रायपुर: छत्तीसगढ़ में विजयादशमी का पर्व धार्मिक आस्था और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ मनाया जा रहा है। इस खास अवसर पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने राजधानी रायपुर स्थित अपने निवास कार्यालय में विधि-विधान से शस्त्र पूजा की और मां भगवती की आराधना की। मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से साझा की गई तस्वीरों में पूजा की तैयारियां, सजे हुए शस्त्र और धार्मिक अनुष्ठान की झलक देखने को मिली। विजयादशमी पर शस्त्र पूजा की परंपरा शक्ति, साहस और कर्तव्य के प्रति सम्मान का प्रतीक मानी जाती है।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने विजयादशमी के पावन अवसर पर पारंपरिक विधि से पूजा-अर्चना की। सामने आई तस्वीरों में पूजा स्थल पर विभिन्न शस्त्रों को सजाकर रखा गया है। शस्त्रों के आसपास गेंदे के फूलों की मालाएं, पुष्प और अन्य पूजन सामग्री दिखाई दे रही है। पीछे मां भगवती की तस्वीर स्थापित की गई है। धार्मिक वातावरण के बीच शस्त्र पूजा का यह आयोजन विजयादशमी की परंपरा और आस्था को दर्शाता है।
जारी तस्वीरों में मुख्यमंत्री को हवन और पूजा की प्रक्रिया में शामिल होते हुए भी देखा जा सकता है। इस दौरान पूजा स्थल पर अन्य लोग भी मौजूद नजर आ रहे हैं। हालांकि, साझा की गई जानकारी में कार्यक्रम में शामिल सभी लोगों के नाम और अन्य विस्तृत ब्यौरे का उल्लेख नहीं किया गया है।
विजयादशमी पर शस्त्र पूजा का क्या है महत्व?
हिंदू धर्म में विजयादशमी को बुराई पर अच्छाई और अधर्म पर धर्म की जीत के प्रतीक के रूप में मनाया जाता है। इस पर्व का संबंध भगवान श्रीराम की रावण पर विजय और देवी दुर्गा की महिषासुर पर विजय से भी जोड़ा जाता है। देश के अलग-अलग हिस्सों में इस दिन की परंपराएं कुछ अलग हो सकती हैं, लेकिन पूजा-पाठ, शस्त्र पूजन और विजय के संकल्प का विशेष महत्व रहता है।
शस्त्र पूजा की परंपरा विशेष रूप से उन लोगों के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है, जिनका जीवन और कार्य सुरक्षा, रक्षा तथा साहस से जुड़ा होता है। परंपरागत रूप से शस्त्रों को शक्ति और जिम्मेदारी का प्रतीक माना जाता है। विजयादशमी पर उनकी पूजा करने का भाव केवल सामर्थ्य का सम्मान करना नहीं, बल्कि उसका उपयोग उचित उद्देश्य और जिम्मेदारी के साथ करने का संकल्प भी है। अलग-अलग क्षेत्रों में इस दिन वाहन, औजार और कामकाज में इस्तेमाल होने वाले उपकरणों की पूजा करने की परंपरा भी प्रचलित है।
विजयादशमी के अवसर पर होने वाले ऐसे धार्मिक आयोजन भारतीय संस्कृति में आस्था और परंपराओं के महत्व को सामने लाते हैं। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की शस्त्र पूजा भी इसी पारंपरिक क्रम का हिस्सा है। इस दिन का संदेश यही है कि जीवन में कितनी भी चुनौतियां आएं, व्यक्ति को सत्य, साहस और अपने कर्तव्यों के मार्ग पर आगे बढ़ना चाहिए।
