पंजाब के माझा क्षेत्र में रेल कनेक्टिविटी मजबूत करने वाली कादियां-ब्यास नई रेलवे लाइन परियोजना को लेकर बड़ी प्रगति हुई है। रेलवे बोर्ड ने 39.68 किलोमीटर लंबी ब्रॉडगेज रेल लाइन के लिए 1,419.05 करोड़ रुपये के विस्तृत लागत अनुमान को मंजूरी दी है। भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता तरुण चुघ ने सोमवार, 26 अक्टूबर को सोशल मीडिया पर पोस्ट साझा कर इस फैसले का स्वागत किया। उनके मुताबिक, यह परियोजना क्षेत्र के कई कस्बों और गांवों को बेहतर रेल संपर्क उपलब्ध कराने के साथ स्थानीय विकास को भी गति दे सकती है। हालांकि, रेलवे बोर्ड की मंजूरी की जानकारी अगस्त 2026 में ही सामने आ गई थी। अब परियोजना को धरातल पर उतारने में भूमि अधिग्रहण और अन्य प्रशासनिक प्रक्रियाओं की भूमिका अहम होगी।
यह रेलवे परियोजना अपने लंबे इतिहास के कारण भी चर्चा में है। कादियां-ब्यास रेल लाइन का प्रस्ताव ब्रिटिश शासन के दौरान वर्ष 1928-29 में तत्कालीन नॉर्थ-वेस्टर्न रेलवे ने मंजूर किया था। शुरुआती वर्षों में निर्माण कार्य भी काफी आगे बढ़ा, लेकिन बाद में बदलती परिस्थितियों और रेलवे की प्राथमिकताओं के कारण इसे रोक दिया गया। इसके बाद परियोजना को दोबारा शुरू करने के प्रयास हुए। संसद में दिए गए सरकारी जवाब के अनुसार, वर्ष 2011-12 में भी इस रेल लाइन को 205 करोड़ रुपये की लागत से मंजूरी मिली थी, लेकिन कानून-व्यवस्था से जुड़ी समस्याओं के कारण काम आगे नहीं बढ़ सका और परियोजना ठंडे बस्ते में चली गई। लंबे समय तक अटकी रहने के बाद जून 2026 में केंद्र सरकार ने इसे फिर से आगे बढ़ाने की घोषणा की। उस समय परियोजना की अनुमानित लागत करीब 1,400 करोड़ रुपये बताई गई थी। बाद में रेलवे बोर्ड ने 1,419.05 करोड़ रुपये के विस्तृत अनुमान को मंजूरी दी।
किन शहरों और गांवों को मिलेगा फायदा?
प्रस्तावित कादियां-ब्यास रेल लाइन गुरदासपुर जिले के कादियां को अमृतसर जिले के ब्यास से जोड़ेगी। इस रेल कॉरिडोर का मार्ग धपाई, घुमान, बुटाला और सठियाला सहित कई प्रमुख इलाकों से होकर गुजरेगा। इससे माझा क्षेत्र के उन हिस्सों को रेल नेटवर्क तक पहुंच मिलने की उम्मीद है, जहां के लोगों को वर्तमान में रेल यात्रा के लिए दूसरे स्टेशनों पर निर्भर रहना पड़ सकता है। परियोजना पूरी होने के बाद स्थानीय यात्रियों को आवागमन में सुविधा मिलने के साथ आसपास के गांवों की बड़ी आबादी को भी बेहतर परिवहन विकल्प मिल सकता है।
परियोजना में घुमान और बुटाला में दो क्रॉसिंग स्टेशन बनाने की योजना है। इसके अलावा 11 बड़े पुल, 121 छोटे पुल और 54 रोड अंडरब्रिज बनाए जाने का प्रस्ताव है। रोड अंडरब्रिज के निर्माण से रेलवे लाइन के आसपास सड़क यातायात को व्यवस्थित करने और रेल परिचालन के कारण सड़क आवागमन में होने वाली बाधाओं को कम करने में मदद मिल सकती है। नई लाइन पर आधुनिक सिग्नलिंग और दूरसंचार प्रणालियां भी स्थापित की जाएंगी। सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए भारतीय रेलवे की स्वदेशी ट्रेन टक्कर रोकथाम प्रणाली कवच को भी शामिल किया गया है।
आज अहमदाबाद, गुजरात स्थित भाजपा प्रदेश मुख्यालय ‘श्री कमलम’ में ‘लोकतंत्र बचाओ–अराजकता हटाओ’ अभियान की प्रदेश स्तरीय समीक्षा बैठक में सहभागिता की।
बैठक में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष, प्रदेश महामंत्री (संगठन) एवं सभी प्रदेश महामंत्रियों के साथ अभियान की प्रगति, संगठनात्मक गतिविधियों… pic.twitter.com/zP2S5yZl1C
— Tarun Chugh (@tarunchughbjp) October 26, 2026
कवच प्रणाली का उद्देश्य निर्धारित परिस्थितियों में ट्रेन परिचालन के दौरान टक्कर के जोखिम को कम करना और सुरक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाना है। आधुनिक सिग्नलिंग, दूरसंचार और अन्य रेलवे ढांचे के साथ इसका इस्तेमाल परियोजना को तकनीकी रूप से आधुनिक बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि, वास्तविक सुरक्षा और परिचालन संबंधी लाभ इस प्रणाली की स्थापना, परीक्षण और प्रभावी संचालन पर निर्भर करेंगे।
किस तरह बदलेगी क्षेत्र की अर्थव्यवस्था?
