नई दिल्ली: दिल्ली के जनकपुरी में विजयादशमी के अवसर पर भव्य रामलीला महोत्सव का आयोजन किया गया। इस दौरान धार्मिक उत्साह और पारंपरिक रीति-रिवाजों के बीच रावण दहन की रस्म संपन्न हुई। दिल्ली सरकार के मंत्री आशीष सूद ने रावण दहन किया। जनकपुरी के दशहरा ग्राउंड में आयोजित यह कार्यक्रम इलाके की वार्षिक रामलीला परंपरा का हिस्सा रहा, जिसमें भगवान श्रीराम की जीवनगाथा और रामायण के प्रसंगों के माध्यम से धर्म, सत्य और सदाचार का संदेश दिया जाता है।
जनकपुरी में श्री रामलीला कमेटी की ओर से आयोजित होने वाली रामलीला का इस वर्ष 29वां वार्षिक आयोजन था। दशहरा ग्राउंड में होने वाला यह कार्यक्रम क्षेत्र की पुरानी धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं में शामिल है। हर वर्ष रामलीला के माध्यम से भगवान श्रीराम के जीवन, माता सीता के हरण, वानर सेना की भूमिका और राम-रावण युद्ध जैसे प्रसंगों को मंच पर प्रस्तुत किया जाता है। विजयादशमी के दिन रावण दहन के साथ इस आयोजन का प्रमुख चरण पूरा होता है।
रावण दहन को भारतीय परंपरा में बुराई पर अच्छाई, असत्य पर सत्य और अधर्म पर धर्म की विजय का प्रतीक माना जाता है। रामायण के अनुसार, भगवान श्रीराम ने लंका के राजा रावण का वध कर माता सीता को उसकी कैद से मुक्त कराया था। इसी प्रसंग की स्मृति में दशहरे पर देश के विभिन्न हिस्सों में रावण के पुतले जलाए जाते हैं। जनकपुरी में भी रावण दहन के आयोजन के जरिए इसी पारंपरिक संदेश को सामने रखा गया।
दिल्ली में रामलीला केवल धार्मिक आयोजन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह स्थानीय समुदाय के लिए सामाजिक और सांस्कृतिक मेल-मिलाप का अवसर भी होती है। रामलीला के मंचन में रामायण के पात्रों और घटनाओं के माध्यम से मर्यादा, कर्तव्य, पारिवारिक संबंधों, न्याय और नैतिकता जैसे विषयों को प्रस्तुत किया जाता है। ऐसे आयोजनों में अलग-अलग आयु वर्ग के लोग भाग लेते हैं और नई पीढ़ी को भारतीय पौराणिक कथाओं तथा सांस्कृतिक परंपराओं से परिचित होने का अवसर मिलता है।
जनकपुरी रामलीला की तैयारियों के लिए सितंबर में भूमि पूजन कार्यक्रम भी आयोजित किया गया था। उस अवसर पर दिल्ली सरकार के मंत्री आशीष सूद, असम के पूर्व राज्यपाल जगदीश मुखी, स्वामी प्रज्ञानंद सरस्वती और दिल्ली के पूर्व महापौर नरेंद्र चावला सहित कई लोग मौजूद रहे थे। आयोजन से जुड़े लोगों ने उस समय भी रामलीला की परंपरा को आगे बढ़ाने और कार्यक्रम को बेहतर ढंग से संपन्न कराने की बात कही थी।
रामलीला कमेटी जनकपुरी में कई वर्षों से इस वार्षिक आयोजन को आयोजित करती आ रही है। पूर्व महापौर नरेंद्र चावला ने तैयारियों के दौरान बताया था कि जनकपुरी में पिछले 29 वर्षों से रामलीला का आयोजन होता रहा है और दर्शकों के बैठने के लिए बड़े स्तर पर व्यवस्था की जाती है। इस निरंतरता से पता चलता है कि स्थानीय स्तर पर रामलीला का आयोजन धार्मिक आस्था के साथ-साथ सामुदायिक परंपरा के रूप में भी महत्वपूर्ण स्थान रखता है।
विजयादशमी के अवसर पर रावण दहन के साथ रामलीला का संदेश एक बार फिर सामने आता है कि अहंकार, अन्याय और बुराई का अंत निश्चित है। जनकपुरी में आयोजित रामलीला महोत्सव ने इसी पारंपरिक संदेश को आगे बढ़ाया। धार्मिक आयोजनों के माध्यम से लोगों को सत्य, मर्यादा और सदाचार के मूल्यों की याद दिलाना रामलीला की प्रमुख विशेषता रही है।
