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रुद्रप्रयाग बाईपास पर ट्रायल शुरू, बदरीनाथ-केदारनाथ जाने वालों को जाम से मिलेगी राहत? CM धामी ने किया पुल-सुरंग का निरीक्षण

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रुद्रप्रयाग बाईपास पर ट्रायल शुरू, बदरीनाथ-केदारनाथ जाने वालों को जाम से मिलेगी राहत? CM धामी ने किया पुल-सुरंग का निरीक्षण

उत्तराखंड में चारधाम यात्रा के दौरान रुद्रप्रयाग शहर में लगने वाले जाम से राहत मिलने की उम्मीद बढ़ गई है। यहां केदारनाथ और बदरीनाथ राष्ट्रीय राजमार्गों को जोड़ने वाले पुल और सुरंग मार्ग पर ट्रायल के आधार पर वाहनों की आवाजाही शुरू हो गई है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सोमवार, 26 अक्टूबर को इस परियोजना का स्थलीय निरीक्षण किया। उन्होंने कहा कि मार्ग का विधिवत लोकार्पण जल्द किया जाएगा। हालांकि, आम जनता के लिए नियमित यातायात शुरू होने को लेकर अभी औपचारिक घोषणा का इंतजार है।

मुख्यमंत्री धामी ने रुद्रप्रयाग से चमोली जिले के भराड़ीसैंण जाते समय रुद्रप्रयाग बाईपास परियोजना के तहत बने पुल और सुरंग का निरीक्षण किया। इस परियोजना का उद्देश्य चारधाम यात्रा के दौरान सड़क संपर्क को बेहतर बनाना और रुद्रप्रयाग के व्यस्त बाजार क्षेत्र में वाहनों का दबाव कम करना है। नियमित यातायात शुरू होने के बाद केदारनाथ और बदरीनाथ धाम जाने वाले श्रद्धालुओं को शहर के मुख्य बाजार से होकर गुजरने की जरूरत नहीं पड़ेगी। इससे स्थानीय निवासियों को भी जाम की समस्या से राहत मिलने की उम्मीद है।

200 मीटर लंबा पुल और 900 मीटर से अधिक लंबी सुरंग

चारधाम सड़क परियोजना के अंतर्गत तैयार किए गए इस पुल-सुरंग मार्ग में अलकनंदा नदी पर 200 मीटर लंबा पुल और 900.30 मीटर लंबी सुरंग शामिल है। संपर्क मार्गों को मिलाकर परियोजना की कुल लंबाई लगभग 1.18 किलोमीटर बताई गई है। यह मार्ग केदारनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग-107 को बदरीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग-07 से सीधे जोड़ने के लिए बनाया गया है।

रुद्रप्रयाग भौगोलिक रूप से महत्वपूर्ण स्थान पर स्थित है। यहां से केदारनाथ और बदरीनाथ की ओर जाने वाले मार्ग जुड़े हुए हैं। चारधाम यात्रा के व्यस्त समय में बड़ी संख्या में निजी वाहन, टैक्सी, बसें और अन्य यात्री वाहन इस क्षेत्र से गुजरते हैं। ऐसे में शहर के बाजार और प्रमुख सड़कों पर यातायात का दबाव बढ़ जाता है। नया बाईपास इस समस्या को कम करने के उद्देश्य से तैयार किया गया है।

हालांकि, इससे यात्रा में कितना समय बचेगा और शहर के यातायात में कितनी कमी आएगी, इसका कोई आधिकारिक आकलन अभी सामने नहीं आया है। इसका वास्तविक लाभ नियमित यातायात शुरू होने और यात्रियों की आवाजाही के बाद ही स्पष्ट होगा। फिलहाल ट्रायल के आधार पर वाहनों का संचालन शुरू होने को परियोजना की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि चारधाम यात्रा को सुगम, सुरक्षित और व्यवस्थित बनाना राज्य सरकार की प्राथमिकता है। बेहतर सड़क संपर्क से श्रद्धालुओं को सुविधा मिलने के साथ स्थानीय व्यापार और पर्यटन को भी लाभ हो सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि आपदा और आपातकालीन परिस्थितियों में यह वैकल्पिक मार्ग महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

अपने दौरे के दौरान मुख्यमंत्री ने रुद्रप्रयाग-गौरीकुंड राष्ट्रीय राजमार्ग के भूस्खलन प्रभावित क्षेत्रों में चल रहे ढलान सुरक्षा और स्थिरीकरण कार्यों की जानकारी भी ली। पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन के कारण सड़क संपर्क प्रभावित होने का खतरा बना रहता है। ऐसे में ढलानों को मजबूत करने और संवेदनशील स्थानों पर सुरक्षा उपाय विकसित करने से यात्रियों की सुरक्षा बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है।

परियोजना की लागत को लेकर भी एक महत्वपूर्ण तथ्य सामने आता है। राज्य सरकार की ओर से जारी जानकारी में पुल-सुरंग मार्ग की लागत लगभग 156 करोड़ रुपये बताई गई है। वहीं, केंद्रीय सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय की परियोजना निगरानी रिपोर्ट में 900.30 मीटर लंबी सुरंग और अलकनंदा नदी पर पुल से संबंधित इसी विवरण वाली परियोजना की लागत 251.88 करोड़ रुपये दर्ज है। दोनों आंकड़ों में अंतर है और उपलब्ध जानकारी से इसकी स्पष्ट वजह तय नहीं होती। इसलिए परियोजना की अंतिम लागत या वास्तविक खर्च के संबंध में आधिकारिक स्पष्टीकरण जरूरी है।

फिलहाल रुद्रप्रयाग बाईपास पर ट्रायल के आधार पर वाहनों की आवाजाही शुरू हो चुकी है और मुख्यमंत्री ने इसके विधिवत लोकार्पण की बात कही है। नियमित यातायात शुरू होने के बाद ही पता चलेगा कि यह मार्ग चारधाम यात्रियों और रुद्रप्रयाग के स्थानीय लोगों को जाम से कितनी राहत दिला पाता है।

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