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सूरजपुर में विज्ञान की पढ़ाई को रोचक बनाने की पहल, मेंटर शिक्षकों ने सीखे घरेलू सामग्री से प्रयोग के तरीके

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सूरजपुर में विज्ञान की पढ़ाई को रोचक बनाने की पहल, मेंटर शिक्षकों ने सीखे घरेलू सामग्री से प्रयोग के तरीके

सूरजपुर, 18 अक्टूबर 2026: छत्तीसगढ़ के सूरजपुर जिले में विद्यार्थियों के लिए विज्ञान की पढ़ाई को अधिक रोचक, सरल और व्यावहारिक बनाने की दिशा में पहल की गई है। जिला शिक्षा विभाग के तत्वावधान में रविवार को संयुक्त जिला कार्यालय, सूरजपुर में विकासखंड स्तर के मेंटर शिक्षकों के लिए एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला आयोजित की गई। इसमें घरेलू सामग्री के माध्यम से विज्ञान के प्रयोगों को समझने और शिक्षण प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाने पर जोर दिया गया।

कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य विज्ञान जैसे विषय को केवल किताबों, परिभाषाओं और सैद्धांतिक जानकारी तक सीमित रखने के बजाय प्रयोगों और गतिविधियों के माध्यम से समझाने के तरीकों पर ध्यान देना रहा। प्रशिक्षण में शिक्षकों ने ऐसे सरल और प्रभावी तरीकों की जानकारी प्राप्त की, जिनके जरिए विज्ञान की अवधारणाओं को विद्यार्थियों के लिए सहज बनाया जा सकता है।

घरेलू सामग्री से विज्ञान को समझने पर जोर

विज्ञान की पढ़ाई में अक्सर विद्यार्थियों को कई अवधारणाएं समझने में कठिनाई होती है, खासकर तब, जब उन्हें केवल पाठ्यपुस्तक के माध्यम से समझाया जाता है। ऐसी स्थिति में गतिविधि-आधारित शिक्षण बच्चों को विषय से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। रोजमर्रा में इस्तेमाल होने वाली वस्तुओं के माध्यम से प्रयोगों को समझाना इस पद्धति का एक उपयोगी हिस्सा है। इससे विद्यार्थियों को अपने आसपास होने वाली घटनाओं को वैज्ञानिक नजरिए से देखने का अवसर मिल सकता है।

सूरजपुर में आयोजित प्रशिक्षण में घरेलू सामग्री से विज्ञान के प्रयोग कराने और शिक्षण के सरल तरीकों पर विशेष ध्यान दिया गया। इस तरह की गतिविधियों में शिक्षक विद्यार्थियों को किसी वैज्ञानिक अवधारणा को समझाने के साथ-साथ अवलोकन करने, सवाल पूछने, प्रयोग के परिणामों पर विचार करने और अपने निष्कर्ष निकालने के लिए प्रेरित कर सकते हैं। इससे विज्ञान के प्रति उनकी जिज्ञासा और विषय को समझने की क्षमता विकसित करने में मदद मिल सकती है।

गतिविधि-आधारित शिक्षण का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है, क्योंकि इसमें विद्यार्थियों की भागीदारी पर जोर रहता है। जब बच्चे किसी अवधारणा को केवल पढ़ने के बजाय उससे जुड़ी गतिविधि को देखते या उसमें भाग लेते हैं, तो उन्हें विषय को व्यावहारिक रूप से समझने का अवसर मिलता है। हालांकि, किसी प्रयोग को कक्षा में कराने से पहले उसकी सुरक्षा, आयु के अनुरूप उपयुक्तता और शैक्षणिक उद्देश्य का ध्यान रखना भी जरूरी है।

मेंटर शिक्षकों की भूमिका होगी अहम

प्रशिक्षण में विकासखंड स्तर के मेंटर शिक्षकों की भागीदारी महत्वपूर्ण है। शिक्षकों के लिए ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम विषय से जुड़ी जानकारी को बेहतर ढंग से प्रस्तुत करने और कक्षा में नई शिक्षण विधियों को अपनाने के अवसर उपलब्ध कराते हैं। मेंटर शिक्षक अपने अनुभव और प्रशिक्षण से प्राप्त उपयोगी तरीकों को अन्य शिक्षकों तक पहुंचाने में भी भूमिका निभा सकते हैं। इससे विद्यालयों में शिक्षण की गुणवत्ता सुधारने के प्रयासों को प्रोत्साहन मिल सकता है।

विज्ञान की पढ़ाई को प्रभावी बनाने के लिए केवल प्रयोग कराना ही पर्याप्त नहीं है। विद्यार्थियों को प्रयोग के पीछे का वैज्ञानिक कारण समझाना, उनके सवालों को प्रोत्साहित करना और सीखी गई अवधारणा को वास्तविक जीवन से जोड़ना भी आवश्यक है। इस दृष्टिकोण से घरेलू सामग्री पर आधारित प्रयोग उपयोगी हो सकते हैं, क्योंकि इनके लिए हमेशा महंगे उपकरणों या विशेष प्रयोगशाला की जरूरत नहीं होती। हालांकि, प्रयोग का चयन विषय, कक्षा और उपलब्ध संसाधनों के अनुसार किया जाना चाहिए।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में भी अनुभवात्मक, खोज-आधारित और गतिविधि-आधारित शिक्षण को महत्व दिया गया है। इसका व्यापक उद्देश्य विद्यार्थियों को रटने के बजाय अवधारणाओं को समझने, विश्लेषण करने और समस्याओं के समाधान की दिशा में सोचने के लिए प्रोत्साहित करना है। विज्ञान जैसे विषय में यह दृष्टिकोण विशेष रूप से उपयोगी हो सकता है, जहां सिद्धांतों को प्रयोग और अवलोकन से जोड़कर समझाया जा सकता है।

सूरजपुर में आयोजित एक दिवसीय कार्यशाला इसी दिशा में शिक्षकों को सरल और प्रभावी शिक्षण तरीकों से परिचित कराने की पहल है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, कार्यक्रम में घरेलू सामग्री से विज्ञान के प्रयोगों और गतिविधि-आधारित शिक्षण पर ध्यान केंद्रित किया गया। प्रशिक्षण के आगे विद्यालयों में किस स्तर पर इन तरीकों को अपनाया जाएगा और विद्यार्थियों के सीखने पर इसका क्या प्रभाव पड़ेगा, इसकी विस्तृत जानकारी उपलब्ध नहीं है।

कुल मिलाकर, विज्ञान की पढ़ाई को अधिक व्यावहारिक और विद्यार्थियों की भागीदारी वाला बनाने के लिए शिक्षक प्रशिक्षण महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। यदि प्रशिक्षण में सीखे गए उपयोगी तरीकों को कक्षाओं में प्रभावी ढंग से अपनाया जाए, तो विद्यार्थियों को विज्ञान की अवधारणाओं को समझने, सवाल पूछने और दैनिक जीवन में विज्ञान की भूमिका पहचानने के बेहतर अवसर मिल सकते हैं।

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