिजन उन्हें कोटा के न्यू मेडिकल कॉलेज अस्पताल लेकर पहुंचे। अस्पताल प्रशासन के अनुसार, महिला को 16 अक्टूबर की रात करीब आठ बजे अस्पताल में भर्ती कराया गया था। इसके बाद रात में सिजेरियन ऑपरेशन किया गया और बच्चे का जन्म हुआ। हालांकि, डिलीवरी के बाद रोशन को लगातार रक्तस्राव होने लगा।
रक्तस्राव रोकने के लिए डॉक्टरों ने उपचार किया और महिला को खून भी चढ़ाया गया। रिपोर्टों में एक यूनिट रक्त चढ़ाए जाने का उल्लेख है। इसके बावजूद रक्तस्राव नियंत्रित नहीं हो सका। हालत बिगड़ने पर उन्हें दोबारा ऑपरेशन थिएटर में ले जाया गया, लेकिन स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ। परिजनों के मुताबिक, शनिवार सुबह करीब सात बजे से रोशन की सांस फूलने लगी और उनकी हालत तेजी से बिगड़ने लगी। इसके बाद उन्हें आईसीयू में शिफ्ट किया गया। तमाम प्रयासों के बावजूद सुबह करीब 11:30 बजे उनकी मौत हो गई।
अस्पताल प्रशासन के अनुसार, रोशन हाई-रिस्क गर्भावस्था वाली मरीज थीं। उन्हें एनीमिया होने और वजन लगभग 39 से 40 किलोग्राम होने की जानकारी भी दी गई है। अस्पताल प्रशासन ने कहा कि अत्यधिक रक्तस्राव के कारण उनकी स्थिति गंभीर हो गई थी और डॉक्टरों ने उन्हें बचाने की कोशिश की। हालांकि, किसी मरीज की पहले से गंभीर स्थिति होने के बावजूद समय पर उपचार, रक्तस्राव पर नियंत्रण और ऑपरेशन के बाद निगरानी जैसे पहलुओं की समीक्षा महत्वपूर्ण होती है।
रोशन के परिजनों ने इलाज में लापरवाही का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि डिलीवरी के बाद महिला की तबीयत लगातार बिगड़ती गई। अस्पताल प्रशासन ने आरोपों को निराधार बताते हुए मरीज की गंभीर स्थिति और हाई-रिस्क गर्भावस्था का हवाला दिया है। दोनों पक्षों के दावों के बीच यह स्पष्ट होना जरूरी है कि रक्तस्राव शुरू होने के बाद कौन-कौन से उपचार किए गए, मरीज की निगरानी किस तरह हुई और स्थिति बिगड़ने पर क्या कदम उठाए गए। उपलब्ध रिपोर्टों में इन सवालों पर किसी अंतिम जांच निष्कर्ष की जानकारी नहीं है।
रेशमा की मौत के बाद फिर बढ़ी चिंता
रोशन बैरवा की मौत से पहले कोटा के इसी न्यू मेडिकल कॉलेज अस्पताल में 40 वर्षीय रेशमा की भी प्रसव के बाद मौत हुई थी। रेशमा का 14 अक्टूबर को सिजेरियन ऑपरेशन हुआ था। इसके बाद उनकी तबीयत बिगड़ने लगी। रिपोर्टों के अनुसार, उनका ब्लड प्रेशर और ऑक्सीजन स्तर गिर गया था तथा पेशाब की मात्रा बेहद कम हो गई थी। बाद में किडनी से जुड़ी गंभीर जटिलताओं के बीच शुक्रवार, 16 अक्टूबर की देर रात इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।
रेशमा के परिजनों ने इलाज के दौरान इंजेक्शन लगाए जाने पर सवाल उठाए और चिकित्सकीय लापरवाही का आरोप लगाया। परिवार का कहना था कि इंजेक्शन दिए जाने के बाद उनकी हालत बिगड़ी। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में इंजेक्शन की पहचान और महिला की मौत के बीच किसी प्रत्यक्ष संबंध की पुष्टि नहीं हुई है। परिजनों की शिकायत के आधार पर पुलिस कार्रवाई की जानकारी भी सामने आई है। मौत के वास्तविक कारण और उपचार के दौरान किसी संभावित चूक का पता लगाने के लिए चिकित्सकीय रिकॉर्ड और जांच के निष्कर्ष महत्वपूर्ण होंगे।
