पंजाब के फाजिल्का में विजयादशमी के अवसर पर हिंदू संगठनों की ओर से दशहरा उत्सव और शस्त्र पूजन कार्यक्रम का आयोजन किया गया। शहर में विशाल मेगा मार्ट के नजदीक आयोजित इस कार्यक्रम में समाजसेवी करण गिलहोत्रा, विभिन्न स्कूलों के प्रिंसिपल और धार्मिक नेताओं ने शिरकत की। दशहरे के मौके पर आयोजित इस कार्यक्रम में धार्मिक परंपराओं और शस्त्र पूजन से जुड़ी मान्यताओं को प्रमुखता मिली।
विजयादशमी यानी दशहरा हिंदू धर्म के प्रमुख त्योहारों में शामिल है। इस पर्व को बुराई पर अच्छाई और अधर्म पर धर्म की जीत का प्रतीक माना जाता है। देश के अलग-अलग हिस्सों में लोग इसे अपनी स्थानीय परंपराओं और रीति-रिवाजों के अनुसार मनाते हैं। फाजिल्का में भी हिंदू संगठनों ने इस अवसर पर धार्मिक आयोजन करके त्योहार मनाया।
कार्यक्रम में समाजसेवी करण गिलहोत्रा के साथ स्कूलों के प्रिंसिपल और धार्मिक क्षेत्र से जुड़े लोगों की मौजूदगी रही। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में शामिल सभी अतिथियों के नाम, आयोजन करने वाले संगठनों की विस्तृत सूची और कार्यक्रम के दौरान हुए संबोधनों का विवरण सामने नहीं आया है। इसलिए आयोजन से जुड़ी अन्य गतिविधियों के बारे में किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा।
दशहरे पर शस्त्र पूजन की क्या है परंपरा?
दशहरे के अवसर पर शस्त्र पूजन की परंपरा का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। हिंदू मान्यताओं के अनुसार, शस्त्र शक्ति, सुरक्षा और साहस के प्रतीक हैं। इसी वजह से कई स्थानों पर विजयादशमी के दिन शस्त्रों की पूजा की जाती है। परंपरागत रूप से इसे शक्ति के सम्मान और अन्याय के विरुद्ध खड़े होने के संकल्प से भी जोड़कर देखा जाता है। अलग-अलग क्षेत्रों और समुदायों में इस परंपरा को निभाने के तरीके अलग हो सकते हैं।
दशहरे का संबंध भगवान श्रीराम की ओर से रावण पर विजय और देवी दुर्गा की ओर से महिषासुर के अंत की धार्मिक मान्यताओं से भी जोड़ा जाता है। भगवान श्रीराम की विजय को सत्य और धर्म की जीत के रूप में देखा जाता है। वहीं, देवी दुर्गा की आराधना शक्ति और बुराइयों के अंत का संदेश देती है। यही वजह है कि विजयादशमी के दिन देश के अनेक हिस्सों में पूजा-पाठ, धार्मिक कार्यक्रम और रावण दहन जैसे आयोजन किए जाते हैं।
शस्त्र पूजन की परंपरा केवल हथियारों तक सीमित नहीं है। कई परिवारों और समुदायों में इस दिन अपने कामकाज में इस्तेमाल होने वाले औजारों, मशीनों और वाहनों की भी पूजा की जाती है। इसके पीछे काम के साधनों के प्रति सम्मान और आने वाले समय में सफलता की कामना जैसी धार्मिक धारणाएं जुड़ी हैं। हालांकि, इन परंपराओं का स्वरूप स्थानीय रीति-रिवाजों के अनुसार अलग-अलग हो सकता है।
फाजिल्का में दशहरा उत्सव और शस्त्र पूजन कार्यक्रम का आयोजन ऐसे समय में हुआ, जब 20 अक्टूबर 2026 को देश के कई हिस्सों में विजयादशमी मनाई जा रही है। इस अवसर पर आयोजित स्थानीय कार्यक्रमों के जरिए लोगों को अपनी धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं से जुड़ने का अवसर मिलता है। फाजिल्का के कार्यक्रम में समाजसेवी करण गिलहोत्रा, स्कूलों के प्रिंसिपल और धार्मिक नेताओं की भागीदारी इसकी प्रमुख विशेषताओं में शामिल रही।