कादियां-ब्यास रेल लाइन का लाभ केवल यात्रियों के आवागमन तक सीमित नहीं रहेगा। माझा क्षेत्र में कृषि और छोटे कारोबार की महत्वपूर्ण भूमिका है। बेहतर रेल संपर्क मिलने से किसानों को अपनी उपज बाजारों तक पहुंचाने में सुविधा मिल सकती है। व्यापारियों, विद्यार्थियों और नौकरीपेशा लोगों के लिए यात्रा के नए विकल्प तैयार होंगे। इसके अलावा निर्माण कार्य के दौरान रोजगार के अवसर पैदा होने और भविष्य में परिवहन सुविधा बेहतर होने से स्थानीय व्यापार, छोटे उद्योगों तथा अन्य आर्थिक गतिविधियों को प्रोत्साहन मिलने की संभावना है। इन लाभों की वास्तविक सीमा रेलवे लाइन के शुरू होने और उसके बाद उपलब्ध कराई जाने वाली रेल सेवाओं पर निर्भर करेगी।
धार्मिक पर्यटन के लिहाज से भी इस परियोजना को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। ब्यास स्थित डेरा बाबा जयमल सिंह सहित माझा क्षेत्र के कई धार्मिक और ऐतिहासिक स्थल बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं को आकर्षित करते हैं। कादियां, घुमान और आसपास के इलाकों में बेहतर रेल संपर्क से यात्रियों की आवाजाही आसान हो सकती है। इससे स्थानीय परिवहन, दुकानों, भोजनालयों और अन्य पर्यटन आधारित गतिविधियों को भी लाभ मिलने की उम्मीद है। हालांकि, इन स्थानों तक यात्रा की वास्तविक सुविधा इस बात पर निर्भर करेगी कि नई लाइन पर ट्रेन सेवाएं किस प्रकार संचालित की जाती हैं और दूसरे रेल मार्गों से उनका संपर्क कैसा रहता है।
इस परियोजना का एक अतिरिक्त महत्व रेलवे नेटवर्क के वैकल्पिक उपयोग से भी जुड़ा है। प्रस्तावित लाइन को आपात परिस्थितियों में अमृतसर-पठानकोट रेल खंड के लिए वैकल्पिक रेल संपर्क के रूप में उपयोग करने की संभावना बताई गई है। यदि परिचालन की जरूरत और तकनीकी व्यवस्था इसकी अनुमति देती है, तो इससे कुछ परिस्थितियों में रेल यातायात के प्रबंधन में मदद मिल सकती है। हालांकि, इस लाभ की वास्तविक उपयोगिता संबंधित रेल मार्गों और परिचालन योजनाओं पर निर्भर करेगी।
भूमि अधिग्रहण अब अहम चरण
रेलवे बोर्ड से विस्तृत लागत अनुमान की मंजूरी मिलने के बाद अब परियोजना की प्रगति में भूमि अधिग्रहण और संबंधित प्रशासनिक औपचारिकताएं महत्वपूर्ण हैं। सितंबर 2026 में केंद्र सरकार ने कादियां-ब्यास नई ब्रॉडगेज रेल लाइन को विशेष रेलवे परियोजना घोषित करने और भूमि अधिग्रहण से जुड़ी जिम्मेदारियों के लिए संबंधित अधिकारियों को नामित करने संबंधी अधिसूचनाएं जारी कीं। यह परियोजना को आगे बढ़ाने की प्रक्रिया में एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक कदम है।
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इस रेल लाइन के लिए गुरदासपुर और अमृतसर जिलों में कुल 166.682 हेक्टेयर भूमि की आवश्यकता है। इसमें गुरदासपुर जिले की 95.459 हेक्टेयर और अमृतसर जिले की 71.223 हेक्टेयर भूमि शामिल है। भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी करने, संबंधित विभागों की औपचारिकताएं निपटाने और निर्माण संबंधी कार्यों को आगे बढ़ाने के बाद ही परियोजना की जमीनी प्रगति स्पष्ट होगी।
तरुण चुघ ने अपनी पोस्ट में कहा कि केंद्र की ओर से परियोजना की मंजूरी, धनराशि और आधुनिक तकनीकी व्यवस्था को लेकर आवश्यक कदम उठाए जा चुके हैं। उन्होंने इसे पंजाब के माझा क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया। हालांकि, परियोजना के निर्माण की शुरुआत और इसके पूरा होने की कोई निश्चित तारीख उपलब्ध सरकारी घोषणाओं में स्पष्ट नहीं की गई है। इसलिए फिलहाल यह कहना उचित नहीं होगा कि रेल लाइन पर यात्री सेवाएं कब से शुरू होंगी।
करीब एक सदी पहले प्रस्तावित इस रेल लाइन का फिर से आगे बढ़ना पंजाब के रेल बुनियादी ढांचे के लिए महत्वपूर्ण घटनाक्रम है। इसकी सफलता अब केवल बजट की मंजूरी तक सीमित नहीं है, बल्कि भूमि अधिग्रहण, निर्माण की गति, तकनीकी काम और समय पर प्रशासनिक मंजूरियों पर भी निर्भर करेगी। यदि ये चरण निर्धारित तरीके से पूरे होते हैं, तो कादियां-ब्यास रेल कॉरिडोर आने वाले वर्षों में माझा क्षेत्र के यात्रियों, किसानों, व्यापारियों और धार्मिक स्थलों पर आने वाले श्रद्धालुओं के लिए बेहतर रेल संपर्क का माध्यम बन सकता है।