इस बीच, अस्पताल में सिजेरियन डिलीवरी के बाद एक अन्य प्रसूता अनीता की हालत भी गंभीर होने की खबर सामने आई थी। रिपोर्टों में उनके यूरिन आउटपुट में कमी, किडनी संबंधी जटिलताओं और प्लेटलेट्स घटने का उल्लेख किया गया। डॉक्टरों ने ऐसे मामलों में गर्भावस्था से जुड़ी गंभीर चिकित्सकीय स्थितियों, जिनमें हेल्प सिंड्रोम (HELLP Syndrome) और थ्रोम्बोटिक माइक्रोएंजियोपैथी जैसी जटिलताएं शामिल हैं, की संभावना पर विचार करने की बात कही है। ये संभावित चिकित्सकीय कारण हैं; किसी मरीज की बीमारी या मौत की वास्तविक वजह की पुष्टि जांच के आधार पर ही की जा सकती है।
मई में भी इसी अस्पताल में हुई थीं पांच प्रसूताओं की मौत
कोटा के न्यू मेडिकल कॉलेज अस्पताल में ताजा घटनाएं ऐसे समय सामने आई हैं, जब इस साल मई में भी प्रसव के बाद महिलाओं की तबीयत बिगड़ने और किडनी संबंधी गंभीर जटिलताओं का मामला चर्चा में रहा था। उस समय सामने आई रिपोर्टों के अनुसार, 12 महिलाओं को प्रसव के बाद किडनी से जुड़ी गंभीर परेशानियां हुई थीं और इनमें से पांच की मौत हो गई थी। उस घटना के बाद अस्पताल में उपचार की प्रक्रिया, दवाओं की गुणवत्ता, मरीजों की निगरानी और जिम्मेदारी तय करने को लेकर व्यापक सवाल उठे थे।
हालिया घटनाओं के बाद इस पुराने मामले की चर्चा फिर शुरू हो गई है। हालांकि, कोटा न्यू मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. नीलेश जैन ने ताजा मौतों को मई में हुई मौतों से जोड़ने से इनकार किया है। उनके अनुसार, हाल में जान गंवाने वाली दोनों महिलाएं गंभीर स्थिति में थीं। ऐसे में अलग-अलग घटनाओं के बीच संबंध मान लेना उचित नहीं होगा, जब तक कि चिकित्सकीय जांच से इसकी पुष्टि न हो जाए।
रोशन बैरवा की मौत ने प्रसव के बाद होने वाले अत्यधिक रक्तस्राव के प्रबंधन को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े किए हैं। प्रसवोत्तर रक्तस्राव एक आपातकालीन स्थिति बन सकता है और ऐसी परिस्थितियों में समय पर पहचान, रक्तस्राव को नियंत्रित करने का उपचार, जरूरत के मुताबिक रक्त की उपलब्धता तथा मरीज की लगातार निगरानी महत्वपूर्ण होती है। खासकर एनीमिया या अन्य जोखिम वाली गर्भावस्था में प्रसव से पहले और बाद की चिकित्सकीय योजना पर विशेष ध्यान देना पड़ता है।
इस मामले में सबसे अहम सवाल यह है कि रोशन की हालत बिगड़ने के बाद उपचार की पूरी प्रक्रिया क्या रही और क्या सभी जरूरी कदम समय पर उठाए गए। अस्पताल प्रशासन ने डॉक्टरों द्वारा प्रयास किए जाने की बात कही है, जबकि परिजनों ने लापरवाही का आरोप लगाया है। इन दावों की पुष्टि या खंडन केवल उपलब्ध तथ्यों, मेडिकल रिकॉर्ड और निष्पक्ष जांच के आधार पर ही किया जा सकता है। फिलहाल, रोशन की मौत और उससे पहले रेशमा की मौत ने कोटा के इस अस्पताल में प्रसव के बाद मरीजों की सुरक्षा और उपचार व्यवस्था को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं।
