ओडिशा के सुबर्णपुर (सोनपुर) जिले के कमिरा गांव में 28वें गजलक्ष्मी पूजा के अवसर पर सुंदरकांड पारायण का आयोजन किया गया। इस धार्मिक कार्यक्रम की जानकारी 27 अक्टूबर 2026 को सामने आई। आयोजन में सुंदरकांड पाठ को पूजा महोत्सव का हिस्सा बनाया गया, जो धार्मिक आस्था और पारंपरिक अनुष्ठानों के महत्व को दर्शाता है।
गजलक्ष्मी पूजा मां लक्ष्मी की आराधना से जुड़ा धार्मिक उत्सव है। हिंदू मान्यताओं में मां लक्ष्मी को धन, समृद्धि, सुख और वैभव की देवी माना जाता है। ओडिशा के विभिन्न क्षेत्रों में गजलक्ष्मी पूजा के दौरान पूजा-अर्चना और धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। ऐसे आयोजन स्थानीय धार्मिक परंपराओं को आगे बढ़ाने के साथ-साथ लोगों को अपनी सांस्कृतिक विरासत से जुड़े रहने का अवसर भी देते हैं।
कमिरा गांव में आयोजित पूजा के अवसर पर सुंदरकांड पारायण विशेष धार्मिक कार्यक्रम रहा। सुंदरकांड रामायण का महत्वपूर्ण हिस्सा है, जिसमें भगवान हनुमान की लंका यात्रा, माता सीता की खोज और भगवान श्रीराम के प्रति उनकी अटूट भक्ति का वर्णन मिलता है। धार्मिक परंपरा में सुंदरकांड के पाठ को साहस, धैर्य, भक्ति और आत्मविश्वास से जोड़कर देखा जाता है। श्रद्धालु इसे आध्यात्मिक शांति और सकारात्मक भाव बनाए रखने के उद्देश्य से भी पढ़ते हैं।
गजलक्ष्मी पूजा जैसे धार्मिक आयोजनों में पूजा-अर्चना के साथ रामायण और अन्य धार्मिक ग्रंथों का पाठ श्रद्धालुओं की आस्था को अभिव्यक्त करने का माध्यम बनता है। सुंदरकांड पारायण के जरिए भगवान हनुमान के समर्पण, सेवा और कठिन परिस्थितियों का सामना करने के संदेश को भी स्मरण किया जाता है। इस तरह के कार्यक्रम स्थानीय स्तर पर धार्मिक गतिविधियों और सांस्कृतिक परंपराओं को बनाए रखने में भूमिका निभाते हैं।
कमिरा गांव में आयोजित इस कार्यक्रम को लेकर उपलब्ध सार्वजनिक जानकारी में आयोजक समिति, पारायण के समय, श्रद्धालुओं की संख्या और कार्यक्रम में शामिल प्रमुख लोगों का विस्तृत ब्योरा नहीं दिया गया है। इसलिए आयोजन से जुड़ी इन जानकारियों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। फिलहाल उपलब्ध विवरण से इतना स्पष्ट है कि गांव में 28वें गजलक्ष्मी पूजा के अवसर पर सुंदरकांड पारायण का आयोजन किया गया।
